होश उड़ जाएंगे उत्तराखंड में BJP नेता की पत्नी के कत्ल की धीमी जांच का कारण जानकर!

बुधवार यानी 12 अक्टूबर को उत्तराखंड के काशीपुर जिले में यूपी की मुरादाबाद पुलिस के चलते मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. उत्तराखंड पुलिस ने काशीपुर के भाजपा नेता की पत्नी के मुरादाबाद पुलिस की गोली से हुई कथित मौत के मामले में, कत्ल का मुकदमा तो दर्ज कर लिया. ताकि गुस्साए पीड़ित परिवार को ठंडा किया जा सके. मुकदमा दर्ज करने के बाद से मगर अब, जिस तरह से उत्तराखंड पुलिस की “कछुआ-चाल” पड़ताल चल रही है. जिस तरह के जांच को लेकर उत्तराखंड के आला-पुलिस अफसरों का “दबा-छिपा” रवैया निकल कर सामने आ रहा है. वो पहले से ही संदिग्ध हालातों को और भी बदतर स्थिति में पहुंचाने के लिए काफी लग रहा है?
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड पुलिस के बीच एक कथित गोलीकांड को लेकर शुरु हुई धींगामुश्ती, अब दोनों ही राज्यों की पुलिस के गले की फांस बन गया है. कह सकते हैं कि इस कथित गोलीकांड में कुख्यात बदमाश के मारे या पकड़े जाने के बजाए, एक घरेलू महिला की संदिग्ध हालातों में गोली लगने से हुई मौत, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और उत्तराखंड के काशीपुर जिला पुलिस के लिए हाल-फिलहाल तो बवाल-ए-जान बन चुका है. कथित तौर पर यूपी पुलिस की गोली से मरने वाली महिला गुरजीत कौर है.
परिवार का आरोप- मुरादाबाद पुलिस की गोली से मौत
हालांकि मुरादाबाद पुलिस इस आरोप को शुरू से ही सिरे से खारिज कर रही है कि, महिला की मौत उसकी गोली से हुई है. जबकि पीड़ित परिवार इसी बात पर अड़ा हुआ है कि महिला की मौत मुरादाबाद पुलिस की ही गोली से हुई है. दरअसल इस कांड में बवाल इसलिए भी ज्यादा मचा हुआ है क्योंकि, मरने वाली महिला जसपुर के ज्येष्ठ उप प्रमुख गुरताज सिंह भुल्लर की पत्नी थी. कुछ लोग इसे राजनीतिक तूल देने की भी नाकाम कोशिशों में जुटे हुए थे. इन कोशिशों की हवा हालांकि वक्त रहते मौके पर मौजूद उत्तराखंड पुलिस के अफसरों ने घटना के कुछ घंटों बाद ही निकाल दी. यह कहकर कि भले ही महिला की मौत कैसे भी क्यों न हुई हो? मुकदमा हत्या का ही दर्ज करके जांच की जाएगी.
उत्तराखंड पुलिस का यह दांव नाराज भीड़ के ऊपर काम कर गया. महिला की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज होते ही भीड़ और पीड़ित परिवार शांत हो गया. नाराज भीड़ के काबू आते ही उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद जिला पुलिस ने भी चैन की सांस ली है. इस बारे में टीवी9 भारतवर्ष ने शुक्रवार को उत्तराखंड पुलिस के दो अधिकारियों ने बात की. दोनो के ही जवाब कमोबेश एक से ही यानी टाल-मटोल वाले थे.
हत्या के मामले में टालने वाला जवाब
कुमाऊं मंडल के डीआईजी नीलेश आनंद भरडे ने सवालों का सीधे सीधे जवाब देने के बजाए बात को टालने वाले अंदाज में कहा, “अभी मामले की जांच जारी है. जांच पूरी होने के बाद ही कुछ ठोस कहा जा सकेगा.” उधर इस बारे में टीवी9 भारतवर्ष ने शुक्रवार को ही बात की उत्तराखंड पुलिस के अपर महानिदेशक कानून व्यवस्था और राज्य पुलिस महानिदेशालय के मुख्य प्रवक्ता वी. मुरुगेशन से. उन्होंने भी कुमाऊं मंडल के डीआईजी नीलेश आनंद भरडे की तरह ही सीधा सपाट जवाब देने के बजाए, टालने वाले अंदाज में ही बात की. वे बोले, “हत्या का दर्ज किया जा चुका है. जांच जारी है. जांच से पहले कुछ कह पाना मुश्किल है.”
सवाल यह पैदा होता है कि अगर उत्तराखंड राज्य पुलिस कोई चीज दबा-छिपा नहीं रही है. वो घटनाक्रम में ईमानदारी के साथ दूध का दूध और पानी का पानी करने की ओर अग्रसर है. तो फिर वो घटना के कई दिन बाद भी यह बता पाने की स्थिति में आखिर क्यों नहीं है कि, जसपुर के भाजपा नेता की पत्नी के कथित कत्ल के आरोप में दर्ज मुकदमे की जांच कहां तक पहुंची? उत्तराखंड पुलिस का हर संबंधित अफसर माकूल जवाब देने की बजाए, सवालों को टाल-मटोलपूर्ण जवाब देकर आगे बढ़ने-बढ़ाने की जुगत तलाशने में क्यों जुटा है? अगर मुरादाबाद पुलिस की तरह ही उसकी यानी उत्तराखंड पुलिस की भी, मामले में कहीं कोई संदिग्ध भूमिका नहीं है. तो उत्तराखंड पुलिस घटना के तीन दिन बाद भी खामोश क्यों है? दूसरे जहां पुलिस की ही गोली से किसी महिला के कत्ल की बात कही जा रही हो. आखिर उस घटना की जांच में इतना वक्त उत्तराखंड पुलिस क्यों लगा रही है?
बीजेपी नेता की पत्नी की गोली लगने से मौत
मतलब अगर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की पुलिस की भूमिका इस मामले में पहले से ही संदिग्ध रही तो फिर. अब जिस तरह से उत्तराखंड पुलिस की दबी-छिपी जांच कछुआ गति से आगे बढ़ रही है, उससे तो किसी महिला का संदिग्ध हालातों में कत्ल हो जाने के बाद उत्तराखंड पुलिस भी खुद ही खुद को संदेह के घेरे में खड़ा कर रही है. यहां बताना जरूरी है कि 12 अक्टूबर 2022 यानी बीते बुधवार को शाम छह सात बजे के बीच, काशीपुर (उत्तराखंड) में जसपुर के ज्येष्ठ उप-प्रमुख गुरताज सिंह भुल्लर की पत्नी गुरजीत कौर की गोली लगने से संदिग्ध हालातों में मौत हो गई थी. पीड़ित परिवार के उत्तराखंड पुलिस को दिए बयान के मुताबिक, उस वक्त घर में 10-12 लोग खुद को यूपी के मुरादाबाद जिले की पुलिस बताकर घुस पड़े थे. खुद को मुरादाबाद जिले का पुलिसकर्मी बता रहे वे हथियारबंद लोग अपने 50 हजार के इनामी किसी जफर नाम के बदमाश का पीछा करते हुए भाजपा नेता के घर तक पहुंच गए थे.
वहां हुए कथित गोलीकांड में छह पुलिस कर्मी मुरादाबाद पुलिस के भी घायल हो गए. जबकि बीच में अचानक आ गई भाजपा नेता गुरताज सिंह भुल्लर की पत्नी गुरजीत कौर की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई. परिवार के इस दावे को यूपी के मुरादाबाद पुलिस की टीम हालांकि शुरू से ही गलत बता रही है. उस खूनी खेल के बाद चारों ओर से बुरी तरह फंसी पड़ी यूपी के मुरादाबाद जिले की पुलिस का दावा तो यह भी है कि, जब उसने यानि मुरादाबाद पुलिस ने गोली चलाई ही नहीं तो फिर किसी महिला की मौके पर पुलिस की गोली से मौत हो ही कैसे सकती है? हालांकि यह बात फॉरेंसिक साइंस की रिपोर्ट में ही साबित होगी कि, महिला के कत्ल की वजह बनी गोली आखिर किस हथियार से चली? क्योंकि फॉरेंसिक साइंस की रिपोर्ट में पुलिस वैपन और आम आदमी के पास मौजूद हथियार से चलाई गई गोली का “बोर” आसानी से पहचाना जा सकता है.
DIG का टाल मटोलपूर्ण वाला रवैया
इस विवादास्पद कांड में यूपी की मुरादाबाद पुलिस ने जो करा-धरा वो तो वही जाने. सवाल यह पैदा होता है कि आखिर जब यूपी पुलिस के संदिग्ध पुलिस वालों को उत्तराखंड पुलिस ने पकड़ कर, अस्पताल में इलाज के बहाने ही सही अपने काबू में कर लिया था, तो फिर आखिर मुरादाबाद पुलिस के संदिग्ध आरोपी पुलिसकर्मी उत्तरखंड पुलिस की कस्टडी से भाग जाने में कैसे कामयाब रहे? इस बारे में शुरू से ही टाल मटोलपूर्ण वाला रवैया अख्तियार कर रहे, कुमाऊं मंडल के डीआईजी नीलेश आनंद भरडे भी निरुत्तर हैं. उनसे जब पूछा गया कि उत्तराखंड की जिस पुलिस टीम की कस्टडी से यूपी के संदिग्ध पुलिसकर्मी फरार हो गए हैं. उत्तराखंड पुलिस अफसरों ने अपनी उस लापरवाह पुलिस टीम के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके उन्हें अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया?