अमेरिका-चीन में ये कैसी दुश्मनी? ताइवान की कीमत पर गुपचुप कर रहे Military Talks

वॉशिंगटन: कहते हैं कि राजनीति में कोई स्थायी दोस्त और दुश्मन नहीं होता। ऐसा ही अंतराष्ट्रीय कूटनीति में भी माना जाता है। अमेरिका और चीन कहने को तो सबसे बड़े दुश्मन हैं। कई बार दोनों देशों के युद्धपोतों और लड़ाकू विमान आमने-सामने भी आ चुके हैं। इसके बावजूद दोनों देश वॉशिंगटन में पर्दे के पीछे गुपचुप सैन्य वार्ता कर रहे थे। इस सैन्य वार्ता के खत्म होने की जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने खुद दी है। पेंटागन ने कहा कि यह दोनों देशों की सेनाओं के बीच फिर से संबंधों को शुरू करने पर सहमति के बाद पहली बातचीत है। इस बातचीत के दौरान भी चीन ने दो टूक शब्दों में ताइवान को लेकर अमेरिका को चेतावनी दी है। चीनी सेना ने अमेरिका से तोड़ लिया था नाताअमेरिका और चीन लोकतांत्रित रूप से शासित ताइवान के भविष्य को लेकर दक्षिण चीन सागर में आमने-सामने हैं। दोनों देशों में दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावों को लेकर भी विवाद है। पिछले साल फरवरी में अमेरिका ने चीन के एक जासूसी गुब्बारे को अपनी जमीन के ऊपर उड़ान भरने के बाद मार गिराया था। इस कारण दोनों देशों में तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया था। अगस्त 2022 में तत्कालीन प्रतिनिधि सभा अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद चीनी सेना ने अमेरिकी सेना के साथ अपने सैन्य बातचीत के चैनल को पूरी तरह से बंद कर दिया था। कहा जाता है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री ने चीनी रक्षा मंत्री को मामले की जानकारी देने के लिए कई बार फोन भी किया था, लेकिन बीजिंग में इसे सुना तक नहीं।अमेरिका और चीन सेनाओं के बीच संपर्क पर सहमतअमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले साल के अंत में सैन्य संबंधों को फिर से शुरू करने पर सहमति व्यक्त की थी। पेंटागन ने कहा कि 17वें दौर की वार्ता में चीन, ताइवान और मंगोलिया के रक्षा उप सहायक सचिव माइकल चेज ने अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग के लिए चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग कार्यालय के उप निदेशक मेजर जनरल सोंग यानचाओ से मुलाकात की। बयान में कहा गया है, “दोनों पक्षों ने यूएस-पीआरसी (चीन) रक्षा संबंधों पर चर्चा की। इस दौरान चेज ने आपसी प्रतिस्पर्धा को संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए सेना से सेना के बीच संचार की खुली लाइनों को बनाए रखने के महत्व पर प्रकाश डाला।” गलत अनुमान से भड़क सकती है हिंसापेंटागन के अधिकारियों का कहना है कि गलत अनुमान को संघर्ष में बदलने से रोकने के लिए दोनों सेनाओं के बीच संचार महत्वपूर्ण है। इससे पहले अमेरिका के शीर्ष सैन्य अधिकारी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल चार्ल्स क्यू. ब्राउन ने पिछले महीने अपने चीनी समकक्ष जनरल लियू जेनली के साथ एक वर्चुअल मीटिंग की थी। बैठक का हवाला देते हुए उसके रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा, चीन समानता और सम्मान के आधार पर अमेरिका के साथ स्वस्थ और स्थिर सैन्य-से-सैन्य संबंध विकसित करने का इच्छुक है।चीन ने ताइवान को लेकर अमेरिका को चेतायाइसने अमेरिका से दक्षिण चीन सागर में सैन्य तैनाती और उकसाने वाली कार्रवाइयों में कटौती करने का आग्रह किया, साथ ही कुछ देशों द्वारा ऐसी कार्रवाइयों के लिए समर्थन को बंद करने की भी गुजारिश की गई है, लेकिन उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। चीन ने अमेरिका से एक-चीन सिद्धांत का पालन करने और ताइवान को हथियार देना बंद करने को कहा है। चीन ने ताइवान मुद्दे पर कभी भई समझौता नहीं करने की कसम भी खाई है। चीनी बयान में कहा गया है, “अमेरिका को समुद्री और हवाई सुरक्षा मुद्दों के मूल कारणों को पूरी तरह से समझना चाहिए, अपनी अग्रिम पंक्ति की सेनाओं पर सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए और (मुद्दों को) बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना बंद करना चाहिए।”