जी-20 में भारत की जीत से अमेरिका ने खोजा चीन को दबोचने का रास्‍ता, जिनपिंग को रास नहीं आएगी बाइडेन की चाल

वॉशिंगटन: भारत में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग नहीं आए थे। उनका न आना कई एक्सपर्ट्स भारत के खिलाफ कदम मान रहे थे। लेकिन इस दौरान भारत, अमेरिका और यूरोप ने चीन से अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का तरीका खोजा। भारत की अध्यक्षता में एक संयुक्त विज्ञप्ति पर सहमति न बनना सबसे बड़ी समस्या थी। लेकिन इस पर भी सहमति बनाने में भारत कामयाब रहा। इसके साथ ही भारत की अध्यक्षता में अफ्रीकी यूनियन जी-20 का पूर्ण सदस्य बना।जी-20 के डॉक्यूमेंट में पश्चिमी देश रूस की निंदा से जुड़ा एक पैराग्राफ रखना चाहते थे। इसका चीन और रूस विरोध कर रहे थे। अंत में पश्चिमी देशों ने भारत को सहयोग दिया और रूस की निंदा को हटा दिया गया। जी-20 के डॉक्यूमेंट में यूक्रेन युद्ध पर बेहद सॉफ्ट भाषा का इस्तेमाल हुआ है। कई लोग इसे पश्चिमी देशों की हार के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है। वह यह कि चीन हर हाल में चाहता था कि जी-20 विज्ञप्ति पर सहमति न बने जो भारत के लिए एक बड़ा झटका होता। लेकिन इस मुद्दे पर अमेरिका ने साथ देकर दुनिया में भारत के प्रभाव को बढ़ाया है।भारत की बड़ी जीतराष्ट्रपति जो बाइडेन भारत में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन के जरिए रूस और चीन को अलग-थलग करने में लगे थे। कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस में दक्षिण एशिया कार्यक्रम के निदेशक मिलन वैष्णव ने कहा, ‘कुछ लोग रूस-यूक्रेन पर सॉफ्ट भाषा का जिक्र कर रहे हैं। लेकिन इसे देखने का दूसरा तरीका यह है कि पश्चिम हर हाल में भारत को जीत दिलाना चाहता था। क्योंकि सर्वसम्मति की कमी भारत के लिए बड़ी निराशा होती।’ब्रिक्स के जरिए साधा निशानाजी-20 शिखर सम्मेलन में बाइडेन की एक तस्वीर आई, जिसमें वह विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, पीएम मोदी, ब्राजील के राष्ट्रपति और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के साथ थे। इस तस्वीर में जी-7 को टक्कर देने वाले ब्रिक्स के तीन प्रमुख सदस्य देश थे, जिसके जरिए अमेरिका ने रूस और चीन पर निशाना साधा। वहीं, इससे पहले अमेरिका ने इन तीन देशों को ‘ब्रिक्स के तीन लोकतांत्रिक सदस्य’ बताया था। लेकिन अमेरिका सिर्फ इतने पर ही नहीं रुका। उसने चीन को कड़ी टक्कर देने वाला एक और कदम उठाया।चीन के खिलाफ कॉरिडोरअमेरिका ने जी-20 से अलग भारत- मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर डील का ऐलान किया। इसमें यूरोपीय संघ, सऊदी अरब, इजरायल और अन्य मध्य पूर्व देशों के जरिए एक रेल लाइन बनाई जाएगी। बाइडेन ने इसे एक गेम चेंजर बताया। हालांकि अमेरिका ने इस प्रोजेक्ट को चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के तौर पर मानने से इनकार कर दिया। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह चीन के बेल्ट एंड रोड को टक्कर देने के लिए डिजाइन किया गया है। बाइडेन ने वियतनाम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, ‘मैं चाहता हूं कि चीन आर्थिक तौर पर बढ़े। लेकिन मैं ऐसा नियमों से होता हुआ देखना चाहता हूं।’