मध्यप्रदेश की 5 प्राचीन शिल्प कलाओं को मिला GI Tag, खजुराहो स्टोन क्राफ्ट समेत कई शिल्प शामिल
भोपाल: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की 5 प्राचीन शिल्प कलाओं को भौगोलिक संकेत टैग (Geographical Indication Tag) प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि राज्य की सांस्कृतिक धरोहर के लिए ऐतिहासिक पहचान है। एमएसएमई मंत्री (MSME Minister) चैतन्य कुमार काश्यप ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए इसे मध्यप्रदेश की विरासत के लिए गौरव का क्षण बताया।
किन शिल्प कलाओं को मिला जीआई टैग?
भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property Rights) में शामिल की गई ये 5 शिल्प कलाएं हैं:
- खजुराहो स्टोन क्राफ्ट (Khajuraho Stone Craft)
- छतरपुर फर्नीचर (Chhatarpur Furniture)
- बैतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट (Betul Bharewa Metal Craft)
- ग्वालियर पत्थर शिल्प (Gwalior Stone Craft)
- ग्वालियर पेपर मैशे क्राफ्ट (Gwalior Paper Mache Craft)
वित्तीय सहयोग और सहयोगी संस्थाएं
जीआई मैन ऑफ इंडिया (GI Man of India) के नाम से प्रख्यात पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने इस उपलब्धि को अत्यंत गर्व का पल बताया। उनके तकनीकी सहयोग से स्थानीय शिल्पियों की संस्थाओं ने जीआई आवेदन (GI Application) प्रस्तुत किए थे।एमएसएमई विभाग (MSME Department) ने लगभग एक वर्ष पूर्व इन शिल्प कलाओं के लिए जीआई आवेदन भेजे थे।
- नाबार्ड मध्यप्रदेश (NABARD MP): खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, बैतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे के लिए वित्तीय सहयोग
- सिडबी मध्यप्रदेश (SIDBI MP): छतरपुर फर्नीचर के लिए वित्तीय सहयोग
शिल्पियों में खुशी की लहर
जीआई रजिस्ट्री चेन्नई (GI Registry Chennai) की वेबसाइट पर इन उत्पादों के सामने ‘रजिस्टर्ड’ का स्टेटस आते ही संबंधित शिल्पियों में खुशी की लहर दौड़ गई। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग सहित अन्य विभागों में भी नई ऊर्जा का संचार हुआ है।
अन्य उपलब्धियां
नवंबर में पन्ना डायमंड (Panna Diamond) को भी जीआई टैग प्राप्त हुआ था। वर्तमान में लगभग 25 उत्पादों की जीआई मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जो मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर (Cultural Heritage) को वैश्विक पहचान दिलाने में मददगार साबित होगी।
