MP News दूषित कफ सिरप मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, PIL में CBI जांच कराने की मांग
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान (Rajasthan) में दूषित कफ सिरप (contaminated cough syrup) से बच्चों की मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है। मंगलवार को दायर एक जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL) में इन घटनाओं की सीबीआई जांच (CBI investigation) और अदालत की निगरानी की मांग की गई है। यह मामला तब सामने आया है जब मध्य प्रदेश में मृतकों की संख्या 19 और छिंदवाड़ा जिले (Chhindwara district) में 16 हो चुकी है।
जनहित याचिका में क्या है मांग
अधिवक्ता विशाल तिवारी (Advocate Vishal Tiwari) द्वारा दायर जनहित याचिका में बच्चों की मौत से जुड़े सभी लंबित मामलों और जांच को सीबीआई (CBI) को सौंपने की मांग की गई है। याचिका में किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश (retired judge) की देखरेख में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग (National Judicial Commission) या विशेषज्ञ समिति (expert committee) के गठन का भी आग्रह किया गया है।
पूरे देश में तत्काल प्रतिबंध (ban) लगाने की मांग
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि अलग-अलग राज्यों द्वारा स्वतंत्र जांच किए जाने से जवाबदेही विभाजित हो गई है, जिससे बार-बार चूक हो रही है और खतरनाक सिरप बाजार में पहुंच रहे हैं। इस कारण पूरे देश में दूषित सिरप पर तत्काल प्रतिबंध (ban) लगाने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञ निकाय की मांग
याचिका में केंद्र सरकार (Central Government) से राष्ट्रीय स्तर पर एक न्यायिक या विशेषज्ञ निकाय गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि नियामक ढांचे (regulatory framework) में मौजूद कमियों की पहचान की जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि भविष्य में किसी भी बिक्री या निर्यात (export) की अनुमति से पहले सभी संदिग्ध उत्पादों का एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं (NABL accredited laboratories) के माध्यम से अनिवार्य परीक्षण किया जाए।
MP में बढ़ रही मौतों की संख्या
यह कानूनी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब छिंदवाड़ा जिले में दूषित कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का आंकड़ा 16 तक पहुंच गया है। पूरे मध्य प्रदेश में यह संख्या 19 हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने सभी मेडिकल स्टोर्स (medical stores) की जांच के निर्देश जारी किए हैं।
विपक्ष का हमला तेज
इस मुद्दे पर विपक्ष (Opposition) ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। विपक्षी दल लगातार राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था (healthcare system) और दवा नियंत्रण तंत्र (drug control mechanism) पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकारी लापरवाही (negligence) के कारण मासूम बच्चों की जान जा रही है।
सख्त निगरानी की जरूरत
यह मामला देश में दवा नियंत्रण व्यवस्था (drug control system) की खामियों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मास्युटिकल उत्पादों (pharmaceutical products) की गुणवत्ता जांच और निगरानी में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट में दायर यह याचिका इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
