Ujjain: महाकाल के दरबार मे मासिक शिवरात्रि पर उमड़े भक्त, चढ़ाए तिल और चावल; क्या है महत्व

उज्जैन में वैशाख कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर सोमवार को बाबा महाकाल के दरबार मे श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा. भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन करना उनका आशीर्वाद लिया. वैसे तो बाबा महाकाल के दरबार मे प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लेकिन चतुर्दशी श्रद्धालुओं के लिए काफी खास थी. दरअसल महीने में एक बार आने वाली शिवरात्रि पर श्रद्धालु न सिर्फ उपवास रखते हैं बल्कि बाबा दे दर्शन के लिए पूरे दिन महाकाल के दरवार में पहुंचते रहते हैं.
श्रद्धालु चाहते थे कि वह मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचकर बाबा महाकाल का जलाभिषेक करें, लेकिन वहां तक वे लोग नहीं पहुंच सके. सभी को रेलिंग से ही बाबा महाकाल के दर्शन करने पड़े. महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि प्रतिमाह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर बाबा महाकाल का दर्शन पूजन करने वाले श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर आते हैं.
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क्या है मासिक शिवरात्रि पर दर्शन का महत्व
वैसे तो बाबा महाकाल के दर्शन मात्र से ही अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है और समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है. लेकिन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान महाकाल के दर्शन करने का अवग ही महत्व है. मातंगी ज्योतिष केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित अजय व्यास ने बताया कि भविष्य पुराण में इस बात का उल्लेख है कि प्रत्येक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मासिक शिवरात्रि होती है.

इस दिन भगवान का पूजन अर्चन और उपवास करने से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण हो जाता है. उन्होंने बताया कि पुराणों के मुताबिक चतुर्दशी के दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और शिव गणों की पूजा करने से न सिर्फ माता-पिता के सभी कृष्ट दूर होते हैं बल्कि व्रत और पूजन करने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं.
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सांध्य आरती के बाद चढ़ाए तिल और चावल
श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि चतुर्दशी को शाम की आरती के बाद बाबा महाकाल को तिल और चावल चढ़ाए गए. भगवान को तिल और चावल चढ़ाने के बारे में उन्होंने विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि तिल धन धान्य में बढ़ोतरी करते हैं. साथ ही चावल शीतलता का प्रतीक है, जो कि बाबा महाकाल को अति प्रिय है. इन दोनों ही वस्तुओं को चढ़ाने से बाबा महाकाल भक्तों की मनोकांना पूरी करते है. इसीलिए भक्तों ने भगवान को शाम के समय तिल और चावल अर्पित किए.
अन्य मंदिरों में भी रही भारी भीड़
श्री महाकालेश्वर मंदिर के साथ ही ऋणमुक्तेश्वर, मारकंडेश्वर महादेव, पशुपतिनाथ, अंगारेश्वर महादेव, मंगलनाथ के साथ ही 84 महादेव मंदिर और अन्य शिवालयों में भी श्रद्धालु भगवान का पूजन अर्चन और दर्शन करने पहुंचे थे. जिसके कारण शिव मंदिरों पर भारी भीड़ देखी गई.