‘मनहूस’ माना जाता है शिमला का ये सरकारी आवास, जिस मंत्री को हुआ अलॉट… वो हारा चुनाव

शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की बहुत सी ऐसी कहानियां है जिसके बारे में आप सुनेंगे तो आपको यकीन नहीं होगा। राजधानी शिमला की भूतों की कहानियां तो बहुत मशहूर हैं, लेकिन क्या आपने शिमला के ‘मनहूस’ सरकारी आवास के बारे में सुना है? ये ऐसा सरकारी आवास है, जो जिस मंत्री को अलॉट हुआ वो अगला चुनाव जीत नहीं पाया। प्रदेश सचिवालय से कुछ ही दूरी पर यह सरकारी आवास है जिसका नाम ‘क्रिस्टन हॉल’ है। बाहर से ये आवास देखने में बहुत आलीशान है। लेकिन यहां बड़े से बड़ा मंत्री रहना नहीं चाहता। उन्हें डर रहता है कि कहीं वो अपना अगला विधानसभा चुनाव हार न जाए।अब इसे हकीकत कहें या अंधविश्वास। इस आवास के इतिहास पर नजर डालें तो जितने भी मंत्री इस आलीशान कोठी में रहे हैं उन्हें चुनावों में हार का ही मुंह देखने को मिला है। कद्दावर नेता आशा कुमारी, वीरेंद्र कंवर और हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल भी यहां रहने के बाद चुनाव हारे हैं। अब ये अंधविश्वास है या मनघडंत कहानी लेकिन अभी तक का इस आवास का इतिहास इस बात को सच साबित कर रहा है। जिस मंत्री को मिली ये कोठी, वो हार गया चुनावसाल 1998 में कद्दावर नेता पंडित सुखराम को भी कोठी कैबिनेट मंत्री के तौर पर अलॉट की गई थी। हालांकि उसके बाद उन्होंने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा। साल 2012 से 2017 तक नेता विपक्ष रहे पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल भी इसी कोठी में रहे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में वो हार गए। वहीं 2022 के चुनाव में वो चुनाव तक नहीं लड़ पाए। प्रदेश में 2017 में बीजेपी की सरकार आई और तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री वीरेंद्र कंवर को यह आवास अलॉट किया गया। इतिहास को दोहराते हुए वीरेंद्र कवर भी 2022 में चुनाव नहीं जीत सके। वीरेंद्र कंवर को बीजेपी सरकार में बेहतरीन काम करने वाले मंत्री के रूप में गिना जाता था। फिर भी वीरेंद्र कंवर चुनाव नहीं जीत पाए। चंद्र कुमार को अलॉट हुई है ये कोठीअब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी है और यह आलीशान कोठी कांग्रेस के दिग्गज नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्र कुमार को अलॉट की गई है। 78 साल के चंद्र कुमार अब इस आलीशान कोठी में रहने वाले हैं। चर्चाएं यह हो रही है कि 1 साल बाद चंद्र कुमार 83 साल के हो जाएंगे। ऐसे में कहा जा रहा है कि उनका अगला चुनाव लड़ना तय नहीं है। यह भी एक कारण है कि चंद्र कुमार बिना किसी डर के आलीशान कोठी में रहने को तैयार हो गए हैं। हालांकि राजनीति में चुनाव लड़ने की कोई उम्र नहीं होती है और ना ही इस तरह इस तरह की मनहूस कोठी का दंश। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि चुनावों में अगर यहां रहने वाले नेताओं को हार मिल रही है तो उसका अकेला कारण इस कोठी में रहना है। इसके अलावा भी अलग-अलग कारण नेताओं की हार के हो सकते हैं।