MP News मंत्री विजय शाह का ‘स्क्रिप्टेड माफीनामा’: चौथी बार भी बिना पछतावे की माफी, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
एक ही बयान पर चार बार माफी, क्या यह रिकॉर्ड है या राजनीतिक शर्मिंदगी?
इंदौर: मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह ने अपने विवादित बयान पर शनिवार को इंदौर में चौथी बार सार्वजनिक माफी मांगी। हालांकि, लिखित स्क्रिप्ट से पढ़े गए इस माफीनामे और मीडिया के सामने बेपरवाह अंदाज़ ने सवाल खड़े किए हैं कि क्या यह माफी वास्तविक पश्चाताप है या महज़ एक औपचारिकता। इस बीच, उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है और राज्य सरकार को 9 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करना है।
पूरी तैयारी के साथ आए थे माफी मांगने
07 फरवरी 2026 को इंदौर के रेसिडेंसी क्षेत्र में मंत्री विजय शाह ने सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए अपने आपत्तिजनक बयान पर माफी मांगी। यह 13 मई 2025, 14 मई 2025 और 23 मई 2025 के बाद चौथा मौका था। हैरानी इस बात की रही कि माफी किसी आत्मीय पश्चाताप के बजाय लिखित स्क्रिप्ट से पढ़ी गई एक औपचारिकता लगी। मीडिया के सामने उनके हाव-भाव और मुस्कुराता चेहरा इस बात का संकेत दे रहा था कि वह किसी गहरे खेद का इज़हार करने नहीं, बल्कि एक दायित्व पूरा करने आए हैं।
‘बोल दिया था, इसलिए माफी मांगनी पड़ रही है’
माफी के दौरान और बाद में मीडिया से बातचीत में मंत्री शाह के रवैये ने कई सवाल पैदा किए। उनकी बॉडी लैंग्वेज और टोन में न तो शब्दों की ज़िम्मेदारी का भार नज़र आया और न ही संकोच। यह दृश्य इस आशंका को बल देता है कि सत्ता के अहंकार में संवेदनशील मुद्दों को हल्के में लिया जा रहा है और माफी मांगना भी एक राजनीतिक ड्रामा (Political Drama) बनकर रह गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद मई 2025 में तब शुरू हुआ जब इंदौर के महू क्षेत्र में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री विजय शाह ने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए एक आपत्तिजनक टिप्पणी (Objectionable Remark) की थी। उनके बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी को लक्षित किया गया था, जिसने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा की।
कोर्ट के निर्देश, एफआईआर और सुप्रीम कोर्ट की चुनौती
मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) ने मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद इंदौर के मानपुर थाने में केस दर्ज किया गया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पहुंचा है। कोर्ट ने मंत्री के खिलाफ अभियोजन (Prosecution) की मंजूरी के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) को 15 दिनों के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था। इसी कड़ी में राज्य सरकार को 9 फरवरी 2026 तक अपना जवाब दाखिल करना है।
निष्कर्ष: माफी या औपचारिकता?
मंत्री विजय शाह का एक ही विवाद पर लगातार चार बार माफी मांगना और हर बार उसके ‘स्क्रिप्टेड’ और बेरुखे होने का पैटर्न एक गंभीर सवाल छोड़ जाता है। क्या संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए जवाबदेही (Accountability) और संवेदनशीलता (Sensitivity) के मानक अब बदल गए हैं? जनता की नज़र में विश्वास बहाली सिर्फ माफी के शब्दों से नहीं, बल्कि कर्मों और ईमानदार पश्चाताप से ही संभव है।
