MP News :दावोस में निवेश पर जोर, वैश्विक निवेशकों से सीधा संवाद करेंगे सीएम डॉ. मोहन यादव
भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जनवरी 2026 में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित होने वाले विश्व आर्थिक फोरम (World Economic Forum – WEF) की वार्षिक बैठक में हिस्सा लेंगे। इस वैश्विक मंच (global platform) पर वे राज्य को एक प्रमुख निवेश गंतव्य (investment destination) के रूप में पेश करेंगे और बहुराष्ट्रीय कंपनियों (multinational companies) के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधा संवाद स्थापित करेंगे।
प्राथमिकता वाले क्षेत्रों (focus sectors) पर होगा जोर
मध्यप्रदेश दावोस में ऑटोमोटिव एवं न्यू मोबिलिटी, अक्षय ऊर्जा (renewable energy), ग्रीन हाइड्रोजन (green hydrogen), आईटी-ईएसडीएम और खाद्य प्रसंस्करण (food processing) जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं और निवेश अवसरों (investment opportunities) को प्रस्तुत करेगा।
ऑटोमोटिव: राज्य पीथमपुर जैसे ऑटो क्लस्टर्स की सफलता और ईवी निर्माण (EV manufacturing) व बैटरी स्टोरेज के लिए मजबूत इकोसिस्टम को वैश्विक निवेशकों के सामने रखेगा।
अक्षय ऊर्जा: रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट (Rewa Ultra Mega Solar Project) और ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट जैसी परियोजनाओं के माध्यम से राज्य की हरित ऊर्जा क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा।
आईटी व ईएसडीएम: इंदौर और भोपाल को उभरते आईटी व ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (Global Capability Centers – GCCs) के रूप में पेश किया जाएगा और राज्य की प्रोत्साहक नीतियों की जानकारी दी जाएगी।
खाद्य प्रसंस्करण: राज्य को ‘भारत का खाद्य टोकरी (Food Basket of India)’ कहते हुए मेगा फूड पार्कों और कृषि आधारित मूल्य संवर्धन में निवेश के मौकों पर चर्चा होगी।
सीईओ व उद्योगपतियों के साथ होंगी बैठकें
डॉ. यादव अपने दावोस प्रवास के दौरान फॉर्च्यून 500 कंपनियों (Fortune 500 companies) के सीईओ और वैश्विक उद्योगपतियों के साथ एक-एक कर बैठकें करेंगे। विभिन्न क्षेत्रों पर केंद्रित राउंडटेबल चर्चाओं में राज्य के मौजूदा निवेशक भी अपने सकारात्मक अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा, वे विश्व आर्थिक फोरम के श्रम, ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों पर आयोजित सत्रों में भी भाग लेंगे।
इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य मध्यप्रदेश को भविष्य के अनुकूल राज्य (future-ready state) के रूप में स्थापित करना, निवेश के आशय पत्र (MOUs) पर चर्चा को गति देना और वैश्विक नीति निर्माताओं के साथ संबंध मजबूत करना है।
