MP News प्रदेश में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता, स्टेट टास्क फोर्स ने संभाली कमान
भोपाल. विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health of Students) को लेकर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) उच्च शिक्षा विभाग (Higher Education Department) ने महत्वपूर्ण पहल की है। सुप्रीम कोर्ट और नेशनल टास्क फोर्स (National Task Force – NTF) के निर्देशों के अनुपालन में स्टेट टास्क फोर्स (State Task Force – STF) को पूर्णतः सक्रिय कर दिया गया है, जो अब पूरे राज्य में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों (Coaching Institutes) में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी उपायों की निगरानी कर रही है।
आयुक्त प्रबल सिपाहा बने राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी
नेशनल टास्क फोर्स ने आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा (Commissioner Prabal Sipaha) को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी (State Level Nodal Officer) नियुक्त किया है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह पहल विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, सहयोगी और दबावमुक्त शैक्षणिक माहौल (Stress-Free Academic Environment) तैयार करने की दिशा में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रयास है।
बहु-विभागीय स्टेट टास्क फोर्स का गठन
एसटीएफ के अध्यक्ष आयुक्त श्री प्रबल सिपाहा हैं, जबकि ओएसडी डॉ. उषा के. नायर को सदस्य सचिव (Member Secretary) नियुक्त किया गया है। इस टास्क फोर्स में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, बाल सुरक्षा, सामाजिक न्याय तथा नगरीय प्रशासन विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह बहु-विभागीय तंत्र (Multi-Departmental Mechanism) विद्यार्थियों की चुनौतियों को व्यापक दृष्टि से संबोधित करेगा।
स्टेट टास्क फोर्स की जिम्मेदारियां
एसटीएफ निम्नलिखित कार्यों के लिए उत्तरदायी है:
- राज्य में मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श उपायों (Counseling Services) की निगरानी
- कोचिंग और कॉलेज परिसरों का मानसिक स्वास्थ्य ऑडिट (Mental Health Audit)
- हेल्पलाइन, काउंसलिंग और मनोसामाजिक समर्थन व्यवस्था को मजबूत करना
- जिला स्तरीय डीटीएफ को दिशा-निर्देश और उनकी रिपोर्ट की समीक्षा
- आत्महत्या रोकथाम (Suicide Prevention) से जुड़े जोखिम कारकों की पहचान
- राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव (Policy Recommendations)
शैक्षणिक संस्थानों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति
सुधारों के प्रभावी समन्वय के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी शासकीय एवं निजी शैक्षणिक संस्थानों (Government and Private Educational Institutions) को नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें सरकारी विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक और सभी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं।
जिला स्तरीय टास्क फोर्स से जमीनी निगरानी
प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय टास्क फोर्स (District Task Force – DTF) का गठन अनिवार्य कर दिया गया है। डीटीएफ की अध्यक्षता जिला कलेक्टर (District Collector) करेंगे, जबकि अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य, जिला शिक्षा अधिकारी और तकनीकी, चिकित्सा तथा स्वास्थ्य विभागों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे।
डीटीएफ की प्रमुख जिम्मेदारियां:
- कोचिंग संस्थानों के पंजीयन की निगरानी (Registration Monitoring)
- परामर्श सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना
- एसटीएफ-एनटीएफ निर्देशों का क्रियान्वयन
- शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा (Campus Safety)
कोचिंग संस्थानों का अनिवार्य पंजीयन
उच्च शिक्षा विभाग ने सुनिश्चित किया है कि किसी भी जिले में बिना पंजीयन (Mandatory Registration) के कोई कोचिंग संस्था संचालित न हो। यह कदम विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव (Academic Pressure), अनियमित प्रबंधन और अनुशासनहीन वातावरण को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।
तनाव प्रबंधन की आवश्यकता
देशभर में मानसिक तनाव और परीक्षा दबाव (Exam Stress) से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। उच्च शिक्षा विभाग का मानना है कि समस्या केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि संस्थागत संरचना से भी जुड़ी है। गाइडलाइन, परामर्श, निगरानी और संवाद की कमी विद्यार्थियों को अकेला कर देती है। एसटीएफ और डीटीएफ का गठन इसी कमी को दूर करने और छात्र कल्याण (Student Welfare) सुनिश्चित करने का प्रयास है।
