मतदाता सूची सुधार का चरण: 65 हजार केंद्रों पर प्रकाशित हुई प्रारूप सूची, 23 दिसंबर से शुरू होगा दावा-आपत्ति अवधि
भोपाल: मध्य प्रदेश में मतदाता सूची (Voters List) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के तहत एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। प्रदेश के 65 हजार से अधिक मतदान केंद्रों पर प्रारूप मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) का प्रकाशन कर दिया गया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (Chief Electoral Officer) संजीव कुमार झा ने मंगलवार को भोपाल में आयोजित एक बैठक में सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों (National Political Parties) को इसकी जानकारी दी और उन्हें प्रारूप सूची की सीडी भी प्रदान की.
क्या है दावा-आपत्ति का नया समयसीमा?
प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद अब दावा-आपत्ति (Claims and Objections) का महत्वपूर्ण चरण शुरू होने वाला है। यह प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 22 जनवरी 2026 तक चलेगी.
इस एक महीने की अवधि में:
- वे नागरिक जिनका नाम सूची से गलती से छूट गया है, वे अपना नाम जुड़वा सकते हैं।
- कोई भी व्यक्ति सूची में गलत या अयोग्य प्रविष्टि के खिलाफ आपत्ति दर्ज करा सकता है।
- पते या अन्य विवरणों में सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।
युवा मतदाताओं के लिए विशेष अवसर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने विशेष रूप से युवा मतदाताओं (Young Voters) का आह्वान किया है। जो युवा 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे इस अवधि का लाभ उठा सकते हैं.
ऑनलाइन पंजीकरण: युवा भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की आधिकारिक वेबसाइट Voters.eci.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म-6 भर सकते हैं.
ऑफलाइन विकल्प: इसके लिए वे अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी (Booth Level Officer – BLO) से भी संपर्क कर सकते हैं.
कैसे हुई सूची तैयार?
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर प्रदेश में यह विशेष गहन पुनरीक्षण 4 नवंबर से शुरू हुआ था. इस दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया और गणना पत्रक भरे. श्री झा ने बताया कि इस कार्य में प्रदेश के मतदाताओं की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली.
राजनीतिक दलों की भूमिका
इस महत्वपूर्ण बैठक में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित विभिन्न राष्ट्रीय दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए. उन्हें प्रारूप सूची की सीडी दिए जाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दल अपने स्तर पर सूची का सूक्ष्मता से अध्ययन करें और आवश्यक सुधार सुझाने में निर्वाचन प्रशासन का सहयोग करें।
मतदाता सूची का शुद्ध और व्यापक होना लोकतंत्र की पहली और सबसे मजबूत नींव है। इस संशोधन अवधि का उपयोग कर प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार को सुनिश्चित कर सकता है।
