जानें एशिया कप में ट्रॉफी विवाद के लिए कौन है जिम्मेदार, पाकिस्तानी मीडिया का दुष्प्रचार और भारतीय टीम का पक्ष
नई दिल्ली: दुबई में एशिया कप (Asia Cup) का फायनल जीतने के बाद भारतीय टीम ने एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) के अध्यक्ष और पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नक़वी से ट्रॉफ़ी लेने से इनकार (Asia Cup Trophy Row) कर दिया। विजेता टीम मंच पर नहीं गई और ट्रॉफ़ी कप्तान को नहीं दी गई।
इस मामले को लेकर मीडिया में तरह तरह की बातें हो रही हैं और कयास लगाए जा रहे हैं। पाकिस्तानी मीडिया (Pakstani Media) ने इस मामले को भारत के खिलाफ मुहिम की तरह उठा रखा है। लगातार सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) और भारतीय टीम (Team India) के व्यवहार की आलोचना हो रही है लेकिन भारतय टीम ने भी अपना पक्ष साफ कर दिया है।
टीम का फैसला, बीसीसीआई ने की पुष्टि
जीत के तुरंत बाद होने वाला पुरस्कार वितरण समारोह करीब एक घंटे देर से शुरू हुआ। इस दौरान प्रसारण में पूर्व न्यूज़ीलैंड ऑलराउंडर साइमन डूल ने घोषणा की कि भारतीय टीम न तो पुरस्कार समारोह में हिस्सा लेगी और न ही ट्रॉफ़ी उठाएगी। इसके बाद बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने पुष्टि की कि भारतीय खिलाड़ियों ने एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नक़वी से ट्रॉफ़ी स्वीकार नहीं करने का फ़ैसला लिया है।
तिलक और अभिषेक ने लिए निजी पुरस्कार
तिलक वर्मा (मैन ऑफ द मैच), अभिषेक शर्मा (मैन ऑफ द टूर्नामेंट) और कुलदीप यादव (एमवीपी) अपने-अपने व्यक्तिगत पुरस्कार लेने के लिए मंच पर ज़रूर पहुँचे। लेकिन उन्होंने मोहसिन नक़वी की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। खबरों के मुताबिक़, मोहसिन नक़वी मंच पर मौजूद अकेले ऐसे शख़्स थे, जिन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के लिए तालियाँ तक नहीं बजाईं।
एक और रिपोर्ट के अनुसार, एसीसी और स्टेडियम प्रबंधन यह तय करने की कोशिश कर रहे थे कि विजेता टीम को ट्रॉफ़ी कौन देगा। अचानक ही समारोह रुक गया और आयोजकों ने ट्रॉफ़ी को ड्रेसिंग रूम में ले जाकर रख दिया। भारत ने ट्रॉफ़ी तो नहीं ली, लेकिन मैदान पर खिलाड़ियों ने जीत का जश्न अपने अंदाज़ में मनाया।
भारतीय कप्तान का बयान
भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रॉफ़ी न लेने के फ़ैसले पर कहा कि उन्होंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा। सूर्यकुमार ने इसे टीम का सामूहिक फ़ैसला बताया। सूर्यकुमार ने कहा कि ऐसा कभी नहीं देखा कि चैंपियन टीम को ट्रॉफ़ी न दी गई हो।
उन्होंने कहा, वो भी ऐसी ट्रॉफ़ी जिसे मेहनत से जीता गया हो। मेरा मानना है कि हम इसके हक़दार थे। मैं और कुछ नहीं कह सकता, मैंने अपनी बात साफ़ कर दी है। अगर आप मुझसे ट्रॉफ़ियों के बारे में पूछते हैं, तो मेरी ट्रॉफ़ियां मेरे ड्रेसिंग रूम में हैं। मेरे साथ मौजूद सभी 14 खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ़ ही असली ट्रॉफ़ियां हैं।
टीम ने मैदान पर खुद लिया फैसला, BCCI ने किया सपोर्ट
जब एक पत्रकार ने पूछा कि मोहसिन नक़वी से ट्रॉफ़ी न लेने का फ़ैसला आधिकारिक था या नहीं, तो सूर्यकुमार यादव ने कहा, यह फ़ैसला हमने मैदान पर ही लिया, हमें किसी ने नहीं बोला ऐसा करने के लिए। आप जब पूरे टूर्नामेंट में इतना अच्छा खेलते हैं और जीत गए तो ट्रॉफ़ी डिज़र्व करते हैं या नहीं? आप ही बताओ?
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी मीडिाय से बातचीत में साफ़ कहा कि भारतीय टीम ने पाकिस्तान के नेता और एसीसी अध्यक्ष मोहसिन नक़वी से ट्रॉफ़ी न लेने का फ़ैसला किया है और इस पर आईसीसी सम्मेलन में आधिकारिक विरोध दर्ज कराया जाएगा।
