PM Modi ने किरेन रिजिजू का मंत्रालय क्यों बदला ? कैसे बढ़ती गई न्यायपालिका और कानून मंत्री के बीच तल्खी…जानें केंद्र की सियासत में बदलाव की इनसाइड स्टोरी

मोदी सरकार ने कानून मंत्री किरेन रिजिजू का विभाग बदल दिया है। किरेन रिजिजू अब पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का पोर्टफोलियो संभालेंगे। रिजिजू की जगह अब अर्जुन राम मेघवाल लॉ मिनिस्टर होंगे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह के अनुसार, केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मंत्रियों के बीच विभागों का पुनर्आवंटन किया है। रिजिजू जजों पर टिप्पणियों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। उन्होंने कॉलेजियम को लेकर भी कहा था कि देश में कोई किसी को चेतावनी नहीं दे सकता है। इसके अलावा एंटी इंडिया ग्रुप का हिस्सा जैसा रिटायर्ड जजों को लेकर भी बयान दिया था। इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार ने कैबिनेट में किया फेरबदल, किरेन रिजिजू को कानून मंत्री पद से हटाया, अर्जुन राम मेघवाल को सौंपा कार्यभाररविशंकर प्रसाद के बाद अब रिजिजू को क्यों हटाया गयाजुलाई 2021 में ठीक इसी तरह से रविशंकर प्रसाद का भी कानून मंत्रालय बदल दिया गया था और फिर किरेन रिजिजू का नाम सामने आया। लेकिन अब एक बार फिर से बड़ा फेरबदल हुआ है। इसके पीछे की बड़ी वजह यही बताया जा रहा है कि जिस तरह से सरकार और सुप्रीम कोर्ट के बीच तकरार देखने को मिल रहा था। रिजिजू जब से कानून मंत्री बने उन्होंने कॉलोजियम से लेकर सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कुछ सख्त टिप्पणियां की। पीएम मोदी या केंद्र सरकार की तरफ से इसको लेकर कोई स्पष्टीकरण या बयान सामने नहीं आया तो रिजिजू को लगा कि इस पर मोदी सरकार की भी मौन सहमति है। लेकिन सरकार का एक बड़ा मकसद ये होता है कि ज्यूडिशरी से टकराव नहीं बल्कि उसके साथ मिलकर काम करना होता है। बीते दिनों अमित शाह ने भी कहा था कि ज्यूडिशरी और कार्यपालिका के कामों में ओपलैपिंग हो रही है। क्या है फैसले की इनसाइड स्टोरीइस फैसले की अलग-अलग वजह विपक्ष के तमाम नेता अपने हिसाब से गिनाते नजर आ रहे हैं। न्यायपालिका-सरकार के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद नजर आया। आपको याद होगा पिछले किस-किस तरह के मुद्दे उठे थे। कॉलेजियम पर किरेन रिजिजू का बयान सामने आया, उससे भी टकराव बढ़ी।हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसले और कड़ी टिप्पणियां भी आईं।राजस्थान विधानसभा चुनाव पर इस वक्त पार्टी का खास जोर है। राजस्थान बीजेपी का बड़ा चेहरा माने जाते हैं मेघवाल।मेघवाल को बड़ा मंत्रालय देकर ट्राइबल-एससी वोटरों को साधने की कोशिश की गई है।ये चुनावी वर्ष है और सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ऐसे ही तल्ख टिप्पणियां आती रही तो इससे सरकार की इमेज खराब हो सकती है।इसे भी पढ़ें: Manipur Violence को किरेन रिजिजू ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण घटना, कहा- केंद्र की ओर से सभी जरूरी कदम उठाए जा रहेकैसे बढ़ती गई न्यायपालिका और कानून मंत्री के बीच तल्खी…सीजेआई चंद्रचूड़ को किरण रिजिजू का पत्रहाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति की व्यवस्था को लेकर पिछले साल से केंद्र और सुप्रीम कोर्ट के बीच खींचतान चल रही है। जनवरी 2023 में रिजिजू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखा, जिसमें न्यायाधीशों की शॉर्टलिस्टिंग के लिए निर्णय-अंकन प्रक्रिया में एक सरकारी नामित को शामिल करने का सुझाव दिया गया था।सरकार की आपत्तियों का खुलासा करने वाले SC पर रिजिजूउसी महीने में रिजिजू ने कहा कि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में तीन अधिवक्ताओं की नियुक्ति पर केंद्र की आपत्तियों पर गुप्त या संवेदनशील रिपोर्ट सार्वजनिक करना एक गंभीर चिंता की बात है। सुप्रीम कोर्ट के कदम पर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए रिजिजू ने कहा कि रॉ या आईबी की गुप्त या संवेदनशील रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखना गंभीर चिंता का विषय है।SC को संविधान को हाईजैक करने वाले हाई कोर्ट जज का समर्थनइस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए रिजिजू ने दिल्ली हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश का एक साक्षात्कार क्लिप भी साझा किया, जिन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने स्वयं के न्यायाधीशों को नियुक्त करने का निर्णय लेकर संविधान को “हाईजैक” कर लिया है। रिजिजू ने जनवरी में एक ट्वीट में कहा था कि वास्तव में अधिकांश लोगों के समान विचार हैं।न्यायपालिका को सरकार के खिलाफ करने के लिए कैलिब्रेटेड प्रयास: रिजिजूमार्च में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए रिजिजू ने भारतीय न्यायपालिका को कमजोर करने और इसे सरकार के खिलाफ करने का एक कैलिब्रेटेड प्रयास बताया था। रिजिजू ने न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए अनुशंसित नामों को दोहराने के कारण और उनमें से कुछ पर सरकार की आपत्तियों को सार्वजनिक करने के सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसले की भी आलोचना की थी। कुछ जज ‘भारत विरोधी’ गिरोह का हिस्सा कॉन्क्लेव में  रिजिजू ने कहा कि कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीश भारत विरोधी गिरोह का हिस्सा थे और न्यायपालिका को एक विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाने के लिए मजबूर कर रहे थे। उन्होंने चेतावनी दी कि देश के खिलाफ काम करने वालों को कीमत चुकानी पड़ेगी। हाल ही में न्यायाधीशों की जवाबदेही पर एक कार्यक्रम आयोजित हुई थी। लेकिन किसी तरह पूरी संगोष्ठी बन गई कि कैसे कार्यपालिका न्यायपालिका को प्रभावित कर रही है। रिजिजू ने कहा। था कि कुछ न्यायाधीश ऐसे हैं जो कार्यकर्ता हैं और एक भारत विरोधी गिरोह का हिस्सा हैं जो विपक्षी दलों की तरह न्यायपालिका को सरकार के खिलाफ करने की कोशिश कर रहे हैं।फास्ट ट्रैक कोर्ट के प्रदर्शन पर असंतोषरिजिजू ने कुछ राज्यों में फास्ट ट्रैक विशेष अदालतों (FTSCs) के प्रदर्शन पर अपने असंतोष पर भी चिंता जताई है और उनके मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से और भी बहुत कुछ करने को कहा है।