लीप सेकेंड क्या होता है, अब क्यों खत्म करने की तैयारी… टाइम में क्या बदलने वाला है!

नई दिल्ली: लीप ईयर (Leap Year) के बारे में आपने बचपन में ही पढ़ा होगा लेकिन क्या लीप सेकेंड के बारे में आप जानते हैं? अगर नहीं तो कोई बात नहीं, अब यह रिटायरमेंट की कगार पर है। वास्तव में, हर चार साल बाद लीप ईयर आता है जो फरवरी महीने से संबंधित होता है। लीप ईयर में फरवरी के मही ने में एक दिन बढ़ जाता है। इसके चलते उस साल फरवरी का महीना 29 दिनों का हो जाता है। लीप सेकेंड की बात करें तो पिछली आधी सदी में दुनियाभर की घड़ियों में इस सेकेंड को जोड़ा जाता रहा है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प हो जाता है कि आखिर इसकी विदाई क्यों हो रही है? और आगे क्या बदलने वाला है।

लीप सेकेंड कितना महत्वपूर्ण है?
लीप सेकेंड को घड़ियों में जोड़ने का मकसद सटीक एटॉमिक टाइम और पृथ्वी के घूमने में (घूर्णन) लगने वाले समय के बीच अंतर को खत्म करना है। असल में, पृथ्वी का घूर्णन धीमा होने से बदलाव की जरूरत पड़ती है। वैसे तो, लोग लीप सेकेंड को महत्व नहीं देते हैं लेकिन तकनीकी व्यवस्था में यह बड़ी परेशानी की बात है। इसका असर यह होता है कि जब कभी एटॉमिक टाइम एक सेंकेंड आगे होता है तो उसे एक सेकेंड रोक कर पृथ्वी के हिसाब से किया जाता है। यह सिस्टम 1972 में शुरू किया गया था। तब से 27 एटॉमिक सेकेंड जोड़े जा चुके हैं। आखिरी बार 2016 में ऐसा किया गया था।

कहां-कहां जरूरी
सैटलाइट, सॉफ्टवेयर, स्पेस ट्रवेल जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सेकेंड के हिस्से भी सटीक होने चाहिए। इसके लिए घड़ियों में तालमेल जरूरी और महत्वपूर्ण हो जाता है। इससे आप समझ सकते हैं कि अगर एक सेकेंड का बदलाव होगा तो उसका कितना और कहां-कहां असर होगा। इसके चलते उन सिस्टम के लिए समस्या पैदा हो सकती है जहां समय बिल्कुल सटीक होना चाहिए। इसमें सैटलाइट नेविगेशन से लेकर टेलीकम्युनिकेशन शामिल है। अब टेक कंपनियों को इसे खत्म करने के बारे में कहा गया है। मेटा ने एक ब्लॉग पोस्ट में इसे हटाने का आह्वान किया है। यह फैसला एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में लिया गया।

जनता पर क्या असर?
अंतरराष्ट्रीय माप-तोल ब्यूरो (International Bureau of Weights and Measures) में टाइम डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. पैट्रीजिया टवेला ने बताया कि इस ऐतिहासिक फैसले से अभी अनियमित लीप सेकेंड के चलते पड़ने वाले व्यवधान के बगैर सेकेंड चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि आम जनता के लिए कुछ भी नहीं बदलेगा। वैसे, जिस देश ने मुखरता से इस पर रोक लगाने की मांग की, वह रूस था।

आगे क्या होगा
2035 के बाद एटॉमिक और खगोलीय समय के बीच अंतर को बढ़ने दिया जाएगा। एक सेकेंड के बाद अगला सेकेंड बढ़ेगा, इस तरह से अंतर एक मिनट तक बढ़ जाएगा। हालांकि इस अंतर तक पहुंचने में 50 से 100 साल लगेंगे और तब इसे यानी 1 मिनट को बढ़ाने की जरूरत होगी। वैज्ञानिक यह भी बताते हैं कि लीप सेकेंड की तरह लीप मिनट को जोड़ा नहीं जाएगा बल्कि दिन के आखिरी मिनट को पूरा होने में 2 मिनट लगेंगे।