कांग्रेस ऐसा क्या कर रही कि सीट शेयरिंग के मुद्दे पर सहयोगी दलों से बन जाए बात, 5 पॉइंट्स में समझें

नई दिल्ली : 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर विपक्षी खेमे इंडिया गठबंधन के बीच फिलहाल सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है। विपक्ष का प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते घटक दलों के साथ जारी लगातार चर्चा के बीच ने संकेत दिया कि वह गठबंधन को सफल बनाने के लिए अपने घटक दलों को साथ लाने के लिए हर संभव कोशिश करेगी। कांग्रेस के एक अहम रणनीतिकार का कहना था कि पार्टी गठबंधन के बीच सीट बंटवारे के काम को सफल बनाने के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अगर उसे अपने सहयोगियों को साथ लेने के लिए कुछ अतिरिक्त भी करना पड़े तो वह करने के लिए तैयार है, क्योंकि हमारा मकसद किसी भी हाल में बीजेपी को फिर से सत्ता में आने से रोकना है। हालांकि पार्टी के साथ एक दिक्कत आ रही है कि तमाम राज्यों में सहयोगी दल ज्यादातर उन्हीं सीटों की मांग कर रहे हैं, जहां विपक्ष के लिए जीत की संभावना है या जहां बीजेपी को हराया जा सकता है। इस दिक्कत को दूर करने में जुटे नेताकांग्रेस के सामने एक असमंजस की स्थिति यह भी है कि अगर वह ऐसी तमाम सीटें सहयोगियों को दे देती है तो उसके पास अपने लिए जीत की गुंजाइश कम पड़ेगी। ऐसे में कांग्रेस के लिए सहयोगी दलों के साथ बारगेनिंग में दिक्कत आ सकती है। बताया जाता है कि इंडिया गठबंधन के बीच सीट बंटवारे को लेकर जहां एक ओर कांग्रेस की गठबंधन समिति औपचारिक तौर पर सीट बंटवारे के लिए बातचीत में व्यस्त है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी विभिन्न राजनीतिक दलों के टॉप लीडरशिप के साथ लगातार संपर्क हैं। कांग्रेस अलग-अलग दलों से कर रही बातइस सिलसिले में खरगे ने पिछले दिनों एम के स्टालिन, नीतीश कुमार, लालू यादव, शरद पवार, उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं से बात की। इस बारे में कांग्रेस के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश का कहना था कि इंडिया गठबंधन के संयोजक व अध्यक्ष को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष खरगे बिहार के सीएम नीतीश कुमार सहित तमाम दलों के सीनियर नेताओं से संपर्क में हैं। उनसे बात कर रहे हैं। उम्मीद है कि कुछ ही हफ्तों में इस पर फैसला हो सकता है। दरअसल, इन दोनों के साथ कांग्रेस के बीच रिश्ते खींचातानी भरे हैं। हालांकि सीट बंटवारे के काम को आसान व निर्बाध बनाने के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य व नजरिया अपनाने पर जोर दे रही है। 26 जनवरी तक बन सकती है बातकांग्रेस को उम्मीद है कि यह काम 26 जनवरी के आसपास या जनवरी के आखिर तक पूरा हो सकता है। वहीं इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए गठबंधन के घटक दलों के शीर्ष नेताओं के बीच मुलाकात जल्द हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी की की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के शुरू होने से पहले खरगे व राहुल गांधी, शरद पवार, उद्धव ठाकरे जैसे नेताओं की मुलाकात हो सकती है और सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इन्हीं तमाम कवायदों के बीच गठबंधन में उन दलों के बीच आपसी दूरियों को कम करने की कोशिश हो रही है, जिनके बीच आपसी दूरियां हैं। कटु अनुभवों को दूर करने की कोशिश मसलन यूपी में एसपी व बीएसपी को भी साथ लाने की कोशिश हो रही है। कांग्रेस की कोशिश है कि यूपी में बीएसपी भी गठबंधन का हिस्सा बने, जिससे यह गठबंधन मजबूत होगा। इसके मद्देनजर कांग्रेस दोनों को साथ लाने की बात कर रही है। दरअसल, यूपी में दोनों ही दल एक दूसरे के घोर विरोधी हैं। वहीं कांग्रेस आप के साथ भी अपने कटु अनुभवों को दूर करने की कोशिश कर रही है। जिससे उसके साथ सीट बंटवारे की प्रक्रिया सहज रूप से आगे बढ़ सके। सहयोगी दलों के दबाव से निपटने की कोशिशहालांकि कांग्रेस को लगता है कि आप उन राज्यों में हावी होने की कोशिश कर रही है, जहां उसका ज्यादा कोई स्टेक नहीं है। मसलन, गोवा, हरियाणा गुजरात जैसे राज्यों में। पार्टी के भीतर यह राय है कि सहयोगी दलों के साथ साझेदारी को लेकर भले ही पार्टी राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में सहयोगियों के साथ अतिरिक्त कोशिश करने से नहीं गुरेज करेगी, लेकिन एक सीमा के बाद पार्टी झुकेगी भी नहीं।