भारत के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी मामले की केंद्रीय संदिग्ध यांगचेन लाचुंगपा गिरफ्तार
भोपाल: लगभग एक दशक से चल रहे भारत के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी (International Wildlife Trafficking) मामले में केंद्रीय भूमिका निभाने वाली मुख्य संदिग्ध यांगचेन लाचुंगपा को गिरफ्तार कर लिया गया है। मध्य प्रदेश वन विभाग ने इस गिरफ्तारी को देश की वन्यजीव अपराध (Wildlife Crime) रोकथाम में एक बड़ी सफलता बताया है।
गिरफ्तारी 2 दिसंबर को सिक्किम के उत्तरी जिले के दूरस्थ पहाड़ी शहर लाचुंग में मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (MP State Tiger Strike Force) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (Wildlife Crime Control Bureau) की संयुक्त टीम ने की। इससे दो माह पूर्व ही इंटरपोल (Interpol) ने भारत के अनुरोध पर लाचुंगपा के खिलाफ रेड नोटिस (Red Notice) जारी किया था।
दस साल पुराने मामले में नया मोड़
यह मामला जुलाई 2015 से चला आ रहा है, जब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (Satpura Tiger Reserve) के कमती रेंज में गश्त के दौरान वनकर्मियों को बाघ की हड्डियाँ, चमड़ा, बाघ की हड्डी का तेल और 1.5 किलोग्राम पैंगोलिन (Pangolin) के शल्क मिले थे। इस खोज ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। अक्टूबर 2015 में गिरफ्तार एक अन्य संदिग्ध जय तामांग ने लाचुंगपा को इस नेटवर्क का एक प्रमुख कड़ी और खरीदार बताया था। मध्य प्रदेश वन विभाग ने इस साजिश में शामिल 36 लोगों की पहचान की थी, जिनमें से 27 को दिसंबर 2022 में नर्मदापुरम की एक अदालत ने दोषी ठहराया था।
चीन बाजार के लिए नेटवर्क
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया है कि लाचुंगपा बाघ और पैंगोलिन के अंगों की चीन (Chinese Markets) के बाजारों में तस्करी करने वाले नेटवर्क की एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कड़ी थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, उसका नेटवर्क नेपाल, तिब्बत और भूटान तक फैला हुआ था और देश के अंदर दिल्ली, सिलीगुड़ी, कोलकाता, कानपुर, इटारसी और होशंगाबाद जैसे शहरों से जुड़ा था।
वित्तीय लेनदेन ने खोला राज
जांच के दौरान जब्त किए गए वित्तीय रिकॉर्ड (Financial Records) से इस अवैध व्यापार के व्यापक पैमाने का पता चलता है। तामांग के बैंक खाते की जांच में अधिकारियों को सिर्फ छह-सात महीनों में 65 लाख रुपये से अधिक के “महत्वपूर्ण लेनदेन” मिले।
आठ साल पहले हुई थी फरार
लाचुंगपा को 2017 में भी गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने के बाद वह फरार हो गई थी। उसके बाद से ही उसे ढूंढा जा रहा था। वर्तमान में उसकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और उसे मध्य प्रदेश लाने के लिए ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर लिया गया है, जहाँ नर्मदापुरम की अदालत में मुख्य मामला चल रहा है।
एसटीएसएफ को सीएम ने सराहा, पुरस्कार देने की घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण सफलता बताते हुए कहा कि इस कार्यवाही में शामिल एसटीएसएफ के दल को उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश में बाघों सहित सभी प्रकार के वन्यजीवों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
