इंदौर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत, 1100 से अधिक बीमार
इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर (Cleanest City) इंदौर में एक गंभीर घटना सामने आई है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित जल आपूर्ति (Water Supply) के कारण एक हफ्ते के भीतर 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 1100 से अधिक लोग बीमार पड़े हैं। इस लापरवाही के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कई अधिकारियों को निलंबित और बर्खास्त किया गया है।
भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त (Vomiting-Diarrhea) की समस्या
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने पुष्टि की कि भागीरथपुरा क्षेत्र में खराब पानी (Contaminated Water) पीने से पिछले एक हफ्ते में सात लोगों की मौत हुई है। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान उल्टी-दस्त से 1100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 111 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा है। प्रभावित क्षेत्र में चार एम्बुलेंस और मेडिकल स्टाफ की विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
पानी दूषित होने का कारण: पाइपलाइन लीकेज (Pipeline Leakage)
नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव ने दूषित जल का कारण बताते हुए कहा कि भागीरथपुरा में मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज पाया गया, जिसके ठीक ऊपर एक टॉयलेट बना हुआ था। संभवतः इसी रिसाव से सीवेज का पानी पेयजल आपूर्ति में मिल गया, जिससे यह जल संकट उत्पन्न हुआ।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) का बयान
मध्य प्रदेश विधानसभा मामलों के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “गलती हुई है, लेकिन बेहतर होगा कि पहले सभी मरीज ठीक हों। दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उनका पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो।” उन्होंने मौतों की सही संख्या पर स्पष्टता देते हुए कहा कि कुछ मौतें प्राकृतिक कारणों से भी हुई हैं, इसलिए जांच के बाद ही सही आंकड़े साझा किए जाएंगे।
अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई (Action Against Officials)
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि जनता का स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य के मामले में किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए:
- जोन क्रमांक-4 के जोनल अधिकारी को निलंबित किया गया
- सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री को निलंबित किया गया
- प्रभारी उप यंत्री को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया
- मामले की गहन जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित की गई है।
