क्‍यों रूस ने 98 साल से संभालकर रखी है अपने इस नेता की लाश, हर साल डेडबॉडी पहनती है नया सूट

मॉस्‍को: रूस की राजधानी मॉस्‍को का रेड स्‍क्‍वॉयर वह एतिहासिक जगह है जहां दुनिया भर से पर्यटक आते हैं। इस जगह पर आज भी व्‍लादिमीर लेनिन मौजूद हैं। सुनकर आपको थोड़ी हैरानी होगी, हो सकता है थोड़ा डर भी लगे मगर यह सच है। मॉस्‍को में रेड स्‍क्‍वॉयर पर बने संग्रहालय में आज भी लेनिन का शव रखा हुआ है। उनकी जन्‍मतिथि और पुण्‍यतिथि पर यहां पर लाखों की तादाद में लोग आते हैं और उन्‍हें श्रद्धांजलि देते हैं। पिछले 98 सालों से यही क्रम चला आ रहा है। लेकिन आखिर क्‍यों आज तक लेनिन की डेडबॉडी को रखा गया और कैसे इतने सालों से उसे संरक्षित किया जा रहा है।

केमिकल से नहाती है डेडबॉडी
लेनिन को रूस के बोल्‍शेविक में हुई जंग के लीडर के तौर पर आज भी दुनिया जानती है। उनके शव को साम्‍यवाद का प्रतीक माना जाता है। रेड स्‍क्‍वॉयर वह जगह है जहां पर लेनिन ने रूस की क्रांति के समय एतिहासिक भाषण दिया था। हजारों की भीड़ ने उन्‍हें सुना था। जनवरी 1924 में उनकी मृत्‍यु हो गई थी और तब से ही उनका शव सुरक्षित करके रखा गया है।

98 साल गुजर चुके हैं और लेनिन का शव इसी तरह से रखा है। देश के बायोमेडिकल टेक्‍नोलॉजी रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर की ओर से इस डेडबॉडी की देखभाल में पैसे खर्च किए जा रहे हैं। रोजाना मॉस्‍चराइजिंग होती है और केमिकल इंजेक्‍शन लगाए जाते हैं। साथ ही हर साल शव को केमिकल से नहलाया जाता है।

बदला जाता है सूट
सोवियत संघ टूटने के बाद ही दुनिया को पता लग सका था कि लेनिन के शव को कैसे सुरक्षित रखा जा रहा है। कहते हैं कि आज भी उनका चेहरा बिल्‍कुल युवा नजर आता है और उस पर जरा भी झुर्रियां नहीं पड़ी है। हालांकि कभी-कभी उनके चेहरे और हाथों पर काले धब्‍बे नजर आने लगते हैं। इन्‍हें एसिड के इंजेक्‍शन से हटा दिया जाता है। उनकी डेडबॉडी को हमेशा एक सूट पहनाया जाता है। इसे फंग्‍स से बचाने के लिए समय-समय पर बदला जाता है। मगर इस बात को कई लोग मानते हैं कि एक तरह की रहस्‍यमय हवा इस शव को हमेशा घेरे रहती है।

डेडबॉडी पर अरबों खर्च
30 साल से लगातार रूस में कई ऑनलाइन पोल हुए हैं और उनमें लेनिन के अंतिम संस्‍कार की बात पर सवाल पूछे जाते हैं। सिर्फ 18 फीसदी लोगों ने ही उनके शव को इस तरह ये रखने की बात कही है। ज्‍यादातर जनता चाहती है कि उन्‍हें अब दफना देना चाहिए। साल 2016 में इस शव को पहली बार रेड स्‍क्‍वॉयर पर रखा गया था।

उसी समय यह जानकारी सामने आई थी कि इस डेडबॉडी को संरक्षित रखने में कितनी रकम खर्च की जाती है। हर साल इस डेडबॉडी को संभालकर रखने में दो लाख डॉलर का खर्च आता है। कई लोग इतने खर्च से खासे नाराज हैं और उनका मानना है कि एक ममी की देखभाल में भी इससे कम खर्च लगता है।

क्‍यों नहीं दफनाया जाता
सोवियत संघ के राष्‍ट्रपति रहे मिखाइल गोर्बाचोव ने कई बार लेनिन को दफनाने की बात कही थी। वहीं, रूस के पहले राष्‍ट्रपति बोरिस येल्तिसन उनके शव को दफनाना नहीं चाहते थे। साल 1997 में उन्‍होंने कहा था कि रेड स्‍क्‍वॉयर को कब्रिस्‍तान नहीं बनाया जाएगा। राष्‍ट्रपति पुतिन ने शव को लेकर कोई उत्‍साह नहीं दिखाया। पुतिन मानते थे कि लेनिन ने गरीबों पर शासन किया है।

पुतिन ने तो एक बार यहां तक कह दिया था कि लेनिन ने ही रूस को एटम बम की स्थिति में ला दिया है। लेकिन इसके बाद भी वह उन्‍हें दफनाना नहीं चाहते हैं। स्‍टालिन को अपना आदर्श मानने वाले पुतिन ने एक बयान में कहा था कि मार्क्‍सवाद बाइबिल की तरह है और लेनिन उसके संत हैं।