Ujjain: ननद पर सास की हत्या का आरोप, महारानी की बहू बोलीं-100 करोड़ की प्रॉपर्टी हड़पने के लिए मार दिया

उज्जैन: मध्य प्रदेश में बीते 17 महीने पहले अचानक गायब हुई जिस महारानी की तलाश परिवार व पुलिस को थी उनकी मौत 1 महीने पहले इंदौर के अस्पताल में होने की जानकारी परिवार के लोगों को लगी. ये जानकारी तब लगी जब एसडीएम कोर्ट मे इससे जुडे कागजात पेश किए गए. यह जानकारी मिलने के बाद महारानी की बहू और पोते ने महारानी की बेटी पर ही उनकी हत्या करने का आरोप लगाया है. साथ ही उन्होंने कुटरचित दस्तावेज तैयार कर करोड़ों की जमीन हथियाने की बात भी कही थी.
दरअसल, ये मामला नरवर के झाला वंशज राज परिवार से जुड़ा हुआ है, जिसमें लगभग डेढ़ साल पहले यानि कि 22 अक्टूबर 2021 को यहां की महारानी अनिला कुमारी (95) अपनी बेटी विभा सिंह के कहने पर पावर ऑफ अटॉर्नी कराने के लिए अपने महल से रजिस्ट्रार ऑफिस गई थी. लेकिन इसके बाद से ही वह लापता थी. महारानी के अचानक गायब हो जाने की शिकायत उनकी बहू कनकबली और पोते हिमावत सिंह ने नरवर थाने में दर्ज करवाने के साथ ही गुमशुदगी के आवेदन थाना माधवनगर और उज्जैन कलेक्टर को भी भेजे थे.
पिछले डेढ़ सालों से महारानी की तलाश में जुटी थी पुलिस
वहीं, बीते डेढ़ सालों से पुलिस नरवर की महारानी अनिला कुमारी को खोजने का प्रयास कर ही रही थी. इसी बीच 16 मार्च 2023 को एसडीएम कोर्ट मे चल रहे एक संपत्ति के विवाद में महारानी की बेटी विभा सिंह ने कुछ दस्तावेज पेश किए. उन्होंने बताया कि महारानी अनिला कुमारी की मौत 16 फरवरी 2023 को इंदौर के अस्पताल में हो चुकी है. एसडीएम कोर्ट में जब इस बात को कहा गया तो महारानी की बहू कनकबली और पोते हिमावत सिंह को काफी दुख पहुंचा. चूंकि, बहू और पोते दोनों को यह आभास नहीं था कि महारानी हमारे बीच नहीं रही है.
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बहू का आरोप- शुरू से ही जमीन हथियाने की थी नियत
महारानी की बहू कनकबली ने आरोप लगाया कि विभा सिंह की नजर शुरूआत से ही 250 करोड़ की बेशकीमती जमीन पर थी. पहले विभा सिंह महारानी अनिला कुमारी को अपने साथ घर के एक कमरे में बंद रखती थी और उनसे हमें मिलने नहीं दिया जाता था. एसडीएम द्वारा 197 की कार्यवाही के दौरान यह बता दिया गया था कि वह चल फिर नहीं सकती है. मानसिक रूप से उनकी स्थिति ठीक नहीं है. साथ ही वह दूसरों पर आश्रित भी है. यह सब जानने के बाद भी विभा सिंह विल बनाकर रजिस्टर्ड करने की कोशिश लगातार करती रही.
जबरन पावर ऑफ अटार्नी और विल कराई रजिस्टर्ड
उन्होंने इसके लिए कुछ लोगों को घर पर भी बुलाया था, लेकिन हमने और गांव वालों ने इसका विरोध किया. फिर महारानी को रजिस्टर्ड ऑफिस ले जाया गया. जहां भी उनकी वृद्धावस्था और मानसिक रूप से स्वस्थ ना होने की दशा मे रजिस्टार्ड ने कोई भी कार्यवाही नहीं की थी. लेकिन विभा सिंह ने हाई कोर्ट को भ्रमित कर महारानी को मेडिकल रूप से ठीक होना बताया, जिसके बाद एक आर्डर जारी हुआ था.
इसमें इस पूरी कार्यवाही के दौरान वीडियो बनाने का कहा गया था. लेकिन यह वीडियो देखने पर भी साफतौर पर लगता है कि महारानी इस पूरी कार्रवाई से अनजान थी. उन्हें जबरदस्ती पावर ऑफ अटॉर्नी करवाया गया और विल भी रजिस्टर्ड करवाई गई.
करोड़ो की संपत्ति से जुड़ा है मामला
मिली जानकारी के अनुसार, साल 1990 में महाराजा महेंद्र सिंह के निधन के बाद लगभग 250 करोड़ की संपत्ति की वारिस महारानी अनिला कुमारी बन गई थी. महारानी अनिला कुमारी के 2 बेटे थे. जिनमें वीरभद्र सिंह और शैलेंद्र सिंह थे. इन दोनों बेटों में वीरभद्र ने शादी नहीं की थी.जबकि शैलेंद् रसिंह की पत्नी कनकबली और बेटे हिमावत सिंह है. इनके साथ ही महारानी की एक बेटी विभासिंह है. जिनके पति बसंत सिंह बिहार में राजद के कार्यकाल के दौरान भवन निर्माण मंत्री रह चुके हैं. बीते 4 साल पहले इनका निधन हुआ था, जिसके बाद से ही विभासिंह अपने बेटे कुशाग्र सिंह के साथ नरवर लौट आई थी. साथ ही पिछले काफी सालों से वह अपनी मां के साथ नरवर के इसी महल में रह रही थी.
मेरे परिवार को जान का खतरा- हिमावत सिंह
महारानी अनिला कुमारी की मौत के बाद उनके पोते हिमावत सिंह और बहु कनकबली ने विभा सिंह पर महारानी की हत्या का आरोप लगाया है. साथ ही जमीन हथियाने की नियत से कूट रचित दस्तावेज तैयार करने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि 250 करोड़ की इस संपत्ति में से महारानी 150 करोड़ की बेशकीमती जमीन विभासिंह को दे चुकी थी.
बावजूद इसके उनकी नजर बाकी बची 100 बीघा यानी कि 100 करोड रुपए की जमीन पर टिकी हुई थी, जिसे हथियाने के लिए इन लोगों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और यह जमीन भी हथिया ली. हिमावत सिंह ने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में विभा सिंह के साथ कुछ प्रभावशाली और जनप्रतिनिधि लोग शामिल हैं, जिनसे मेरे परिवार को जान से खतरा है.
अंतिम दर्शन से भी रह गए वंचित- हिमावत सिंह
झाला वंशज के राजकुमार और महारानी के पोते हिमावत सिंह ने बताया कि एसडीएम कोर्ट में हमे महारानी की मौत की जानकारी 1 महीनें बाद लगी थी. वैसे तो महारानी का अंतिम संस्कार शाही तरीके से किया जाना था. क्योंकि वह झाला वंशज राज परिवार की महारानी होने के साथ ही गुजरात के वाजदा स्टेट की राजकुमारी भी थी, लेकिन उनकी मौत को कुछ इस तरह छुपाया गया कि ना तो हम उनके अंतिम दर्शन कर सके और ना ही उनका अंतिम संस्कार ठीक तरीके से किया जा सका.
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