एक आरोपी के लिए प्लेन में क्यों बुक होती हैं छह अतिरिक्त सीटें! मुंबई पुलिस ने बताई पूरी कहानी

मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी है मुंबई। अक्सर अंडरवर्ल्ड व आतंकवादियों के निशाने पर रहती है। इसलिए मुंबई पुलिस सहित या कई अन्य एजेंसियों को जब किसी खतरनाक अपराधी या आतंकी की टिप मिलती है, तो उन्हें फौरन फ्लाइट पकड़कर संबंधित शहर को जाना पड़ता है। फ्लाइट में हथियार ले जाना वर्जित है। लेकिन खतरनाक अपराधियों को पकड़ने के लिए पुलिस के लिए हथियार साथ ले जाना भी जरूरी है। ऐसे में पुलिस के पास क्या विकल्प होते हैं? एक पुलिस अधिकारी ने इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस अधिकारी के अनुसार, जब हमें फ्लाइट से जाना होता है, तो डीसीपी से लेकर जॉइंट सीपी रैंक का कोई भी अधिकारी एक लेटर लिखता है। इसे मूवमेंट लेटर कहा जाता है। इस लेटर में उन हथियारों का सारा जिक्र होता है, जो हथियार पुलिस वाले ले जा रहे होते हैं।जब पुलिस की टीम एयरपोर्ट पर पहुंचती है, तो बैगेज काउंटर पर या चेक इन काउंटर पर इस लेटर को दिखाया जाता है। वहीं पर पुलिस वालों से उनके हथियार ले लिए जाते हैं और केबिन क्रू मेंबर तक बाद में पहुंचा दिए जाते हैं। यह हथियार प्लेन में ही ऊपर रखे जाते हैं, लेकिन केबिन क्रू मेंबर के पास ही रहते हैं। पुलिस के पास नहीं। दूसरे शहर में फ्लाइट लैंड होने के बाद जब पुलिस वाले एयरपोर्ट से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें गेट के पास यह हथियार दे दिए जाते हैं।ऐसे आतंकी को बैठाते हैंजिस खतरनाक अपराधी या आतंकी को पकड़ने के लिए पुलिस या कोई भी जांच टीम कामयाब हो जाती है, तो उसी मूवमेंट लेटर को फिर एयरपोर्ट को दिखाया जाता है। लेकिन चूंकि इस बार साथ में खतरनाक अपराधी भी होता है, तो पुलिस एक और एहतियात बरतती है। वह आगे से दूसरे नंबर की पंक्ति में बीच वाली सीट पर अपराधी/ आतंकवादी को बैठाती है। आजू-बाजू की सीट पर खुद पुलिस वाले बैठते हैं। कई बार और एहतियात के लिए पुलिस पहले नंबर की और तीसरे नंबर की तीनों सीटों को (कुल छह सीटें) भी बुक कर लेती है, भले ही वह खाली जाएं। इन सभी एयर टिकट का पेमेंट ऑफिशल सेक्रेट फंड से बाद में उस पुलिस अधिकारी को दे दिया जाता है, जिसने टिकट बुक कराए। इस अधिकारी के अनुसार, यदि बहुत ज्यादा खतरनाक अपराधी नहीं हुआ, तो पुलिस कोशिश करती है कि प्लेन में सबसे पीछे की तीन या छह सीटें बुक करा दी जाएं।पहले कसाब को हेलिकॉप्टर से पुणे ले जाने वाले थेजब कसाब को फांसी देने के लिए पुणे ले जाया जाना था, तब इस विकल्प पर भी फैसला किया गया था कि हेलिकॉप्टर से उसे मुंबई से पुणे ले जाया जाए। एक अधिकारी के अनुसार, लेकिन बाद में हेलिकॉप्टर वाला प्लान इसलिए कैंसल किया गया, क्योंकि तब एयरपोर्ट अथॉरिटी को कसाब का नाम भेजना पड़ता और तब पुलिस को डर था कि फांसी वाली बात कहीं पहले लीक न हो जाए। इसलिए उसे सड़क के रास्ते पुणे ले जाया गया। जे.डे मर्डर केस में भी मुंबई क्राइम ब्रांच ने पहले कुछ अपराधियों को लाने के लिए चार्टर प्लेन भेजने का मन बनाया था, लेकिन खबर लीक होने के डर में इस फैसले को तब आखिरी वक्त पर बदला गया था।