जोशीमठ के क्षतिग्रस्त मकानों में रहने वापस क्यों लौट रहे लोग? किराए को लेकर जानिए क्या हो रही दिक्कत

अभिषेक अग्रवाल, जोशीमठ: उत्तराखंड के जोशीमठ में भूधसाव और दरारों को 1 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है। पिछले वर्ष जनवरी माह से जोशीमठ में दरार और भूधसाव का सिलसिला शुरू हुआ था। इस दौरान लगभग 181 भवनों को असुरक्षित घोषित किया गया था। इनमें से कुछ मकानों का भुगतान कर भवन स्वामियों को भवन खाली करने को कहा गया था। ये प्रभावित परिवार 1 वर्ष बाद भी अपने क्षतिग्रस्त मकानों में रह रहे हैं। साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक इन घरों में किराएदार भी रखे गए हैं। सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से खतरनाक इन घरों में रहने वाले लोगों को यहां न रहने को कह दिया गया था। कुछ परिवार आज भी इन क्षतिग्रस्त भवनों में रह रहे हैं। इस आपदा की जद में आए 24 परिवार ऐसे हैं जो आज भी अपने मकान को छोड़कर किराए के मकान में रह रहे हैं। अब उन्हें किराया अपनी जेब से वहन करना पड़ रहा है।जोशीमठ के मनोहर बाग वार्ड के रहने वाले लक्ष्मी प्रसाद सती कहते हैं कि उनके मकान में काफी डरा रहे हैं। पिछले वर्ष पूरा परिवार रहने के लिए राहत शिविर में चला गया था पांच महीने तक राहत शिविर में रहने के बाद अब उन्हें किराए के कमरों में रहना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अपना मकान खाली करते समय कुछ सामान बेच दिया था, जबकि बचा हुआ सामान क्षतिग्रस्त मकान में ही रखा हुआ है। क्षतिग्रस्त मकान में लौट रहे लोगउन्होंने कहा कि तहसील प्रशासन द्वारा बीते वर्ष नवंबर तक उन्हें किराया दिया जा रहा था। अब किराया भी नहीं दिया जा रहा है, जिस कारण अब वह खुद ही किराया देकर रह रहे हैं। रवि ग्राम वार्ड के गजेंद्र सिंह ने बताया कि उनका दो कमरों का मकान भी इस आपदा में क्षतिग्रस्त हो गया था। क्षतिग्रस्त होने के बाद लगभग 5 महीने तक वह राहत शिविर में रहे इसके बाद किराए के मकान में चले गए। प्रशासन द्वारा बीते वर्ष नवंबर महीने तक किराया भी दिया जा रहा था, हालांकि अब प्रशासन की ओर से किराया नहीं दिया जा रहा है। इस कारण वह अपने क्षतिग्रस्त मकान में वापस लौट आए हैं। बिजली काटने के दिए निर्देशकुछ लोग चोरी छुपे भुगतान हो चुके क्षतिग्रस्त मकानों में रह रहे हैं, उनकी सूची प्रशासन के पास है। पालिका और प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा निरंतर छापेमारी की जा रही है। इन लोगों को हिदायत दी जा चुकी है कि यह अपने क्षतिग्रस्त मकानों में ना रहें। साथ ही बिजली विभाग और जल संस्थान को इन क्षतिग्रस्त मकान का बिजली पानी काटने को कहा गया है। अभी जो मकान मालिक किराए के मकान में रह रहे हैं, प्रशासन की ओर से उन मकान मालिकों को नवंबर महीने तक का किराया दिया जा चुका है। बाकी बचा किराया जल्द ही दे दिया जाएगा।