Sagar News जानें सागर जिले में कहां खिलेगा प्रदेश का पहला ‘नमो फ्रूट फॉरेस्ट’
सागर: जिले में मध्यप्रदेश का पहला नमो फ्रूट वन (Namo Fruit Forest) आकार ले रहा है। इस उद्यान का निरीक्षण मंगलवार को खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने किया। खास बात यह रही कि मंत्री स्वयं ट्रैक्टर चलाकर ग्रामीणों के बीच पहुंचे और पौधरोपण की गतिविधियों को करीब से देखा।
21 हजार पौधों से रखी Namo Fruit Forest की नींव
प्रदेश का पहला नमो फ्रूट वन (Namo Fruit Forest) सुरखी विधानसभा के बरौदा गांव की 70 एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा है। सेवा पखवाड़ा (Seva Pakhwada) कार्यक्रम के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर यहां 21 हजार फलदार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। यह न सिर्फ एक हरित पहल है बल्कि ग्रामीण अंचल में पर्यावरण और आजीविका दोनों को मजबूती देने वाला प्रकल्प है। राजपूत ने पेड़ों की देखभाल, सिंचाई व्यवस्था और ग्रामीण सहभागिता की जानकारी ली और लोगों को पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
10 लाख पौधे और कुटीर उद्योग का खाका
मंत्री राजपूत ने बताया कि इस नमो फ्रूट फॉरेस्ट का लक्ष्य 10 लाख पौधों का रोपण (Fruit Plantation) है। बरौदा में फूड प्रोसेसिंग (Food Processing) और कुटीर उद्योग (Cottage Industry) स्थापित करने की भी योजना तैयार की जा रही है। इससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार (Employment Opportunities) मिलेगा और गांव की आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी। साथ ही तालचिरी गांव में भी 10 एकड़ क्षेत्र में एक और नमो फ्रूट उद्यान तैयार किया जा रहा है।
महिलाओं के हाथों में आत्मनिर्भरता की चाबी
इस प्रकल्प का संचालन महिला स्व सहायता समूहों (Self Help Groups) को सौंपा जाएगा। मंत्री ने कहा कि यह कदम महिलाओं को आत्मनिर्भर (Women Empowerment) बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा। कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि समय सीमा में सभी कार्य पूरे हों और पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित की जाए।
हर मौसम के फल एक ही छांव में
नमो फ्रूट वन (Namo Fruit Garden) की विशेषता यह है कि इसमें लगभग सभी प्रकार के फलदार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। आम, अमरूद, आंवला, कटहल, नींबू, अनार और सीताफल जैसे हजारों पौधों से यह क्षेत्र एक बहुरंगी उद्यान बन जाएगा। यह न केवल स्वाद और पोषण प्रदान करेगा बल्कि राज्य में बागवानी (Horticulture Development) को भी नई दिशा देगा।
पर्यावरण और ग्रामीण भविष्य का संगम
निरीक्षण के अंत में मंत्री राजपूत ने ग्रामीणों से पौधों को अपनाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह फ्रूट फॉरेस्ट (Fruit Forest Project) सिर्फ हरियाली का प्रतीक नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए रोजगार, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) की नई मिसाल बनेगा।
