MP News मध्यप्रदेश बना भारत का नया फूड-बास्केट, कृषि क्रांति से रचा इतिहास
भोपाल. कभी बीमारू राज्य (Sick State) कहलाने वाला मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) आज देश का नया फूड-बास्केट (Food Basket) बन चुका है। कृषि समृद्धि (Agricultural Prosperity) और तीव्र आर्थिक विकास (Economic Development) के दम पर प्रदेश ने विकास की दौड़ में नया मुकाम हासिल किया है।
गेहूं उत्पादन में देश में अव्वल
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश अब गेहूं (Wheat), चना (Gram), मसूर (Lentil), सोयाबीन (Soybean) और तिलहन उत्पादन (Oilseed Production) में देश में अग्रणी स्थान पर है। गेहूं उत्पादन में तो राज्य ने पंजाब और हरियाणा जैसे परंपरागत कृषि राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह किसानों की मेहनत और सरकार की संवेदनशील नीतियों का परिणाम है।
24 प्रतिशत की शानदार विकास दर
हालिया आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) में मध्यप्रदेश ने 24 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है। इस प्रगति में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों (Allied Sectors) का सबसे बड़ा योगदान रहा है। डबल डिजिट विकास दर (Double Digit Growth Rate) ने राज्य को आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से अग्रसर किया है।
किसान कल्याण योजनाओं का असर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने का संकल्प लिया है। भावांतर भुगतान योजना (Bhavantar Bhugtan Yojana), प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN), फसल बीमा योजना (Crop Insurance), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी और बोनस राशि जैसे प्रयासों ने किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है।
सिंचाई सुविधाओं का विस्तार
नर्मदा घाटी विकास परियोजना (Narmada Valley Project), पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक और केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी लिंक परियोजना (Ken-Betwa River Link Project) से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के सुदृढ़ीकरण से रबी सीजन (Rabi Season) में उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ी है।
आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग
राज्य के किसान अब ड्रिप इरिगेशन (Drip Irrigation), जैविक खेती (Organic Farming), बहुफसली खेती (Multicropping) और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) ने किसानों को नवीनतम जानकारी और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया है।
चना और दलहन उत्पादन में अग्रणी
मध्यप्रदेश देश के कुल चना उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत योगदान देता है। दलहन और तिलहन उत्पादन (Pulses and Oilseeds Production) ने किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। धान उत्पादन (Paddy Production) में भी बालाघाट, बैतूल, मंडला, सिवनी और डिंडोरी जैसे जिलों ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
डिजिटल कृषि और एग्रो प्रोसेसिंग
कृषि उपज मंडियों का डिजिटलीकरण, ई-नाम पोर्टल (e-NAM Portal) के माध्यम से ऑनलाइन बिक्री और मूल्य पारदर्शिता ने किसानों को बेहतर मूल्य दिलाया है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना (ODOP Scheme), एग्रो एंड फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (Agro Processing Units) और कोल्ड स्टोरेज चेन (Cold Storage Chain) से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा हो रहा है।
भविष्य की संभावनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का लक्ष्य स्पष्ट है – हर खेत तक पानी, हर किसान तक प्रगति और हर घर तक समृद्धि। आने वाले वर्षों में प्रदेश न केवल देश की खाद्य सुरक्षा (Food Security) को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक कृषि मानचित्र (Global Agriculture Map) पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
किसानों के परिश्रम और सरकार की किसान हितैषी नीतियों ने मध्यप्रदेश को उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जहां राज्य अब सिर्फ अन्नदाता (Annadata) ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) का निर्माणकर्ता बन चुका है।
