कौन आएगा पार्टी में और कौन नहीं, 400+ का टारगेट…BJP ने 2024 के लिए बनाया ये प्लान

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आगामी लोकसभा चुनाव में 543 लोकसभा सीटों में से 400 सीटें जीतने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए पार्टी हर कोशिश कर रही है। सूत्रों की माने तो बीजेपी जीत के लिए दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल कराने का प्लान भी बना चुकी है। मंगलवार को हुई एक महत्वपूर्ण रणनीति बैठक में बीजेपी चीफ ने पार्टी के विभिन्न महासचिवों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। विनोद तावड़े को ज्वाइनिंग कमिटी का प्रभार दिया गया है।विपक्ष के दिग्गज नेताओं पर नजर!बीजेपी के एक सूत्र ने बताया कि ज्वाइनिंग कमिटी दूसरे दलों के प्रभावशाली नेताओं और सांसदों को बीजेपी में लाने की संभावना तलाशेगी। फैसला उम्मीदवार के क्षेत्र में प्रभाव और चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी उन सीटों पर इस विकल्प पर विचार कर सकती है जहां उन्हें लगता है कि उनके पास जीतने वाला उम्मीदवार नहीं है। माना जा रहा है कि बीजेपी दूसरे दलों के नेताओं को अपने साथ मिलाकर अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। खासकर उन सीटों पर जहां पार्टी कमजोर है और जहां दूसरे दलों के किसी नेता को शामिल करने से जीत की संभावना बढ़ सकती है। 400 सीटें जीतने का लक्ष्य बीजेपी ने आगामी लोकसभा चुनाव में 400 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पार्टी हर तरह से कोशिश कर रही है। पार्टी कमजोर सीटों पर खासतौर से उन नेताओं को शामिल करने पर विचार कर रही है जो चुनाव जीतने में मदद कर सकें। पार्टी पिछले चुनाव में हारी हुई 160 सीटों पर भी ध्यान दे रही है और इन सीटों को जीतने के लिए रणनीति बना रही है। साल 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में 400 से ज्यादा सीटें जीती थीं। उसके बाद 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने बहुमत हासिल किया था। बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए विजन डॉक्यूमेंट बनाने का काम पार्टी के महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल को सौंपा है। चुनाव प्रचार और दूसरे कामों की जिम्मेदारी सुनील बंसल और दूसरे महासचिवों को दी गई है, जबकि दुष्यंत गौतम देशभर में बौद्ध सम्मेलन आयोजित कर नरेंद्र मोदी सरकार के काम के बारे में बताएंगे। इस बैठक में बीजेपी अध्यक्ष नड्डा के अलावा कई नेता मौजूद थे, जिनमें पार्टी के महासचिव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, अश्विनी वैष्णव और मनसुख मंडाविया शामिल थे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए।