सदन में होगा सिर्फ हंगामा या कुछ काम भी हो पाएगा… बजट सत्र के दूसरे फेज से क्या हैं उम्मीदें?

नई दिल्ली: सोमवार से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। देश में एकतरफ तमाम विपक्षी दलों के नेताओं पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसा जा रहा है, तो दूसरी तरफ कई दल देश की राजधानी में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस और सांसद राहुल गांधी पीएम नरेंद्र मोदी और सत्तारूढ़ दल की तीखी आलोचना कर रहे हैं। BJP भी इसका जवाब दे रही है। माना जा रहा है कि बजट सत्र का दूसरा चरण भी हंगामेदार होगा। यह 13 मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा।उठेंगे कई मुद्दे कांग्रेस, BRS सहित कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से लोकसभा में महिला आरक्षण बिल लाने और उसे पास कराने की अपील की है। इसके अलावा, सदन में जुडिशरी के साथ टकराव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अहम पदों पर नियुक्ति को लेकर टिप्पणी की है, उसे लेकर सरकार की ओर आई प्रतिक्रिया टकराव को बढ़ाती दिख रही है। सत्र में ये सभी मुद्दे उठ सकते हैं।पहले चरण में टकराव बजट सत्र के पहले दिन से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिला। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई, लेकिन आप और BRS ने अभिभाषण का बहिष्कार किया। BRS की ओर से कहा गया कि उसने केंद्र सरकार के शासन के सभी मोर्चों पर विफलता के विरोध में राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार का फैसला लिया। आप ने भी उसके फैसले का समर्थन करते हुए बहिष्कार में भाग लिया।चीन के अलावा, अडाणी समूह को लेकर हिंडनबर्ग की रिपोर्ट, पीएम मोदी पर आधारित BBC की डॉक्युमेंट्री विवाद और महंगाई को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर सवाल खड़े करती दिखी। अडाणी मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन के दोनों सदनों में टकराव दिखा। विपक्ष लगातार अडाणी मुद्दे और चीन के साथ सीमा विवाद पर चर्चा की मांग करता रहा। सरकार की ओर से तवज्जो न मिलने पर संसद में गतिरोध रहा।कांग्रेस रही अडिग अडाणी मुद्दे पर विपक्ष ने JPC की मांग भी की। संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के संबोधनों में काफी हिस्सों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया। इसे लेकर कांग्रेस ने तीखे हमले किए। राहुल गांधी के पीएम मोदी की तीखी आलोचना को लेकर BJP सांसदों ने उनके खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस भी दिया, जिसे लेकर अब भी प्रक्रिया जारी है। अडाणी मुद्दे पर तमाम विपक्षी दलों ने लगातार संसद भवन परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।अडाणी का मुद्दादूसरे चरण पर अडाणी विवाद की छाया मंडराती दिख रही है। जिस तरह से विपक्षी दलों पर भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर एजेंसियों की कार्रवाई हो रही है, उसे देखते हुए विपक्षी दल अडाणी के मुद्दे को छोड़ने के पक्ष में नहीं दिख रहे। इस बार भी अडाणी का मुद्दा सत्र में अहम रहेगा। तृणमूल कांग्रेस की ओर डेरेक ओ ब्रायन ने हाल ही में साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी अडाणी ग्रुप की कंपनियों में LIC और SBI के पैसों का निवेश, जरूरी वस्तुओं पर महंगाई की मार, बेरोजगारी और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग जैसे मसलों को बजट सत्र के दूसरे चरण में सदन के भीतर उठाएगी।राहुल पर सभापति का बयानराहुल गांधी को लेकर भी टकराव देखने को मिल सकता है। राज्यसभा के सभापति ने राहुल गांधी पर तीखी टिप्पणी की थी, जिसे लेकर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। अपने ब्रिटेन यात्रा के दौरान हाल ही में राहुल ने भारतीय संसद में अपने माइक बंद होने का आरोप लगाया, जिस पर सभापति ने उन्हें झूठा करार दिया। इसके बाद कांग्रेस की ओर से कहा गया कि सभापति अंपायर और रेफरी होते हैं, वह सत्तापक्ष के चीयरलीडर की तरह व्यवहार नहीं कर सकते। अपने नेता को लेकर संसद में कांग्रेस का आक्रामक रुख सामने आ सकता है।जांच एजेंसियों की कार्रवाई: देश में कई राजनीतिक दलों और उसके नेताओं के खिलाफ एजेंसियों की कार्रवाई चल रही है। उनमें दिल्ली के शराब घोटाला मामले में आप के नेता मनीष सिसोदिया और BRS की नेता के. कविता से लेकर नौकरी घोटाले के आरोप में RJD नेता लालू यादव और उनके परिवार के तमाम लोगों से पूछताछ चल रही है।तृणमूल कांग्रेस नेता अणुव्रत मंडल के खिलाफ भी एजेंसियों ने शिंकजा कसा है। विपक्ष के सभी दल सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं। हाल ही में पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने केंद्रीय एजेंसियों पर तंज कसते हुए कहा था कि उन्हें भारत के नक्शे में सिर्फ गैरबीजेपी शासित राज्य ही नजर आते हैं। बीजेपी शासित राज्य उनके नक्शे में हैं ही नहीं।विपक्षी एकजुटता की कोशिशसरकार के खिलाफ तमाम विपक्षी दल अपने अपने तरीके से एकजुटता का दावा करते दिख रहे हैं। आगामी सत्र में विपक्षी दलों की कोशिश रहेगी कि वह विभिन्न मुद्दों पर एकजुटता कायम रख रणनीति बनाकर सरकार को घेर सकें। कांग्रेस ने रायपुर अधिवेशन में जहां विपक्षी एकजुटता के प्रति अपना लचीला रुख दिखाया।कांग्रेस ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर BRS की के. कविता ने लगभग डेढ़ दर्जन दलों को अपने साथ मंच पर बुलाने की कोशिश की, जिसमें से लगभग नौ दल वहां पहुंचे थे। मनीष सिसोदिया के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर जिस तरह से लगभग नौ विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी के प्रति समर्थन जताया वह भी कहीं न कहीं सत्तारूढ़ दल के सामने गोलबंद हो रहे विपक्ष की कोशिश को दर्शाता है।सरकार के अजेंडे बजट सत्र के आगामी चरण को लेकर सरकार की कोशिश अपने अहम अजेंडों को पास कराने की रहेगी। उनमें विभिन्न मंत्रालयों से जुड़ी अनुदान मांगें और फाइनेंस बिल अहम हैं।माना जा रहा है कि इस दौरान सरकार अचानक कोई बिल लाकर उसे पास करा सकती है। मसलन डेटा प्रोटेक्शन बिल जैसा अहम बिल, जो लोगों से सीधा जुड़ा हो या उन्हें प्रभावित करता हो।