रायपुर: इस कहानी में संघर्ष, समर्पण और परिवार के सहयोग का अनूठा संगम है। ये कहानी है छत्तीसगढ़ की की। उन्होंने छत्तीसगढ़ पीएससी की सिविल जज परीक्षा में टॉप किया है। यह सफलता उनके लिए आसान नहीं थी। पहले प्रयास में गर्भवती होने के कारण उन्हें प्री-डिलीवरी करानी पड़ी थी। दूसरे प्रयास में चार महीने के बच्चे की देखभाल करते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। श्वेता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बालको में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में काम किया। शादी के बाद उन्होंने जज बनने का सपना देखा और कानून की पढ़ाई शुरू की। इंस्पिरेशनल है श्वेता दीवान की कहानीश्वेता दीवान की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। सीजी पीएससी द्वारा घोषित सिविल जज परीक्षा के परिणाम में उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल किया। यह सफलता उनके कठिन परिश्रम और अटूट दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उनके पहले प्रयास में, जब वे गर्भवती थीं, मेंस परीक्षा के दिन ही उनकी डिलीवरी की तारीख थी। परीक्षा देने के लिए उन्होंने प्री-डिलीवरी कराने का साहसिक फैसला लिया। हालांकि, पहले प्रयास में वे इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में, चार महीने के बच्चे की देखभाल के साथ उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की और इस बार शीर्ष स्थान हासिल किया।पहली कोशिश में असफल होकर नहीं मानी हारश्वेता के इस सफर में कई चुनौतियां आईं। पहली बार परीक्षा देते समय वे गर्भवती थीं। डॉक्टर ने मेंस परीक्षा वाले दिन ही डिलीवरी की तारीख दी थी। इस कठिन परिस्थिति में उन्होंने प्री-डिलीवरी कराने का फैसला लिया ताकि परीक्षा दे सकें। परीक्षा के बाद, वह नवजात बच्चे को छोड़कर परीक्षा देने भी गईं। यह उनके समर्पण और परीक्षा के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, इस प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली। वे इंटरव्यू तक तो पहुंचीं, लेकिन अंतिम रूप से चयन नहीं हो पाया। दूसरी बार में जीत ली जंगश्वेता ने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में, उनके सामने एक नई चुनौती थी – चार महीने के बच्चे की देखभाल। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। उनके पति, सुयश धर दीवान, उनके मायके और ससुराल वालों ने उनका पूरा सहयोग किया। दूसरे अटेम्प्ट में बच्चा 4 महीने का था। उसकी देखरेख करते हुए उन्होंने तैयारी की। इस सहयोग के बल पर ही श्वेता अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकीं। गणित के बाद इंजीनियरिंगश्वेता की शिक्षा और करियर की कहानी भी दिलचस्प है। उन्होंने 11वीं और 12वीं में गणित विषय से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की और बालको (भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड) में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत रहीं। 2018 में शादी के बाद उन्होंने सिविल जज बनने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने 2019 में कानून की पढ़ाई शुरू की।’