कपड़ा उद्योग का सरकार से आग्रह : सभी परिधानों पर एक समान 5% GST लागू करें
बेंगलुरु. कर्नाटक होजरी एंड गारमेंट एसोसिएशन (Karnataka Hosiery and Garment Association) ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से मांग की है कि सभी परिधानों (Garments) पर एक समान 5% GST (GST on Garments) लागू किया जाए। संगठन का कहना है कि मौजूदा जीएसटी स्लैब जटिल है और इससे न तो उद्योग को फायदा मिल रहा है और न ही उपभोक्ताओं को।
करोड़ों रोजगार पर मंडराता संकट

एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सज्जन राज मेहता ने कहा कि वस्त्र व परिधान क्षेत्र (Textile Sector) कृषि के बाद देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला उद्योग है। इसमें महिला और प्रवासी मजदूरों की बड़ी संख्या काम करती है। सरल टैक्स दर से करोड़ों लोगों की आजीविका को स्थिरता मिलेगी और रोजगार पर लगे खतरे कम होंगे।
उद्योग को होगा कर अनुपालन में लाभ
मौजूदा दोहरे टैक्स स्लैब से एमएसएमई (MSME in Garments) कारोबारियों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। परिधान उद्योग का मानना है कि अगर सभी वस्त्रों पर 5% जीएसटी लागू किया गया तो कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान होगा, वर्गीकरण को लेकर विवाद घटेंगे और कर चोरी की गुंजाइश भी कम होगी।
मध्यम वर्ग होगा लाभान्वित
मेहता ने बताया कि देश में बिकने वाले ज्यादातर कपड़े ₹500 से ₹2,500 की रेंज में आते हैं। ऐसे परिधानों पर अधिक टैक्स उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ डालता है। परिधान उद्योग का तर्क है कि कपड़े कोई विलासिता की वस्तु नहीं, बल्कि जरूरत हैं। एक समान 5% टैक्स से मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी और बाजार में खपत (Consumption in Garment Sector) भी बढ़ेगी।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में मदद
एसोसिएशन का कहना है कि बढ़ती लागत के चलते भारतीय परिधान उद्योग पहले से ही बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा (Global Garment Market Competition) झेल रहा है। एक समान जीएसटी दर मिलने से घरेलू और निर्यात बाजार दोनों में भारतीय परिधानों की स्थिति मजबूत होगी।
सरकार से पुनर्विचार की अपील
एसोसिएशन ने जीएसटी काउंसिल और वित्त मंत्रालय से अनुरोध किया है कि सभी परिधानों पर मूल्य की परवाह किए बिना 5% जीएसटी दर लागू की जाए। उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार इनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी।
