MP News कूनो में पहली बार तेंदुए से भिड़ी मादा चीता की मौत, Project Cheetah को झटका
घातक संघर्ष: जब प्रकृति की शक्तियां आमने-सामने आईं
भोपाल : भारत की महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना (Cheetah Reintroduction Project) को एक गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा है। कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में सोमवार शाम एक 20 महीने की मादा चीता की मृत्यु हो गई, जिसका कारण एक तेंदुए के साथ हुई प्राणघातक भिड़ंत बताई जा रही है। यह घटना प्रोजेक्ट चीता (Project Cheetah) के इतिहास में पहली ऐसी दुर्घटना है जहां चीता और तेंदुए के बीच संघर्ष में चीते की जान गई हो। विशेष रूप से यह घटना उस समय हुई है जब इस सप्ताह परियोजना के तीन वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।
खोजी दल की खोज: सोमवार शाम का दुखद अंत
वन विभाग के अधिकारियों को सोमवार शाम लगभग 6:30 बजे युवा मादा चीता का निर्जीव शरीर मिला। यह मृत चीता नामीबिया (Namibia) से लाई गई प्रसिद्ध मादा चीता ‘ज्वाला’ के चार शावकों में से एक थी। प्रारंभिक जांच के दौरान वन अधिकारियों ने पाया कि चीते के शरीर पर तेंदुए के हमले के स्पष्ट निशान मौजूद हैं। हालांकि, मृत्यु के सटीक कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट (Post-mortem Report) के बाद ही की जा सकेगी, जो आने वाले दिनों में तैयार होगी।
स्वतंत्रता का कड़वा स्वाद: मां से अलग होते ही जान गई
इस दुखद घटना की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह युवा चीता अपनी मां ज्वाला से मात्र एक महीने पहले ही अलग हुई थी। प्राकृतिक व्यवहार के अनुसार, चीते के बच्चे 18-20 महीने की उम्र में अपनी मां से स्वतंत्र हो जाते हैं। इस मामले में, मृतक चीता हाल ही में अपने भाई-बहनों से भी बिछड़ गई थी और अकेले जंगल में रह रही थी। फरवरी 2024 में इसे अपनी मां के साथ जंगली जीवन (Wildlife) के लिए छोड़ा गया था, जहां उसे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था।
आंकड़ों की भाषा: कूनो में चीतों की वर्तमान स्थिति
प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने आश्वासन दिया है कि इस दुखद घटना के बावजूद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या में कोई महत्वपूर्ण गिरावट नहीं आई है। वर्तमान में पार्क में कुल 25 चीते मौजूद हैं, जिनमें 9 वयस्क चीते (6 मादा और 3 नर) और 16 भारत में जन्मे चीते शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, दो चीते मंदसौर के गांधीसागर अभयारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary) में भी रह रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि शेष सभी चीते स्वस्थ हैं और उनकी नियमित निगरानी की जा रही है।
भविष्य की रणनीति: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
मध्यप्रदेश के मुख्य वन संरक्षक (Chief Conservator of Forest) उत्तम कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया है कि मृत्यु का प्रारंभिक कारण तेंदुए से संघर्ष दिखाई दे रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाएगा। यह घटना कूनो में चीतों की मृत्यु की पहली ऐसी घटना है जहां तेंदुए का हमला कारण बताया जा रहा है। पहले भी चीतों और उनके शावकों की मृत्यु हुई है, लेकिन वे अन्य कारणों से थीं।
चुनौतियों का सामना: तेंदुओं के साथ सह-अस्तित्व
कूनो से लेकर मुरैना की सीमा तक के जंगली क्षेत्र में तेंदुओं (Leopards) की पर्याप्त संख्या मौजूद है, जो चीता परियोजना के लिए एक प्राकृतिक चुनौती है। परियोजना की शुरुआत में चीतों के लिए बनाए गए संरक्षित बाड़ों से तेंदुओं को हटाया गया था, लेकिन जंगल में छोड़े जाने के बाद चीतों को इस प्राकृतिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। परियोजना अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए और भी सघन निगरानी (Intensive Monitoring) की जाएगी और आवश्यकता के अनुसार रणनीति में संशोधन किया जाएगा।
