संविधान के पन्ने पर क्यों हैं राम? जानें क्या है कनेक्शन

नई दिल्ली : देश के अलग-अलग हिस्सों में आज रामनवमी का त्योहार श्रद्धा और उल्लास से मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र ने भी देशवासियों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। आज ही के दिन प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था। यूं तो राम कण-कण में हैं लेकिन भगवान राम का हमारे संविधान से भी खास कनेक्शन हैं। रामनवमी के अवसर पर हम अपने संविधान की मूल प्रति में बनाई गई राम की तस्वीर और उसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। संविधान की यह मूल प्रति संसद में सुरक्षित रखी हुई है।संविधान के भाग 3 में है तस्वीरभारत के संविधान की मूल प्रति में मौलिक अधिकारों से जुड़े अध्याय के आरम्भ में एक स्केच है। यह स्केच मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण का है। बताया जाता है कि यह तस्वीर लंका में रावण पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापसी का है। श्रीराम भारत के सांस्कृतिक, नैतिक और राजनैतिक मूल्यों के आदर्श रहे हैं। उनका व्यक्तित्व एवं जीवन दर्शन हमारे संवैधानिक मूल्यों के समरूप हैं। बताया जाता है कि जब देश के संविधान लिखा जाने अंतिम चरण में था तब इसकी मुख्य प्रतिलिपि में कलाकृतियों को लेकर चर्चा हुई थी। श्रीकृष्ण के साथ अन्य लोगों की भी तस्वीरेंहमारे देश के संविधान में भगवान श्रीराम के साथ ही इतिहास के चुनिंदा महात्मा, गुरुओं, शासकों के साथ ही पौराणिक पात्रों के चित्र बनाए गए हैं। इन्हें संविधान के अलग-अलग पन्नों पर जगह दी गई है। संविधान में दिए गए 22 चित्र भारत के गौरवशाली विरासत का संदेश देता है। संविधान में भगवान श्रीराम के अलावा गीता का उपदेश देते श्रीकृष्ण के साथ अर्जुन, टीपू सुल्तान, नटराज, भगवान बुद्ध, लक्ष्मीबाई, वीर शिवाजी, मुगल सम्राट अकबर के साथ ही गंगा मैया और इसे धरती पर लाने वाले भागीरथ को भी स्थान दिया है। संविधान के पन्नों पर 22 तस्वीरेंसंविधान जब लिखा गया तो उसमें पन्नों पर कई जगह खाली थी। ऐसे में आम सहमति से इन जगहों पर चित्र बनाने का फैसला लिया गया। इन चित्रों को बनाने की जिम्मेदारी उस समय के मशहूर चित्रकार और शांति निकेतन से जुड़े नंदलाल बोस को दी गई। नंदलाल बोस और उनके शिष्यों ने 22 चित्रों के अलावा संविधान के पन्नों के किनारों को भी डिजाइन किया। संविधान को बनाने में दो साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था। हालांकि, उसे लिखने में छह महीने का समय लगा। संविधान सभा के 284 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान पर हस्ताक्षर किए थे। मूल संविधान में दस पेज पर सभी लोगों के हस्ताक्षर हैं।