चर्च ऑफ इंग्लैंड में नया दौर : सारा मुलाली नई आर्कबिशप ऑफ कैंटरबरी (Archbishop of Canterbury)
सारा मुलाली (Dame Sarah Mullally) यह पद संभालने वाली पहली महिला
लंदन. चर्च ऑफ इंग्लैंड (Church of England) ने अपने 500 साल पुराने इतिहास में पहली बार किसी महिला को देश का आध्यात्मिक प्रमुख चुना है। डेम सारा मुलाली (Dame Sarah Mullally) को आधिकारिक रूप से आर्कबिशप ऑफ कैंटरबरी (Archbishop of Canterbury) नियुक्त किया गया है। वह इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला हैं।
सारा मुलाली (Sarah Mullally) का सफर
63 वर्षीय सारा मुलाली का करियर बेहद अनूठा रहा है। 1999 में वह इंग्लैंड की सबसे कम उम्र की चीफ नर्सिंग ऑफिसर (Chief Nursing Officer) बनीं। लगभग 35 वर्षों तक उन्होंने नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) में सेवा दी। इसके बाद 2006 में उन्होंने पादरी (Priest) बनने का निर्णय लिया।
- 2012: सैलिसबरी कैथेड्रल (Salisbury Cathedral) की कैनन ट्रेज़रर बनीं।
- 2015: एक्सेटर (Exeter) के डॉयसीज़ में क्रेडिटॉन की बिशप (Bishop of Crediton) बनीं।
- 2018: लंदन की पहली महिला बिशप (Bishop of London) नियुक्त हुईं।
चर्च का कठिन दौर
आर्कबिशप जस्टिन वेल्बी (Justin Welby) ने पिछले वर्ष एक चाइल्ड एब्यूज स्कैंडल (Child Abuse Scandal) के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि चर्च ने आरोपित जॉन स्माइथ (John Smyth) के मामलों को 2013 में पुलिस तक नहीं पहुँचाया। तब से चर्च शीर्ष पद पर खाली था। इस दौरान आर्कबिशप ऑफ यॉर्क स्टीफन कॉटरल (Stephen Cottrell) ने अस्थायी रूप से जिम्मेदारी संभाली।
नए आर्चबिशप की चुनौतियाँ
डेम सारा मुलाली के सामने चर्च को आधुनिक और जवाबदेह बनाने की चुनौती है। उनका फोकस रहेगा:
- एब्यूज केस (Abuse Cases) को संवेदनशीलता और न्याय के साथ हल करना।
- चर्च में गिरती उपस्थिति (Declining Attendance) को सुधारना।
- सामाजिक मुद्दों पर चर्च की भूमिका को संतुलित करना।
असिस्टेड डाइंग (Assisted Dying) की प्रबल विरोधी
सारा मुलाली असिस्टेड डाइंग (Assisted Dying) की प्रबल विरोधी हैं। संसद में इस पर कानून बनने के समय उन्होंने इसे “असुरक्षित और अव्यवहारिक” बताया और कहा कि यह समाज के सबसे कमजोर लोगों के लिए खतरा है।
समलैंगिक विवाह (Same-sex Marriages)
लंदन की बिशप के रूप में, उन्होंने उस समिति की अध्यक्षता की जो समलैंगिक विवाहों को आशीर्वाद देने के फैसले पर काम कर रही थी। 2023 में पादरियों को समलैंगिक जोड़ों को आशीर्वाद देने की अनुमति देने के फैसले को उन्होंने “चर्च के लिए आशा का क्षण” बताया।
प्रधानमंत्री और चर्च की प्रक्रिया
परंपरा के अनुसार, नए आर्कबिशप के नाम की सिफारिश प्रधानमंत्री को भेजी जाती है और फिर राजा इसकी घोषणा करते हैं। प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर (Keir Starmer) ने सारा मुलाली की नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा कि यह भूमिका हमारे राष्ट्रीय जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नियुक्ति का होगा वैश्विक प्रभाव
चर्च ऑफ इंग्लैंड के सर्वोच्च बिशप होने के नाते सारा मुलाली न केवल ब्रिटेन बल्कि पूरी दुनिया में एंग्लिकन कम्युनियन (Anglican Communion) की आध्यात्मिक नेता होंगी। उनका जीवन और अनुभव चर्च को नए युग में आगे बढ़ाने की दिशा तय करेगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
चर्च ऑफ इंग्लैंड में महिलाओं को पहली बार 1994 में पादरी के रूप में नियुक्त किया गया था। पहली महिला बिशप की नियुक्ति 20 साल बाद 2014 में हुई।
तकनीकी रूप से, राजा चर्च ऑफ इंग्लैंड के प्रमुख हैं, लेकिन कैंटरबरी के आर्कबिशप सबसे वरिष्ठ बिशप और चर्च तथा विश्वव्यापी एंग्लिकन कम्युनियन (Anglican Communion) के आध्यात्मिक नेता होते हैं।
पूर्व आर्कबिशप रोवन विलियम्स (Rowan Williams) ने इस नई भूमिका को “एक हाथ में अखबार और दूसरे में बाइबिल” की जरूरत वाली भूमिका बताया है।
