माई लॉर्ड, यॉर लॉर्डशिप, यॉर ऑनर… अदालत में बोले जाने इन शब्दों पर जज क्यों जता रहे हैं ऐतराज

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पी. एस. नरसिंम्हा ने माई लॉर्ड या यॉर लॉर्डशिप कहने पर ऐतराज जताया है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि माई लॉर्ड के बजाय ‘सर’ शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पहले भी कई जज माई लॉर्ड, यॉर लॉर्डशिप या फिर यॉर ऑनर कहने पर ऐतराज जता चुके हैं। कहा गया था कि यह औपनिवेशिक काल का चलन है, जिसे अभी भी प्रैक्टिस में रखा जा रहा है। सुनवाई के दौरान जब एक सीनियर एडवोकेट ने जस्टिस को माई लॉर्ड कहकर संबोधित किया तो जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, ‘आप कितनी बार माई लॉर्ड कहेंगे। अगर आप यह कहना बंद कर देंगे तो मैं आपको अपनी आधी सैलरी दे दूंगा।’पहले भी उठ चुका है मुद्दा2016 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रस्ताव पारित कर कहा था कि माई लॉर्ड टर्म का इस्तेमाल न किया जाए। 2009 में मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी तब जस्टिस के. चंद्रू ने कहा था कि उन्हें माई लॉर्ड न कहा जाए। इसी तरह से ओडिशा हाई कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस एस. मुरलीधर ने भी कहा था कि उन्हें माई लॉर्ड न कहा जाए। इस तरह कई बार जजों ने कहा हुआ है कि उन्हें माई लॉर्ड या लॉर्डशिप न कहा जाए।2021 में चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे ने भी जताया था ऐतराजसुप्रीम कोर्ट में 23 फरवरी 2021 को एक मामले की सुनवाई के दौरान जब लॉयर ने चीफ जस्टिस को यॉर ऑनर संबोधित किया था तो उन्होंने एतराज जताया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे की अगुवाई वाली बेंच में लॉ स्टूडेंट खुद पेश हो रहे थे। संबोधन के दौरान उन्होंने चीफ जस्टिस को यॉर ऑनर से संबोधित किया गया। तब चीफ जस्टिस ने ऐतराज जताया और कहा कि ये यूएस कोर्ट नहीं है। इस संबोधन से आप संबोधित न करें।परंपरागत तौर पर चलन में हैं ये शब्दशीर्ष अदालत में 45 साल से प्रैक्टिस कर रहे एडवोकेट एम. एल. लाहौटी कहते हैं कि यह परंपरागत तौर पर चलन में है और इसी कारण वकील इन शब्दों का प्रयोग करते हैं। इसे कोर्ट क्राफ्ट के तौर पर भी देखा जाता है। जब हम अदालत में दलील दे रहे होते हैं, तो कई बार अगला वाक्य जुबान पर आने में कुछ सेकंड लग जाते हैं। इस बीच एक पॉज जैसी स्थित न बनें, इसलिए अक्सर वकील माई लॉर्ड या यॉर लॉर्डशिप कहते हुए अदालत से दलील पर गौर करने के लिए कहते हैं। लगभग पांच दशक से प्रैक्टिस में रहते हुए हम उस परंपरा के तहत यही संबोधन करते रहे हैं। सर शब्द जुबान पर नहीं चढ़ा हुआ है।’यॉर ऑनर का इस्तेमाल निचली अदालतों के लिए होता है’बकौल लाहौटी नए वकील अपने सीनियर वकीलों का अनुसरण करते हैं। वह अदालत के सम्मान में ऐसा करते हैं। वैसे यॉर ऑनर का संबोधन आमतौर पर निचली अदालत के जजों के लिए किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के जज और बार असोसिएशन ने भी कई बार संबोधन के मामले में कहा है कि सर का संबोधन हो सकता है। कई वकील सर कहकर भी संबोधित करते हैं। इंग्लैंड में वहां की अदालत में ज्यादा औपचारिक संबोधन है। साथ ही वहां ड्रेस में वकीलों और जजों को विग भी लगाना होता है। लेकिन US कोर्ट में अब चीजें काफी अनौपचारिक है। वहां ब्लैक सूट वाइट शर्ट में वकील पेश होते हैं। वहां गाउन आदि का चलन नहीं रहा। न ही किसी विग का चलन है जजों को सर कहकर संबोधित किया जाता है।