बिहार की राजनीति में अगस्त महीने का ‘सेकंड वीक’ फैक्टर समझिए, आखिर क्यों खास है ये महीना

पटना: अगस्त का अगला सप्ताह बिहार की राजनीति के लिए खास साबित हो सकता है। अदालत से जुड़े तीन फैसले बिहार की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं। बाहुबली सांसद आनंद मोहन के बारे में सुप्रीम कोर्ट में 8 अगस्त को सुनवाई की तारीख मुकर्रर है। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट को बताएगी कि उसने किस आधार पर सजायाफ्ता आनंद मोहन को रिहा किया। आनंद मोहन मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के ठीक एक दिन पहले यानी 7 अगस्त को लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ नौकरी के बदले जमीन (Land For Job) मामले की सुनवाई दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में शुरू होगी और 8 अगस्त तक चलेगी। नौकरी के बदले जमीन मामले में दो चार्जशीट फाइल हुई है। एक में लालू-राबड़ी और उनकी बेटियों समेत 16 लोगों के नाम हैं। दूसरी चार्जशीट में बिहार के डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव का नाम शामिल किया गया है।आनंद मोहन पर सुप्रीम कोर्ट में 8 अगस्त को सुनवाईआनंद मोहन की रिहाई को लेकर बिहार सरकार पचड़े में फंस गई है। राज्य सरकार ने जेल मैन्युअल में संशोधन कर आनंद मोहन की रिहाई का आदेश दिया था। गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या के आरोप में आनंद मोहन उम्रकैद की सजा काट रहे थे। राजनीतिक हलके में तो यही चर्चा रही कि उनकी रिहाई के लिए ही राज्य सरकार ने जेल मैन्युअल में संशोधन किया। इसका संकेत सीएम पहले भी यह कह कर दे चुके थे कि उनकी रिहाई के लिए हम लोग क्या कर रहे हैं, यह उनकी पत्नी-बेटे से पूछ लीजिए। दरअसल जेल मैन्युअल में प्रावधान था कि लोक सेवक की हत्या के दोषी को सामान्य सजायाफ्ता की तरह रिहा नहीं किया जा सकता। भले ही जेल में उसका आचरण बढ़िया ही क्यों न रहा हो। इसे राज्य सरकार ने संशोधित कर दिया। बेहतर आचरण के आधार पर आम कैदियों को सजा माफी का प्रावधान पहले से था। राज्य सरकार ने लोक सेवकों की हत्या के दोषियों को भी अब इसी दायरे में ला दिया है। नतीजतन आनंद मोहन को इसका लाभ मिला और राज्य सरकार ने उन्हें जेल से रिहा कर दिया। रिहाई के खिलाफ कृष्णैया की पत्नी उमा देवी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। उनकी याचिका पर सुनवाई कर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुनवाई 8 अगस्त को होनी है। आनंद मोहन को राजनीतिक लाभ देने का है आरोपकृष्णैया की पत्नी के अलावा विपक्ष का भी आरोप है कि राजनीतिक लाभ के लिए राज्य सरकार ने आनंद मोहन को रिहा किया। हालांकि बिहार में प्रमुख विपक्षी बीजेपी ने खुल कर कभी आनंद मोहन की रिहाई पर सवाल खड़े नहीं किए। हां, बीजेपी की सहयोगी लोजपा (आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने इसे दलितों के साथ अन्याय जरूर बताया था। आनंद मोहन के पत्नी-बेटे अभी आरजेडी के साथ हैं। बेटे चेतन आनंद एमएलए हैं। पत्नी पूर्व सांसद लवली आनंद भी आरजेडी के टिकट पर असेंबली चुनाव लड़ चुकी हैं। महागठबंधन में आरजेडी और जेडीयू बड़े दल हैं। माना जाता है कि आरजेडी और जेडीयू ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए उन्हें रिहा कराया। जेल से रिहा होने के बाद आनंद मोहन आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और जेडीयू नेता सीएम नीतीश कुमार से मिले भी थे। मामला फंसा तो होगा बिहार की सियासत पर असरदेश में विपक्षी एकता की कवायद चल रही है। इसका आरंभ भी बिहार से ही हुआ। विपक्षी दलों की पहली बैठक भी बिहार में ही हुई थी। दूसरी बैठक बेंगलुरु में हुई और तीसरी बैठक मुंबई में इसी महीने की 25-26 तारीख को प्रस्तावित है। लालू-तेजस्वी तो इससे उत्साहित ही हैं, आनंद मोहन भी राजनीतिक रूप से बिहार में सक्रिय हो गए हैं। विपक्षी बैठक के पहले अगर सीबीआई तेजस्वी के खिलाफ गिरफ्तारी जैसा कोई सख्त कदम उठाती है तो आरजेडी के लिए मुश्किल वक्त होगा। आनंद मोहन की रिहाई को अगर सुप्रीम कोर्ट गलत ठहरा देता है तो इससे नीतीश कुमार की किरकिरी होगी। हालांकि तेजस्वी के पास जमानत का विकल्प खुला है। हां, विपक्षी दल जरूर तेजस्वी के इस्तीफे की मांग और जोर-शोर से करेंगे। चार्जशीट दाखिल होने के बाद से ही विपक्ष तेजस्वी के इस्तीफे की मांग करता रहा है।रिपोर्ट- ओमप्रकाश अश्क