जब बर्मन दा से ही संगीत कराने के लिए देव आनंद ने 6 महीने के लिए टाल दी थी फिल्म की शूटिंग

60 के दशक की बात है.अभिनेता देव आनंद एक फिल्म बना रहे थे. फिल्म के संगीत का जिम्मा सचिन देव बर्मन पर था. लेकिन अचानक चीजें बहुत तेजी से बदलीं. बर्मन दा की तबियत खराब हो गई. उन्हें हार्टअटैक हुआ. डॉक्टरों की सलाह थी कि बर्मन दा को इलाज और आराम दोनों की जरूरत है. फिल्म का काम रूकता हुआ दिख रहा था. दूसरा विकल्प ये था कि देव आनंद फिल्म के संगीतकार को ही बदल दें. ऐसे हालात में देव आनंद ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने फिल्म की शूटिंग को ही 6 महीने के लिए टाल दिया. उन्होंने मन बना लिया था कि फिल्म का संगीत तो बर्मन दादा ही तैयार करेंगे, उसके लिए चाहे उन्हें 6 महीने इंतजार क्यों ना करना पड़े.
यहां ये समझना जरूरी है कि फिल्म की शूटिंग को 6 महीने रोक देना आसान काम नहीं होता. इसमें बड़ा नुकसान भी होता है. लेकिन देव आनंद हर नतीजे के लिए तैयार थे. वो भी तब जबकि कुछ और बड़े निर्देशकों ने एसडी बर्मन को दिया हुआ काम वापस लेकर किसी और संगीतकार से कराया. बावजूद इसके देव आनंद अपने फैसले पर अड़े रहे. खैर, बर्मन दादा स्वस्थ होकर लौटे तो उन्होंने वापस फिल्म के संगीत को तैयार करने का काम शुरू किया.
ये कहानी गाइड फिल्म की है
देव आनंद ने ये बड़ा फैसला इसलिए लिया था क्योंकि ये उनके दिल के बहुत करीब की फिल्म थी. वो फिल्म थी- गाइड. इसके बाद जो हुआ वो और दिलचस्प था. ना जाने ये संयोग था या बर्मन दादा को अपनी तबीयत के खराब होने की वजह से हुई देरी का अफसोस, लेकिन कहते हैं कि एसडी बर्मन ने सिर्फ पांच दिन में फिल्म गाइड के सभी गानों को तैयार कर दिया. देव आनंद को तो उन पर भरोसा था ही, उन्होंने सभी गानों को तुरंत मंजूरी दे दी.
मुसीबत ये थी कि देव आनंद को एक गाना पसंद नहीं आ रहा था. वो इस गाने को फिल्म में रखने पर दोबारा सोचने के मूड में आ गए थे. देव आनंद इस गाने को मुंबई में रिकॉर्ड करवाकर आ तो गए लेकिन उन्हें ये गाना पसंद नहीं आ रहा था. उन्होंने अपने साथियों से इस बात की चर्चा भी की। देव आनंद इस गाने को लेकर बर्मन दादा के काम से खुश भी नहीं थे. हालांकि फिल्म बाद में जब फिल्म रिलीज हुई तो वही गाना फिल्म गाइड का सबसे हिट गाना साबित हुआ. आज भी वो हिंदी फिल्म संगीत का एक अमर गाना है. इस गाने के बोल थे- आज फिर जीने की तमन्ना है. बताते चलें कि इस गाने को एसडी बर्मन ने राग मिश्र भैरवी की जमीन पर तेैयार किया था.

फिल्म में कैसै आया ये गाना
इस गाने की शूटिंग उदयपुर में हुई थी. जब गाना यूनिट के बाकि लोगों ने सुना तो सभी ने खुलकर तारीफ की लेकिन देव आनंद अड़े रहे. बाद में फिल्म के डायरेक्टर विजय आनंद ने ये कहकर बात टाली कि फिलहाल इस गाने को शूट कर लेते हैं अगर बाद में फिल्म में अच्छा नहीं लगा तो कोई दूसरा गाना रिकॉर्ड कर लेंगे. अगले जितने भी दिन इस गाने की शूटिंग हुई देव आनंद ने एक बात नोटिस की, सेट से लेकर होटल तक आते जाते यूनिट का हर इंसान यही गाना गुनगुना रहा होता था- आज फिर जीने की तमन्ना है. देव आनंद ने सैकड़ों बार लोगों को यही गुनगुनाते हुए सुना. आखिर में वो भी मान गए कि ये गाना फिल्म में इस्तेमाल किया जाएगा. देव आनंद ने बाद में माना कि ये गाना जैसे का तैसा ही फिल्म में इस्तेमाल किया जाएगा. इस गीत को शैलेंद्र ने लिखा था जो बाद में कितना लोकप्रिय हुआ वो हम सभी जानते हैं. गाने के बोल भी कमाल के थे.