भारत-मालदीव की बैठक में क्या-क्या हुआ? मुइज्जू सरकार ने जारी किया बयान

माले: भारत और मालदीव के बीच आज कोर ग्रुप की पहली बैठक हुई। इस बैठक में भारत का नेतृत्व उच्चायुक्त मुनु महावर ने किया। बैठक के बाद मालदीव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें दावा किया गया कि दोनों पक्ष मालदीव से भारतीय सैनिकों की वापसी के मुद्दे पर सहमत हैं। मालदीव ने भारत से 15 मार्च तक भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने का अनुरोध भी किया है। यह बैठक तब आयोजित की गई, जब मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हाल में ही चीन की यात्रा से वापस लौटे हैं। उन्होंने मालदीव आते ही भारत के खिलाफ कई बड़े फैसले भी लिए हैं। मालदीव ने बयान में क्या लिखामालदीव विदेश मंत्रालय के प्रेस विज्ञप्ति में लिखा है, “14 जनवरी 2024 मालदीव और भारत के बीच उच्च स्तरीय कोर ग्रुप की पहली बैठक आज माले में हुई। मालदीव के विदेश मंत्रालय में हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। विकास सहयोग सहित आपसी हित के कई मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सहयोग बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की और भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की। इस बात पर सहमति हुई कि उच्च स्तरीय कोर ग्रुप की दूसरी बैठक पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर आयोजित की जाएगी।”भारतीय सैन्यकर्मियों को वापस बुलाने को कहासन ऑनलाइन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति कार्यालय में सार्वजनिक नीति सचिव अब्दुल्ला नाजिम इब्राहिम ने एक प्रेसवार्ता में कहा कि राष्ट्रपति मुइज्जू ने औपचारिक रूप से भारत से कहा है कि वह 15 मार्च तक अपने सैन्यकर्मियों को वापस बुला ले। उन्होंने कहा, “भारतीय सैन्यकर्मी मालदीव में नहीं रह सकते। यह राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज्जू और इस प्रशासन की नीति है।” भारत सरकार ने अभी इस मीडिया रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है और ना ही इस पर टिप्पणी की है।भारत के साथ 100 से अधिक समझौतों की समीक्षा कर रहा मालदीवपिछले साल 17 नवंबर को मालदीव के राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने के तुरंत बाद मुइज्जू ने औपचारिक रूप से भारत से भारतीय सैन्यकर्मियों को मालदीव से वापस बुलाने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि मालदीव के लोगों ने उन्हें नई दिल्ली से यह अनुरोध करने के लिए मजबूत जनादेश दिया है। माले अब नई दिल्ली के साथ 100 से अधिक द्विपक्षीय समझौतों की भी समीक्षा कर रहा है। भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी पर चर्चा मुइज्जू सरकार के तीन उपमंत्रियों के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ पोस्ट की गई अपमानजनक टिप्पणियों की पृष्ठभूमि में दोनों देशों के बीच उत्पन्न विवाद के बीच शुरू हुई है। मुइज्जू ने भारत पर लगाया था धमकाने का आरोपमुइज्जू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले तीन मंत्रियों को निलंबित कर दिया था। इन मंत्रियों के पोस्ट को लेकर भारत में चिंता जताई गई और भारतीय पर्यटकों द्वारा मालदीव के बहिष्कार का आह्वान किया गया। चीन की अपनी हाल ही में संपन्न राजकीय यात्रा के दौरान, मुइज्जू ने मालदीव को बीजिंग के करीब लाने का प्रयास किया। चीन से लौटने के बाद शनिवार को प्रेस से बातचीत में राष्ट्रपति मुइज्जू ने परोक्ष रूप से भारत पर हमला बोला था। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा, “हम छोटे हो सकते हैं, लेकिन इससे आपको हमें धमकाने का लाइसेंस नहीं मिल जाता।”भारत पर मालदीव की निर्भरता कम करने की पहल शुरू कीउन्होंने भारत पर देश की निर्भरता को कम करने की योजनाओं की भी घोषणा की, जिसमें अन्य देशों से आवश्यक खाद्य वस्तुओं, दवाओं और उपभोग की अन्य सामग्रियों का आयात सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने वेलाना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर संवाददाताओं से कहा, “हम एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र हैं।” उन्होंने कहा कि किसी भी देश को किसी अन्य देश के घरेलू मामलों को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है, चाहे उसका आकार कुछ भी हो।