भारत के प्रज्ञान और चीन के रोवर में कितनी है दूरी, एक दम सही आंकड़ा आया सामने, मिलने का क्या है चांस?

बीजिंग: भारत ने 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतर कर इतिहास रच दिया। दक्षिणी ध्रुव पर जाने वाला वह पहला देश बना। वहीं चांद पर जाने वाला भारत चौथा देश बना है। इसके अलावा चांद पर उतरने के अलावा भारत ने एक रोवर भी भेजा है। भारत का प्रज्ञान रोवर चांद पर मौजूद दो देशों के रोवर में से एक हैं। तो दूसरा रोवर किसका है? ये रोवर भारत के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन का है। इस रोवर का नाम युतु-2 है। हालांकि चांद पर होने के बावजूद भी इनका आमना सामना कभी नहीं होगा।ऐसा इसलिए क्योंकि इन रोवर के बीच 1891 किमी की दूरी है। चांद पर क्रैश हुए चंद्रयान-2 का मलबा खोजने वाले शनमुगा सुब्रमण्यम ने इसकी जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि आखिर यह दोनों रोवर एक दूसरे से कितने दूर हैं। इसके साथ ही उन्होंने आगे लिखा कि उनकी जानकारी के हिसाब से शायद पहली बार है जब चांद पर दो रोवर एक्टिव हैं। अभी तक दुनिया के एलीट स्पेस क्लब में अमेरिका, चीन और सोवियत संघ थे। लेकिन अब इसमें भारत की एंट्री हो गई है।छह पहियों वाला है प्रज्ञान रोवरभारत का प्रज्ञान रोवर छह पहियों वाला है। धरती पर तस्वीरें भेजने के लिए इसमें नेविगेशन कैमरा लगा है। विक्रम लैंडर से यह निर्देश प्राप्त करते हुए 500 मीटर तक चांद की सतह पर चलेगा। सबकुछ योजना के मुताबिक चल रहा है। प्रज्ञान के रास्ते में छोटी चट्टानें या ढलान कोई बड़ी बाधा नहीं पैदा कर रही। चीन का रोवर 2019 से ही सतह पर काम कर रहा है। वहीं भारत का प्रज्ञान सिर्फ 14 दिनों तक ही काम कर सकेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि जहां प्रज्ञान है वहां रात होने पर तापमान माइनस 150 डिग्री तक पहुंच जाएगा, जिसमें रोवर का काम करना संभव नहीं।चीन भेजेगा नया रोवरचीन का युतु-2 रात होने पर स्लीप मोड में चला जाता है। इससे पहले चीन युतु रोवर चांद पर चला चुका है जो चीन के चांग’ई 3 लैंडर के जरिए चांद के ऑर्बिट में पहुंचा था। चीन का रोवर भी छह पहियों वाला है। इसकी रेंज 10 किमी है और यह 3 स्कॉयर किमी के एरिया को पृथ्वी के 90 दिनों में एक्सप्लोर कर सकता है। चीन का अगला रोवर चांग’ई -7 मिशन के जरिए भेजा जाएगा, जो 2026 में लॉन्च होगा। यह युतु-2 से बड़ा होगा। लेकिन इसकी बनावट समान ही होगी।