गंभीर बीमारी से जूझ रहा था फुटबॉल की दुनिया का ये बड़ा सितारा, आज है करोड़ों युवाओं की प्रेरणा

दुनिया का सबसे अधिक देखे जाने वाला खेल, फुटबॉल का क्रेज इन दिनों पूरी दुनिया पर चढ़ा हुआ है। इस क्रेज में सबसे अधिक खोया है साउथ अमेरिका के सबसे दक्षिणी हिस्से में करीब 5 करोड़ की आबादी वाला देश अर्जेंटीना। अर्जेंटीना के पास खुश होने की खास वजह भी है।आखिर 36 वर्षों के लंबे समय बाद अर्जेंटीना के पास तीसरी बार फीफा विश्व कप 2022 की ट्रॉफी जीतने का मौका है। अर्जेंटीना टीम के फैंस का सपना अब कुछ ही समय में पूरा होने वाला है। इस सपने को फिर से साकार करने की उम्मीद जगाई है टीम के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने।अर्जेंटीना में वर्ष 1987 के 24 जून को कुछ ऐसा हुआ जिसके कारण अर्जेंटीना का नाम अलग मुकाम पर पहुंच गया। दरअसल इस दिन फुटबॉल के महानतम खिलाड़ी लियोनेल मेसी का जन्म हुआ था। रोजारियो के मिडिल क्लास परिवार में जन्मे मेसी आने वाले समय में सबसे शानदार फुटबॉलर बने।ऐसा बीता था मेसी का बचपनलियोनेल मेसी के पिता एक फैक्ट्री में और मां सफाई का काम करती थी। इसके साथ ही उनके पिता एक क्लब को फुटबॉल कोचिंग देते थे, जिससे घर में शुरुआत से ही खेल का माहौल रहा था। मेसी ने पिता के साथ ही क्लब ज्वाइन किया वो भी मात्र पांच वर्ष की आयु में। बचपन में ही उन्होंने खेल के बेसिक सीखे। इसके बाद उन्होंने अपने क्लब को बदला। एक तरफ मेसी अपने फुटबॉल स्किल्स को बढ़ा रहे थे वहीं दूसरी तरफ महज 11 वर्ष की उम्र के बच्चे को एक भयानक बीमारी ने जकड़ लिया।मेसी को ग्रोथ हार्मोन डेफिसिएंसी नाम की बीमारी हो गई थी। इस बीमारी से जकड़े हुए अगर मेसी रहते तो शायद आज फुटबॉल का यही नजारा नहीं होता। दरअसल ये ऐसी बीमारी है जिसमें व्यक्ति की ग्रोथ रुक जाती है। मगर परिवार के पास इलाज के लिए इतने पैसे नहीं थे कि मेसी को ठीक किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। फुटबॉल क्लब बार्सिलोना उन दिनों ऐसे बच्चों को ढूंढ रहा था जो फुटबॉल के खेल में कमाल दिखा रहे थे। क्लब ऐसे बच्चों को ट्रेनिंग देने में जुटा था। इसी बीच बार्सिलोना क्लब को मेसी के बारे में पता किया और उन्हें अपने क्लब में शामिल करवा लिया।हालांकि बार्सिलोना क्लब ज्वाइन करने के बाद मेसी को अर्जेंटीना छोड़ बार्सिलोना शिफ्ट होना पड़ा। इसके बाद मेसी के फुटबॉल करियर को बड़ा और नया मोड़ मिला, जिससे उनकी जिंदगी तो बदली साथ ही फुटबॉल का भी रुख बदल गया।क्लब के साथ जुड़ने के बाद मेसी लगातार टीम के लिए गोल करने में जुटे थे। एक सीजन के दौरान 30 मैचों में मेसी ने 35 गोल किए, जिससे वो हर किसी की नजर में आने लगे थे। 17 वर्ष की उम्र में मेसी ने बार्सिलोना क्लब में ही डेब्यू कर लिया और ऐसा करने वाले क्लब के तीसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए। इसके बाद उन्होंने अपना पहला गोल सीनियर टीम के लिए 1 मई 2005 को दागा था। इसके बाद उन्होंने बार्सिलोना के साथ अपना कॉन्ट्रैक्ट साइन किया और फुटबॉल को ऐसा खिलाड़ी मिला जो दुनिया के लिए मिसाल बना।रविवार को महामुकाबलारविवार 18 दिसंबर को फ्रांस और अर्जेंटीना की टीम के बीच फीफा विश्व कप 2022 का फाइनल मुकाबला खेला जाएगा। इस मुकाबले को जीतकर मेसी 36 वर्षों के सूखे को खत्म कर सकेंगे। वहीं माराडोना की तरह ही वो भी देश को फीफा ट्रॉफी दिलाने में सफल हो जाएंगे।