कौन हैं आलोक त्रिपाठी जिन्हें मिली है ज्ञानवापी सर्वे की जिम्मेदारी?

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ज्ञानवापी परिसर के आर्कियोलॉजिकल सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। पुरातत्व विभाग की टीम ज्ञानवापी के 600 साल पुराने मस्जिद के तमाम पहलुओं की समीक्षा कर रही है। ब्रशिंग, मैपिंग और फोटोग्राफी- वीडियोग्राफी के जरिए सर्वे के काम को पूरा कराया जा रहा है। इस सर्वे का कार्य एएसआई की 51 सदस्यीय टीम कर रही है। एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. आलोक त्रिपाठी सर्वे टीम को लीड कर रहे हैं। डॉ. त्रिपाठी को आर्कियोलॉजिकल सर्वे रिसर्च में बड़ा नाम माना जाता है। ऐसे में उनके नेतृत्व में सर्वे से ज्ञानवापी के सच को बाहर लाने में मदद मिलेगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरुवार को ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे को मंजूरी प्रदान कर दी। इस संबंध में जिला जज डॉ. अजय कुमार विश्वेश की अदालत के फैसले को लागू कर दिया गया। ऐसे में डॉ. आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में जांच टीम पूरी गंभीरता से परिसर की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला जज के सामने पेश करेगा।कौन हैं डॉ. आलोक त्रिपाठी?डॉ. आलोक त्रिपाठी के जिम्मे ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सत्य को सामने लाने की जिम्मेदारी होगी। वे अंडरवाटर आर्कियोलॉजिकल विंग के उत्खनन और सर्वेक्षण विशेषज्ञ हैं। डॉ. त्रिपाठी इस समय एएसआई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल के पद पर भी कार्यरत हैं। अंडरवाटर आर्कियोलॉजिकल विंग के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्य की सराहना बड़े स्तर पर हो चुकी है। डॉ. त्रिपाठी ने असम यूनिवर्सिटी सिलचर में बतौर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दी। वहां वे इतिहास विभाग में प्रोफेसर थे। डॉ. आलोक को तीन साल के लिए एएसआई का अतिरिक्त महानिदेशक नियुक्त किया गया। डॉ. आलोक त्रिपाठी ने लक्षद्वीप के बंगाराम आइलैंड के समुद्र में प्रिसेंस रॉयल जहाज के अवशेष ढूंढने में सफलता हासिल की। उन्होंने प्राचीन गुफाओं के रास्ते होने वाले व्यवसाय के बारे में भी खासा रिसर्व किया है। वे इतिहास के जाने-माने प्रोफेसर के रूप में पहचाने जाते हैं।बचपन से ही आर्कियोलॉजिस्ट बनने का था शौकडॉ. आलोक त्रिपाठी को बचपन से ही आर्कियोलॉजिस्ट बनने का शौक था। उन्हें पुरानी चीजों के बारे में जानने और उस पर शोध करने का ऐसा शौक हुआ कि इतिहास का प्रोफेसर होने के बाद भी वे ऑर्कियोलिकल डिपार्टमेंट से जुड़े। एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मैं उस समय से पुरातत्वविद बनना चाहता था, जब चौथी कक्षा में था। तमिलनाडु के मामल्लापुरम तट पर सुनामी के बाद प्राचीन मंदिरों के अवशेष उभरे थे। डॉ. आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में एएसआई की टीम ने इसका सर्वे किया था।पेशेवर गोताखोर हैं डॉ. त्रिपाठीडॉ. आलोक त्रिपाठी एक पेशेवर गोताखोर हैं। उन्हें जहाजों के मलबे पर काम करना एडवेंचरस लगता है। उन्होंने लक्षद्वीप में बांगरम द्वीप पर प्रिंसेस रॉयल जहाज के मलबे की खुदाई का का कार्य कराया। वे कहते हैं कि समुंद्र में कई राज छुपे हैं, जो हमें उस युग के बारे में बताते हैं। वे कांस्य युग के जहाज पर काम करने की बात करते हैं। वे कहते हैं कि भारत का समुद्र पुरातात्विक अवशेषों से समृद्ध है। उनका मानना है कि यहां अभी भी बहुत कुछ खोजा जाना बाकी है। वे मानतै कि आर्कियोलॉजिकल रिसर्च विज्ञान पर बहुत अधिक निर्भर है। तमिलनाडु के मामल्लापुरम एवं अरिकामेडु, गुजरात के द्वारका, महाराष्ट्र के एलीफेंटा और कई अन्य स्थलों पर उन्होंने शोध कार्य किए हैं।