हिमाचल की खूबसूरती को लगी किसकी नजर? जहां जनवरी में होती थी बर्फबारी वहां पड़ा है सूखा

शिमला: हिमचाल में क्या जनवरी के महीने में बर्फबारी नहीं होगी? क्या टूट जाएंगे पिछले 20 सालों के रिकॉर्ड? क्या प्रदेश में एक बार फिर से होगी पानी की कमी? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि इस बार भी हिमाचल में पिछले साल की तरह स्थिति बन रही है। मौसम विभाग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में जनवरी की 1 तारीख से लेकर 8 तारीख तक प्रदेश में सूखा पड़ा हुआ है। जनवरी के महीने में हिमाचल प्रदेश में अभी तक सामान्य से 100 फीसदी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है यानि कि एक दिन भी बारिश नहीं हुई है। अगर आने वाले समय में पूरा महीना ऐसे ही निकलता है तो पिछले 20 सालों का रिकॉर्ड टूट सकता है। इससे पहले साल 2007 में ऐसा हुआ था जब जनवरी के महीने में माइनस 99% बारिश हुई थी। ठीक इसी तरह की स्थिति इस बार जनवरी में देखने को मिल रही है। ना बर्फबारी हो रही है और ना ही बारिश। अगर पूरा महीना ऐसा ही जाता है तो इसका सीधा असर फसलों पर और प्राकृतिक स्रोतों पर देखने को मिलेगा। एक तो बर्फबारी ना होने की वजह से सेब के पौधों के लिए जो चिलिंग सॉर्स होते हैं वह पूरे नहीं हो पाएंगे और साथ ही प्राकृतिक स्रोत रिचार्ज नहीं हो पाएंगे। इसके अलावा फसलों के लिए सिंचाई का पानी नहीं मिल पाएगा। वहीं बिजली उत्पादन के लिए भी पानी की किल्लत देखने को मिल सकती है। जनवरी के महीने में बर्फबारी ना होना काफी गंभीर विषय है। मौसम में लगातार हो रहे यह परिवर्तन आने वाले समय में बड़ी समस्या पैदा कर सकते हैं। इन तमाम मुद्दों को लेकर जब मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पॉल से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस बार एलनीनो इफेक्ट मॉनसून के समय से हिमाचल प्रदेश में मौसम पर प्रभाव डाल रहा है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में आए साइक्लोन का असर भी हिमाचल में सीधे तौर पर देखने को मिल रहा है। पर्यटकों को होना पड़ा निराशउन्होंने कहा कि जनवरी के महीने में हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी होने की बहुत कम संभावना है। आने वाले समय में केवल हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि जनवरी के महीने में राजधानी शिमला में बर्फबारी की उम्मीद ना के बराबर है। ऐसे में जो पर्यटक शिमला बर्फबारी को देखने के लिए आ रहे हैं उन्हें निराशा ही होना पड़ेगा। बर्फबारी और बारिश न होने की वजह से मैदानी इलाकों में भी काफी समस्या देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा समस्या कोहरे को लेकर है। अगर पहाड़ों में बर्फबारी या बारिश नहीं होगी तो कोहरे की समस्या से निजात नहीं मिल पाएगी । लेकिन वर्तमान में स्थिति यही बनी हुई है कि कोई भी स्ट्रांग वेस्टर्न डिस्टरबेंस हिमाचल प्रदेश में एक्टिव नहीं हो रहा है जिसकी वजह से इन तमाम समस्याओं से राहत मिल सकती। पर्यटक नहीं कर रहे शिमला का रुखवहीं बात अगर तापमान की करें तो हिमाचल प्रदेश में तापमान सामान्य ही चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौसम में लगातार ड्राइनेस होने की वजह से बीमारियां भी पनप रही है। मौसम में ये बदलाव जलवायु परिवर्तन का ही नातीज़ा है। प्रदेश में बर्फबारी और बारिश न होने की वजह से सैलानियों के साथ-साथ बागवानों पर भी मार पड़नी शुरू हो गई है। पानी के स्रोत सूख रहे हैं और बर्फबारी ना होने के चलते होटल में भी ऑक्युपेंसी करीब 20% तक ही रह गई है।