Wheelchair Tennis: घूमते पहियों पर सवार खिलाड़ी लिख रहे हौसले की नयी कहानियां

इंदौर। बेंगलुरु के 27 वर्षीय मधुसूदन एक हादसे के कारण अपने दोनों पैर गंवा कर कभी मायूस हो चुके थे, लेकिन व्हीलचेयर टेनिस को लेकर उनके जुनून ने उनकी जिंदगी को नये मायने दे दिए हैं।
मधुसूदन, अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की इंदौर टेनिस क्लब में आयोजित पहली राष्ट्रीय व्हीलचेयर टेनिस स्पर्धा में भाग ले रहे 30 खिलाड़ियों में शामिल हैं। सोमवार (27 मार्च) से शुरू हुई यह प्रतियोगिता शुक्रवार (31 मार्च) तक चलेगी जिसमें चार महिलाएं भी हिस्सा ले रही हैं।
बेंगलुरु में एक बहुराष्ट्रीय बैंक के दफ्तर में काम करने वाले मधुसूदन ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ को बताया,‘‘वर्ष 2008 के दौरान एक हादसे के चलते मेरे दोनों पैर कट गए थे। हादसे के बाद मैं तीन साल तक अपने घर से बाहर नहीं निकला था, लेकिन बाद में मुझे अहसास हुआ कि अगर मैं यूं ही बैठा रहा, तो कुछ नहीं होने वाला। फिर मैं घर से बाहर निकला और अपनी पढ़ाई पूरी की।’’
मधुसूदन बताते हैं कि वह एक बार बेंगलुरु में व्हीलचेयर टेनिस स्पर्धा देखने गए थे और तब से इस खेल के मुरीद हो गए। उन्होंने कहा,‘‘मैं कुछ अंतरालों के साथ पिछले सात साल से व्हीलचेयर टेनिस का अभ्यास कर रहा हूं। मैं इस खेल को इतना पसंद करता हूं कि मुझे लगता है कि मैं इससे कभी संन्यास नहीं लूंगा।’’
मधुसूदन की तरह मुंबई के 46 वर्षीय उद्यमी मितेश भी व्हीलचेयर टेनिस के दीवाने हैं। मितेश ने बताया कि वह केवल छह महीने के थे, तब उनके दोनों पैरों में पोलियो हो गया था जबकि उन्हें इस बीमारी से बचाव की खुराक भी दी गई थी।
आत्मविश्वास से लैस खिलाड़ी ने कहा,‘‘पोलियो होने के बाद मेरे जीवन में मुश्किलें रही हैं, लेकिन मैं मुश्किलों को हमेशा ‘‘मोस्ट वेलकम’’ बोलता हूं क्योंकि मुश्किलें आने से ही मुझे पता चलता है कि जीवन में आगे कुछ अच्छा होने वाला है।’’
मितेश ने बताया कि उन्होंने अपनी शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती के लिए व्हीलचेयर टेनिस खेलने का फैसला किया। उन्होंने कहा, यह खेल खेलने के बाद मैंने अपने शरीर को स्वीकार करना और इसका सम्मान करना भी सीखा है।’’
गौरतलब है कि व्हीलचेयर टेनिस में खास पहियों वाली व्हीलचेयर इस्तेमाल की जाती है जिससे खिलाड़ियों को कोर्ट पर तेजी से इधर से उधर जाने में मदद मिलती है।
एआईटीए के महासचिव अनिल धूपर ने बताते हैं कि भारत में फिलहाल व्हीलचेयर टेनिस के केवल 50 के आस-पास पंजीकृत खिलाड़ी हैं और बेंगलुरु तथा चेन्नई इस खेल के बड़े केंद्र हैं।इसे भी पढ़ें: Satwik-Chirag की निगाहें एक और खिताब पर, सिंधू और श्रीकांत भी फॉर्म में लौटना चाहेंगेजाहिर है कि पैरालम्पिक्स में शामिल इस खेल को देश में अपने विस्तार के लिए अभी लंबा सफर तय करना है।
धूपर ने बताया, ‘‘हम एक परियोजना के तहत व्हीलचेयर टेनिस को पिछले दो साल से बढ़ावा दे रहे हैं। हम स्पर्धाओं की तादाद बढ़ाकर इस खेल को दिल्ली, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में भी ले जा रहे हैं।’’
उन्होंने मांग की कि केंद्र और सरकारों को व्हीलचेयर टेनिस को आगे बढ़ाने के लिए एआईटीए की मदद करनी चाहिए।