बखमुत में ऐसा क्या है जिसे पाने के लिए मची है मार-काट, रूस और यूक्रेन ने जंग में झोंकी पूरी ताकत

कीव: रूस और यूक्रेन में बखमुत शहर पर कब्जे के लिए भीषण लड़ाई जारी है। दोनों ही देशों ने में पिछले 24 घंटों में सैकड़ों दुश्मन सैनिकों को मारे जाने का दावा किया है। बखमुत के बीच से बहने वाली एक छोटी सी नदी अब नई फ्रंट लाइन बन गई है। इस शहर के आधे हिस्से पर रूस ने कब्जा जमा लिया है, जबकि आधे पर अब भी यूक्रेन का अधिकार है। व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचने के बावजूद रूस और यूक्रेन में से कोई भी पक्ष पीछे हटने को राजी नहीं है। इस युद्ध में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्राइवेट आर्मी वैगनर ग्रुप के भी लड़ाके शामिल हैं।रूस और यूक्रेन के अपने-अपने दावेयूक्रेनी सैन्य प्रवक्ता सेरही चेरेवती ने कहा कि बखमुत में 221 रूस समर्थक सैनिक मारे गए और 300 से अधिक घायल हो गए। वहीं, रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि फ्रंटलाइन के डोनेट्स्क हिस्से में 210 यूक्रेनी सैनिक मारे गए। बड़ी बात यह है कि रूस और यूक्रेन दोनों ने अपनी-अपनी सेना के हताहतों की जानकारी को साझा नहीं किया है। पूर्वी डोनेट्स्क का बखमुत शहर वर्तमान में सूनसान है। यह शहर पिछले एक साल से जारी लड़ाई का सबसे हिंसक स्थान बना हुआ है। दोनों पक्षों ने बखमुत में महत्वपूर्ण नुकसान होने की बात स्वीकार की है, हालांकि हताहतों की सही संख्या स्वतंत्र रूप से सत्यापित नही की जा सकी है।ब्रिटिश मिलिट्री इंटेलिजेंस ने दी जानकारीब्रिटिश मिलिट्री इंटेलिजेंस ने शनिवार को कहा कि रूस के भाड़े के सैनिक वैगनर समूह ने बखमुत के अधिकांश पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण कर लिया है। कुछ दिनों पहले वैगनर समूह के संस्थापक येवगेनी प्रिगोझिन ने भी बखमुत पर कब्जे का दावा किया था। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने अपने दैनिक खुफिया बुलेटिन में कहा कि शहर के केंद्र में बखमुटका नदी अब दोनों देशों की सेनाओं के बीच फ्रंट लाइन बन गई है।बखमुत पर कब्जे के लिए बेचैन क्यों है रूसयूक्रेन के बखमुत में जिप्सम और नमक की कई खदाने हैं। रूस का इरादा इस शहर पर कब्जा कर खानों से निकलने वाले खनिजों पर अधिकार जमाना है। वैगनर समूह के प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन पहले ही बता चुके हैं कि वे इन खदानों के जरिए युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई करेंगे। इन खनिजों से होने वाली आय से युद्ध में मारे गए लड़ाकों को पैसे दिए जाएंगे और रूस के लिए ताकत जुटाई जाएगी। खदानों के विशाल चेन के कारण रूस हर हाल में बखमुत पर कब्जा करना चाहता है, जबकि यूक्रेन इसे छोड़ने को राजी नहीं है।