MP News State Cabinet का फैसला भूखंड का आरक्षित मूल्य कलेक्टर गाइडलाइन के 100 प्रति. क्षेत्रफल पर तय होगा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में हुए कई निर्णय : कृषकों को 0 प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण देने की योजना जारी रखने का निर्णय
भोपाल: मध्य प्रदेश की मंत्रिपरिषद ने भूखंडों के आरक्षित मूल्य (Land Reserved Price) निर्धारण में बड़ा बदलाव करते हुए इसे कलेक्टर गाइडलाइन (Collector Guideline) के 100% क्षेत्रफल पर तय करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर (Zero Percent Interest Rate) पर फसल ऋण (Crop Loan) देने की योजना को अगले वर्ष तक जारी रखने की भी मंजूरी दी गई है।
भूखंड मूल्य निर्धारण में संशोधन, राजस्व में वृद्धि की उम्मीद
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में पुनर्घनत्वीकरण नीति-2022 (Redensification Policy) में संशोधन को मंजूरी दी गई। अब तक ऑफसेट मूल्य (Offset Value) का निर्धारण भूखंड के 60% क्षेत्रफल पर होता था, लेकिन अब यह निर्धारण पूरे 100% क्षेत्रफल पर कलेक्टर गाइडलाइन रेट के आधार पर होगा। इस कदम से सरकारी राजस्व (Government Revenue) में वृद्धि होने और विकास कार्यों के लिए अधिक धनराशि उपलब्ध होने की उम्मीद है।
किसानों के लिए राहत: जीरो ब्याज ऋण योजना जारी
मंत्रिपरिषद ने वर्ष 2025-26 के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण (Short Term Crop Loan) देने की योजना को निरंतर जारी रखने का फैसला किया है। इस योजना के तहत, खरीफ 2025 के लिए ऋण चुकौती की अंतिम तिथि (Due Date) 28 मार्च, 2026 और रबी 2025-26 के लिए 15 जून, 2026 निर्धारित की गई है। निर्धारित तिथि तक ऋण चुकाने वाले किसानों को 3 लाख रुपये तक के ऋण पर कोई ब्याज नहीं देना होगा। इस वर्ष इस योजना के तहत 23 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।
एसडीजी मूल्यांकन योजना को हरी झंडी
बैठक में “एसडीजी मूल्यांकन योजना (SDG Evaluation Scheme)” को वर्ष 2025-30 के लिए मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals) का राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर क्रियान्वयन और मूल्यांकन सुनिश्चित करना है। एक डैशबोर्ड के माध्यम से सभी जिलों की रैंकिंग (District Ranking) तय की जाएगी। शीर्ष दो जिलों को क्रमशः 1 करोड़ और 75 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी, जिसका इस्तेमाल वे SDG लक्ष्यों में सुधार के लिए कर सकेंगे।
टीकमगढ़ सहित 5 जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए टीकमगढ़, नीमच, सिंगरौली, श्योपुर और डिंडौरी जिला चिकित्सालयों (District Hospitals) में 800 अतिरिक्त बिस्तरों (Hospital Beds) के उन्नयन और 810 नए पदों के सृजन को मंजूरी मिली है।
मालथौन में कनिष्ठ खंड न्यायालय (Junior Division Court) की स्थापना के मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने न्यायिक जिला सागर की मालथौन तहसील में कनिष्ठ खंड न्यायालय (Junior Division Court) की स्थापना को मंजूरी दी है। इसके लिए व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खंड स्तर का एक पद और तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 पद सहित कुल 7 नवीन पदों का सृजन किया जाएगा।

जानें कलेक्टर गाइडलाइन रेट (Collector Guideline Rate) क्या है?
कलेक्टर गाइडलाइन रेट (CGR), जिसे अक्सर सर्कल रेट (Circle Rate) या राजस्व दर (Revenue Rate) भी कहा जाता है, वह न्यूनतम मूल्य है जो किसी राज्य की सरकार प्रति वर्ग फुट या प्रति वर्ग मीटर के आधार पर किसी विशेष इलाके (सर्कल/क्षेत्र) के भूमि या संपत्ति के लिए तय करती है। कोई भी संपत्ति का सौदा इस दर से कम कीमत पर नहीं हो सकता। आसान भाषा में समझें तो, यह किसी क्षेत्र की संपत्ति का “सरकारी मूल्य” है।
कलेक्टर गाइडलाइन रेट (Collector Guideline Rate) का उद्देश्य क्या है
सरकारी राजस्व की रक्षा: इससे संपत्ति की बिक्री पर स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) और रजिस्ट्रेशन फीस (Registration Fees) की गणना की जाती है। अगर कोई व्यक्ति संपत्ति का सौदा कम दर्शाकर टैक्स बचाना चाहे, तो सरकार को CGR के आधार पर कम से कम इतना टैक्स तो मिल ही जाता है।
कालाधन (Black Money) पर अंकुश: यह लक्ष्य संपत्ति लेनदेन में कालाधन के इस्तेमाल को रोकना है।
पारदर्शिता: यह दरें सार्वजनिक होती हैं, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों को उस इलाके की संपत्ति का सरकारी मूल्य पता चल जाता है और सौदा उचित मूल्य पर हो सके।
कलेक्टर गाइडलाइन रेट (Collector Guideline Rate) कैसे तय होता है?
CGR को तय करते समय निम्नलिखित कारकों को ध्यान में रखा जाता है:
- स्थान (Location): संपत्ति शहर के किस इलाके में है – आवासीय, वाणिज्यिक या औद्योगिक।
- बुनियादी ढाँचा (Infrastructure): सड़कों, मेट्रो, बस स्टॉप, पानी और बिजली की सुविधा की गुणवत्ता।
- सामाजिक सुविधाएँ (Social Amenities): स्कूल, अस्पताल, शॉपिंग मॉल, पार्क आदि की निकटता।
- संपत्ति का प्रकार (Type of Property): जमीन का प्लॉट है, आवासीय मकान है या वाणिज्यिक दुकान/कार्यालय।
- बाजार मूल्य (Market Value): उस क्षेत्र में चल रहे वास्तविक सौदों के मूल्य (हालांकि CGR अक्सर बाजार मूल्य से कम होती है)।
Collector Guideline Rate को व्यवहारिक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए, भोपाल के एक इलाके की कलेक्टर गाइडलाइन रेट 5,000 रुपये प्रति वर्ग फुट है। अगर आप वहाँ 1,000 वर्ग फुट का प्लॉट खरीदते हैं, तो सौदे का न्यूनतम रजिस्टर्ड मूल्य होगा: 1,000 sq. ft. × 5,000 ₹/sq. ft. = 50,00,000 रुपये (50 लाख रुपये)। आप और विक्रेता इस प्लॉट का सौदा 45 लाख या 55 लाख रुपये में भी कर सकते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान 50 लाख रुपये के आधार पर ही करना होगा।
कैसे जानें अपने क्षेत्र में Collector Guideline Rate ?
कलेक्टर गाइडलाइन रेट संपत्ति लेनदेन का एक महत्वपूर्ण पहलू है जो सरकार, खरीदार और विक्रेता तीनों के हितों को संतुलित करता है।
- ऑनलाइन पोर्टल – राज्य राजस्व विभाग की वेबसाइट
- तहसील कार्यालय – स्थानीय राजस्व कार्यालय से पूछताछ
- संपत्ति डीलर – स्थानीय प्रॉपर्टी एजेंट
- MP IGRS पोर्टल – मध्य प्रदेश में ऑनलाइन देख सकते हैं
