सागर के मार्शल आर्ट गुरु भगवानदास रैकवार समेत मप्र की 4 हस्तियों को मिलेगा पद्मश्री
भोपाल। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 के लिए घोषित पद्मश्री सम्मान (Padma Shri Award) की सूची में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की चार विभूतियों को स्थान मिला है। इनमें सागर के मार्शल आर्ट गुरु भगवानदास रैकवार, वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, जल संरक्षण योद्धा मोहन नागर और पुरातत्वविद् नारायण व्यास शामिल हैं।
बुंदेली मार्शल आर्ट को जीवित रखने वाले योद्धा
सागर निवासी भगवानदास रैकवार (Bhagwandas Raikwar) ने बुंदेलखंड (Bundelkhand) की पारंपरिक मार्शल आर्ट (Martial Arts) को विलुप्त होने से बचाया है। वे लंबे समय तक छत्रसाल बुंदेला अखाड़े के उस्ताद रहे और बुंदेली संस्कृति एवं अखाड़ा कला (Akhara Culture) को संरक्षित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से यह प्राचीन परंपरा आज भी जीवित है और युवा पीढ़ी इसे सीख रही है।
हिंदी पत्रकारिता के दिग्गज कैलाश चंद्र पंत
मऊ जिले में जन्मे कैलाश चंद्र पंत (Kailash Chandra Pant) हिंदी पत्रकारिता (Hindi Journalism) और साहित्य के क्षेत्र में पांच दशकों से सक्रिय रहे हैं। उन्होंने जनधर्म साप्ताहिक का प्रकाशन किया, विद्या भवन उदयपुर में प्रकाशन प्रमुख, सोशलिस्ट कांग्रेसमैन के सह-संपादक और नवभारत भोपाल के संपादक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
बैतूल के जल पुरुष मोहन नागर
राजगढ़ के मोहन नागर (Mohan Nagar) को बैतूल जिले में जल संरक्षण (Water Conservation) और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Conservation) के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है। उन्हें अनसंग हीरोज (Unsung Heroes) की श्रेणी में चुना गया है। स्थानीय लोग उन्हें ‘जल पुरुष’ के नाम से जानते हैं। वर्तमान में वे मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष हैं।
प्रागैतिहासिक शोध के लिए नारायण व्यास
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) के सेवानिवृत्त अधीक्षण पुरातत्वविद् नारायण व्यास (Narayan Vyas) को मध्य भारत में प्रागैतिहासिक औजारों और शैलचित्रों (Rock Art) पर किए गए दशकों के शोध के लिए यह सम्मान मिल रहा है। भोपाल निवासी व्यास के पास 500 से अधिक प्रागैतिहासिक औजारों का दुर्लभ संग्रह है, जिसे उन्होंने शैक्षिक उद्देश्यों के लिए संरक्षित किया है। पुरातत्व जगत में उन्हें “मध्य भारत का पुरातत्व पुरोधा” कहा जाता है।
