Sagar News कोल्ड्रिफ कफ सिरप में जहरीला रसायन: सागर जिले में तत्काल बिक्री पर प्रतिबंध
सागर: छिंदवाड़ा जिले में बच्चों की मौत के मामलों के बाद कोल्ड्रिफ कफ सिरप (Coldrif Cough Syrup) में खतरनाक रसायन की मौजूदगी सामने आई है। इस दवा में डाइईथीलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) नामक जहरीला रसायन पाए जाने के बाद सागर जिला प्रशासन ने इसकी बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है।
परीक्षण रिपोर्ट में खुलासा
तमिलनाडु के चेन्नई स्थित औषधि नियंत्रक (Drug Controller) ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप का नमूना अवमानक (Substandard) पाया गया है। परीक्षण में निम्नलिखित विवरण सामने आए:
उत्पाद का नाम: कोल्ड्रिफ कफ सिरप (Coldrif Cough Syrup)
बैच नंबर (Batch Number): SR-13
निर्माण तिथि: मई 2025
समाप्ति तिथि: अप्रैल 2027
निर्माता: M/s श्रीसन फार्मा (Sresan Pharma), कांचीपुरम
प्रयोगशाला परीक्षण (Laboratory Test) में सिरप में डाइईथीलीन ग्लाइकोल की मौजूदगी मिली, जो एक अत्यंत विषैला रसायन है और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकता है।
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कलेक्टर ने जारी किया आदेश
सागर जिले के कलेक्टर संदीप जीआर ने जनहित को ध्यान में रखते हुए इस दवा के क्रय, विक्रय और वितरण (Purchase, Sale and Distribution) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि यह कदम भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया है।
दवा विक्रेताओं के लिए निर्देश
जिला प्रशासन ने सभी औषधि विक्रेताओं (Retailers) और वितरकों (Distributors) को जारी निर्देशों में कहा है कि :
- यदि किसी विक्रेता या वितरक के पास यह दवा उपलब्ध है, तो इसकी तुरंत जानकारी दें
- खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration), जिला सागर को सूचित करें
- इस दवा की बिक्री या वितरण पर तत्काल रोक लगाएं
- स्टॉक का पूरा विवरण संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराएं
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि, अभिभावकों से अपील
यह प्रतिबंध छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के गंभीर मामलों के बाद लगाया गया है। डाइईथीलीन ग्लाइकोल बच्चों में किडनी फेलियर (Kidney Failure), तंत्रिका तंत्र को नुकसान और यहां तक कि मृत्यु का कारण बन सकता है। अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को कोई भी दवा देने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें और दवा की गुणवत्ता की जांच जरूर करें। यदि किसी बच्चे ने यह सिरप लिया है और उसमें कोई लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।
मानव अधिकार आयोग की कार्रवाई:
मामले का संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग (Madhya Pradesh Human Rights Commission) ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को जांच कराने और कार्रवाई करने का प्रतिवेदन दो सप्ताह (Suo Motu Notice, Inquiry Report in Two Weeks) में प्रस्तुत करने को कहा है।
