तिरुपति बालाजी मंदिर में अब AI सिस्टम संभालेगा भीड़, लापता श्रद्धालुओं की होगी पहचान, भीड़ प्रबंधन में बड़ी तकनीकी क्रांति
तिरुमला: दुनिया के सबसे अमीर और लोकप्रिय तिरुपति बालाजी मंदिर (Tirupati Temple) में जल्द ही दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बेहतर अनुभव मिलेगा। चंद्रबाबू नायडु सरकार ने यहां देश का पहला AI-powered Integrated Command and Control Centre (ICCC) शुरू किया है। इस अत्याधुनिक व्यवस्था में न केवल भीड़ का प्रबंधन होगा बल्कि लापता श्रद्धालुओं को पहचानने और ढूंढने में भी मदद मिलेगी।
6,000 कैमरे और चेहरे की पहचान
नए कंट्रोल सेंटर (AI Control Centre) को 6,000 से अधिक हाई-टेक कैमरों से जोड़ा गया है। इनमें facial recognition system भी शामिल है, जिसके जरिए लापता व्यक्तियों की पहचान की जा सकेगी। यह सिस्टम हर मिनट 3.6 लाख डेटा पेलोड और रोजाना 2.5 बिलियन इंफरेंस प्रोसेस करता है। इससे भीड़ की रियल-टाइम भविष्यवाणी, तेज कतार क्लियरेंस और सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
NRI फंडिंग और सिलिकॉन वैली की तकनीक
यह परियोजना public-private partnership मॉडल में बनी है, जिसमें NRIs की फंडिंग शामिल है। इसका सॉफ्टवेयर सिलिकॉन वैली की कंपनी Kloudspot Inc ने तैयार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, वैकुंठम क्यू कॉम्प्लेक्स-I में स्थापित यह सुविधा न केवल अत्याधुनिक 3D मैपिंग उपलब्ध कराती है बल्कि लाइव डैशबोर्ड और डिजिटल ट्विन तकनीक से भी जुड़ी है।
भीड़ की भविष्यवाणी और इंतजार का अनुमान
इस AI केंद्र (AI Pilgrim Management) की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छुट्टियों और खास त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या का सटीक अनुमान लगा सकेगा। इससे Sarva Darshanam wait time का अंदाजा पहले से ही मिल जाएगा। साथ ही, मंदिर के पूरे परिसर की सुरक्षा, भीड़ की दिशा और साइबर थ्रेट की निगरानी एक ही प्लेटफॉर्म से संभव हो सकेगी।
ड्रोन और टैबलेट की मदद से कंट्रोल
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नए हब में drone-assisted monitoring और tablet-based staff validation जैसी सुविधाएं भी हैं। इससे किसी भी इमरजेंसी स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सकेगी। वहीं immersive digital twin mapping तकनीक से कर्मचारियों की कार्यक्षमता और पारदर्शिता दोनों बढ़ेगी।
नया मानक स्थापित करेगा तिरुमला मंदिर
अधिकारियों का कहना है कि यह देश का पहला मंदिर है, जिसने फिजिकल और साइबर ऑपरेशन्स को एकीकृत कर एक साथ संचालित करना शुरू किया है। इससे न केवल श्रद्धालुओं को एक शांत और सुरक्षित दर्शन अनुभव मिलेगा बल्कि मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता भी नए स्तर पर पहुंचेगी। तिरुपति का यह मॉडल (Temple AI Technology) आने वाले समय में भारत के अन्य बड़े तीर्थस्थलों के लिए मानक साबित हो सकता है।
