साबरमती का अंडा सेल कर रहा इंतजार, अतीक अहमद 24 घंटे में 60 गोलियां क्यों खाता है?

अहमदाबाद: प्रयागराज की एमपी/एमएलए कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर अतीक अहमद को लाया जा रहा है। उमेश पाल हत्याकांड के बाद पिछले महीने से लगातार सुर्खियों में चल रहा माफिया अतीक अहमद शायद ही कोर्ट की इस पेशी को भूल पाएगा। साबरमती जेल से निकलने पर उसके मन में शंका थी तो अब लौटने पर उम्रकैद की सजा है। अतीक को कितने दिनों तक साबरमती जेल में रहना पड़ेगा? इस सवाल का जवाब है कि जब तक कोई अदालत उसके जेल ट्रांसफर पर फैसला नहीं कर देती है। तब तक उसका ठिकाना साबरमती जेल होगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अतीक अहमद को यूपी से अहमदाबाद की सेंट्रल जेल में जून, 2019 में शिफ्ट किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ माफिया अतीक का स्वास्थ्य भी एक बड़ा कारण है जिसके चलते फिलहाल उसकी जेल में बदलाव आसान नहीं दिखता है। दवाईयों के दम पर जिंदा 60 साल की उम्र पूरी कर चुके अतीक अहमद की आने वाले दिनों में और मुश्किलें बढ़ सकती है, क्यों उमेश पाल हत्याकांड समेत कई मामलों की सुनवाई चल रही है। चार बार विधायक और एक बार सांसद रहे अतीक ने कभी सोचा नहीं होगा कि उसे राजू पाल की हत्याकांड करना इतना महंगा पड़ेगा कि उसकी जिंदगी तबाह हो जाएगी। 100 से अधिक मुकदमों तले दबा यह माफिया दवाईओं के दम पर जिंदा है। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, बीपी समेत उसी कई अन्य गंभीर बीमारियां है। कभी-कभी उसे एक दिन में 60 गोलियां तक भी खानी पड़ती हैं। साबरमती जेल से जब माफिया अतीक अहमद को यूपी ले जाया गया था तो रास्ते में उसकी शारीरिक कमजोरी झलकी थी। चार साल से साबरमती जेल में बंद अतीक को काफी ज्यादा दवाईयां लेनी पड़ती हैं। जानकारी के अनुसार वह हाई सिक्योरिटी बैरक के अकेलेपन और परिवार के साथ खुद की चिंता में रहता है। यही उसके तनाव के बड़े कारण हैं। इसके चलते उसका स्वास्थ्य भी खराब हो चुका है। वह ज्यादातर समय सोने और कुछ पढ़ने में व्यतीत करता है। अतीक को लगा था झटका नवभारत टाइम्स ऑनलाइन की मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार 26 मार्च को जब यूपी पुलिस माफिया अतीक को लेने के लिए साबरमती जेल पहुंची थी। तो जेल प्रशासन के साथ अतीक को बड़ा झटका था। न तो जेल प्रशासन को यूपी पुलिस के आने की कोई सूचना थी। न ही अतीक को कोई अनुमान थाकि यूपी पुलिस एकदम से आ जाएगी। सूत्र बताते हैं कि यूपी पुलिस के अचानक पहुंचने के चलते ही कागजी कार्रवाई में वक्त लगा था। इससे बाद जेल प्रशासन हाई सिक्योरिटी बैरक से अतीक को निकालने और उसे मानसिक तौर तैयार करने में काफी समय लगा था। एक साथ कई बीमारियों से ग्रसित अतीक ने पहली बार में तो जेल से निकलने से इनकार कर दिया था। बाद में अधिकारियों के समझाने पर वह तैयार हुआ था। 24 घंटे रहती है निगरानी एक साथ कई बीमारियों से जूझ रहे अतीक का साबरमती जेल में नियमानुसार और जरूरत के पड़ने पर चेकअप किया जाता है। अतीक को सबसे ज्यादा दिक्कत अकेलेपन और तनाव से है। इसके चलते कई बार उसका ब्लड प्रेशर गड़बड़ा जाता है। सूत्र बताते हैं। कि साबरमती जेल में उसकी गहन निगरानी रखी जाती है, ताकि जेल नियमों के अनुसार उसकी सुरक्षा सुनिश्चित रहे। जेल में उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही रखा जाता है। इसके अतरिक्त उसे कोई विशेष छूट नहीं दी जाती है, बल्कि उसकी सुरक्षा जेल प्रशासन के लिए हमेशा बड़ी चुनौती रहती है। इसीलिए उसे आईसोलेटेड हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा गया है, जहां से उसका बाहर मूवमेंट नहीं होता है। उसे आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न मामलों की सुनवाई के दौरान बैरक से कनेक्ट कर दिया जाता है।