क्या अमेठी से चुनाव लड़ेंगे राहुल गांधी? दादी या चाचा, किसकी राह पर आगे बढ़ेंगे

नई दिल्ली: अमेठी, देश की सियासत में इन दिनों इस संसदीय क्षेत्र की काफी चर्चा हो रही है। लोकसभा चुनाव में अभी वक्त है लेकिन उसके पहले ही अमेठी की चर्चा हो रही है। इस चर्चा के पीछे बड़ी वजह कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हैं। राहुल गांधी, क्या अगला चुनाव अमेठी से लड़ेंगे यह लोगों के मन में सवाल है लेकिन इस बीच यूपी कांग्रेस नेता अजय राय के बयान ने राजनीतिक पारा गर्मा दिया। अजय राय के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री और अमेठी से सांसद स्मृति ईरानी ने एक ट्वीट कर कहा कि सुना है राहुल गांधी आपने अपने किसी प्रांतीय नेता से अभद्र तरीके से 2024 में अमेठी से लड़ने की घोषणा करवाई है। तो क्या आपका अमेठी से लड़ना पक्का समझूं? दूसरी सीट पर तो नहीं भागेंगे? डरेंगे तो नहीं? वहीं अजय राय ने केंद्रीय मंत्री को लेकर जो बयान दिया उसके लिए उनके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इन सबके बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि राहुल गांधी अपनी दादी की राह पर आगे बढ़ेंगे या चाचा संजय गांधी की राह पर।

कैसे हुई शुरुआत, अमेठी को लेकर यूपी से लेकर दिल्ली तक चर्चा

राहुल गांधी क्या अमेठी से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। यूपी कांग्रेस के नेता अजय राय ने इस सवाल के जवाब में कहा कि अमेठी गांधी परिवार की सीट रही है। राहुल गांधी यहां से लोकसभा सदस्य रहे हैं। राजीव गांधी और संजय गांधी ने भी इस क्षेत्र की सेवा की है। स्मृति ईरानी यहां आती हैं, ‘लटका-झटका’ दिखाती हैं और चली जाती हैं। अमेठी सीट निश्चित रूप से गांधी परिवार की है और यह रहेगी। हम सभी की मांग है कि राहुल गांधी अमेठी से 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ें। वहीं अजय राय के बयान पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी पलटवार किया।

केंद्रीय मंत्री और अमेठी से बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी ने अजय राय के ‘लटके-झटके’ वाले बयान को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष से सवाल किया कि क्या वह राय के राहुल गांधी के अमेठी से चुनाव लड़ने की घोषणा को पक्का समझें। ईरानी ने कहा कि सुना है राहुल गांधी जी आपने अपने किसी प्रांतीय नेता से अभद्र तरीके से 2024 में अमेठी से लड़ने की घोषणा करवाई है। तो क्या आपका अमेठी से लड़ना पक्का समझूं। दूसरी सीट पर तो नहीं भागेंगे। अजय राय के इस बयान पर मामला भी दर्ज कर लिया गया है और 2024 से पहले अमेठी को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है।

दादी या चाचा, किसकी राह पर आगे बढ़ेंगे राहुल

अमेठी से चुनाव लड़ने को लेकर अभी तक राहुल गांधी की ओर से कोई ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि उससे पहले यह देखने वाली बात होगी कि क्या वह अपनी दादी की राह पर आगे बढ़ेंगे जो रायबरेली में हार के बाद वहां का रुख नहीं किया या चाचा संजय गांधी की राह पर जो अमेठी में हार के बाद भी दूसरी बार चुनाव लड़े। आपातकाल के बाद 1977 में चुनाव हुए तो रायबरेली से इंदिरा गांधी को हार का सामना करना पड़ा। जनता पार्टी के राजनारायण से हार के बाद इंदिरा गांधी कर्नाटक से जाकर चुनाव लड़ीं और दोबारा रायबरेली का रुख नहीं किया।

1977 के चुनाव में राजनारायण ने इंदिरा गांधी को 55 हजार से अधिक वोटों से हराया था। 1977 में ही अमेठी सीट से संजय गांधी को अमेठी सीट से हार का सामना करना पड़ा। जनता पार्टी के रविंद्र प्रताप ने संजय गांधी को इस चुनाव में हराया था। हालांकि अगला चुनाव वह यहीं से लड़े और संजय गांधी को जीत मिली। 2019 में राहुल गांधी को अमेठी में हार का सामना करना पड़ा। उन्हें बीजेपी की स्मृति ईरानी ने हराया। हालांकि इसी चुनाव में वह केरल की वायनाड सीट से भी लड़े थे और यहां उनको जीत हासिल हुई। वायनाड राहुल गांधी अपने संसदीय क्षेत्र जाते रहते हैं लेकिन अमेठी से दूरी पर सवाल भी खड़े होते हैं। अब 2024 के चुनाव में देखना होगा कि वह किसकी राह पर आगे बढ़ते हैं।

भारत जोड़ो यात्रा के बीच आखिर कैसे आई यह बात

पहले 2014 और उसके बाद 2019 का लोकसभा चुनाव, कांग्रेस के लिए यह दोनों चुनाव किसी बुरे सपने से कम नहीं था और यूपी के लिहाज से तो और भी बुरा। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को यूपी में केवल एक सीट मिली। वह भी सोनिया गांधी की रायबरेली से जीत के रुप में। गांधी परिवार का गढ़ कहे जाने वाले अमेठी से राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ता है। यह हार सिर्फ राहुल गांधी की नहीं थी बल्कि कांग्रेस को भी झकझोरने वाली यह हार थी।

इस हार के बाद राहुल गांधी का फोकस पूरी तरह वायनाड पर शिफ्ट हो गया। इसके बाद जब इसी साल यूपी के चुनाव हुए तब भी राहुल गांधी की मौजूदगी को लेकर सवाल पूछे गए। प्रियंका गांधी यूपी चुनाव में एक्टिव थीं लेकिन राहुल गांधी की वैसी मौजूदगी नहीं दिखी। राहुल गांधी इस वक्त भारत जोड़ो यात्रा पर हैं और इस यात्रा के बीच उनके अमेठी से चुनाव लड़ने की बात शुरू होती है। यूपी में कांग्रेस की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि गांधी परिवार अमेठी और रायबरेली से दूरी न बनाए। कांग्रेस की ओर से भी यह संदेश देने की कोशिश है। हालांकि यह आने वाले वक्त में ही पता चलेगा कि राहुल गांधी किसकी राह पर आगे बढ़ते हैं।