ईरान पर हमला करें या नहीं दुविधा में फंसे अमेरिकी राष्ट्रपति, चुनाव से पहले दांव पर प्रतिष्ठा

वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में शुरू हुए इजरायल-हमास संघर्ष में अभी तक अमेरिका की नीति थी कि वह इसे एक बड़ा क्षेत्रीय युद्ध बनने से रोके। हालांकि वह आशा कई हफ्तों पहले ही मर चुकी थी। रविवार को जॉर्डन में सिंदिग्ध ईरानी प्रॉक्सी बलों के हमले में तीन अमेरिकियों की मौत हो गई। अब अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन जवाबी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। मंगलवार को मीडिया से बातचीत में बाइडेन ने कहा कि उन्होंने हमले का जवाब देने के बारे में फैसला कर लिया है। इसके अलावा ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हमला करने वालों को वह हथियार सप्लाई करता है। ऐसे में क्या बाइडेन ईरान पर हमला कर सकते हैं?हालांकि राष्ट्रपति बाइडेन के लिए यह इतना आसान भी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हमें मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आवश्यक्ता है।’ बाइडेन युद्ध से चाहे जितना दूर भागें, सच तो ये है कि अमेरिका पहले से ही मध्य पूर्व में युद्ध में उलझा हुआ है। बाइडेन प्रशासन का युद्ध को बढ़ने से रोकने के सभी प्रयास काम नहीं कर रहे। पूरे क्षेत्र में ईरान के समर्थन वाले गुटों पर अमेरिका हमला करता रहा है। इसके बावजूद रविवार को ड्रोन का हमला नहीं रोका जा सका।हूतियों पर नहीं है कंट्रोलयमन में लगातार अमेरिका हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हमला कर रहा है। इसके बावजूद लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले नहीं रुके हैं। बाइडेन अब एक ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जब उनके सामने खतरों का मुकाबला करने के विकल्प अच्छे नहीं है। इसके साथ ही अगर वह इस संकट को धीमा करने के लिए कदम उठाते हैं तो यह उसे और भी बढ़ा सकता है। 7 अक्टूबर को इजरायल पर हमले के बाद अब तक हजारों फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं।क्यों दुविधा में बाइडेनकई राजनेताओं और एक्सपर्ट्स ने पिछले 24 घंटों में विकल्पों के बारे कई अनुमान लगाए हैं। वह यह मानते हैं कि अमेरिका को सख्त संदेश देने की जरूरत है। लेकिन साथ ही वह कहते हैं संघर्ष को खराब स्थिति में जाने से भी बचाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले कुछ महीनों और पिछले 20 वर्षों में देखा जाता रहा है कि मध्य पूर्व में अमेरिका जो योजनाएं बनाता है वह शायद ही वैसे काम करती हो। यही कारण है कि बाइडेन के सामने दुविधा है। यह देखना होगा कि क्या वह प्रतिरोध और बढ़ते युद्ध के बीच कोई हल निकाल पाते हैं या नहीं।