चीन के लिए टेंशन हैं ताइवान के नए राष्ट्रपति, विलियम लाई की जीत से खफा है ड्रैगन, क्या पूरा होगा जिनपिंग का ख्वाब?

बीजिंग: ताइवान में शनिवार को नए राष्ट्रपति को चुना गया है। एक ऐतिहासिक चुनाव में संप्रभुता समर्थक उम्मीदवार विलियम लाई को ताइवान के लोगों ने अपना राष्ट्रपति चुना है। इससे यह साफ हो गया है कि ताइवान के लोग चीन से अलग होना चाहते हैं। हालांकि यह शी जिनपिंग को नाराज करने के लिए काफी है। इस कदम से चीन खफा है। नतीजों के बाद चीन ने एक बयान जारी कर कहा, ‘ताइवान चीन का हिस्सा है।’ चीन ने शांतिपूर्ण पुनर्मिलन का आह्वान किया है, लेकिन उसने बल प्रयोग से भी इनकार नहीं किया।चीन ने चुनाव को युद्ध और शांति के बीच एक विकल्प के रूप में बताया। चीन ने हाल के महीनों में द्वीप के चारों और अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है, जिससे संभावित तनाव की संभावना बढ़ गई है। चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने लाई की संप्रभुता समर्थक डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) की निंदा की है। आठ वर्षों तक उसने ताइवान पर शासन किया है। अपनी पार्टी के लिए उन्होंने तीसरी बार जीत हासिल की। अपनी पहली टिप्पणी में उन्होंने संकेत दिया कि वह चीन के साथ नहीं जाने वाले।’लोकतंत्र की जीत’उन्होंने कहा, ‘देश आगे सही रास्ते पर चलता रहेगा। हम पीछे मुड़कर नहीं देखेगें।’ राजधानी ताइपे की सड़कों पर हजारों समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी जीत को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा, ‘हमने अपने चुनाव को बाहरी ताकतों को प्रभावित नहीं करने दिया। ऐसा इसलिए है क्योंकि हमने फैसला किया है कि केवल हम ही अपना राष्ट्रपति चुन सकते हैं।’ चुनाव से पहले ताइवान ने चीन पर हस्तक्षेप के प्रयास का आरोप लगाया था।चीन को दिया मैसेजउन्होंने चीन को भी एक संदेश दिया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह रुकावट और संघर्ष पर अधिक आदान-प्रदान और बातचीत के पक्षधर हैं। उन्होंने चीन के साथ शांति और स्थिरता का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह क्रॉस स्ट्रेट यथास्थिति बनाए रखेंगे। इसके अलावा उन्होंने ताइवान को चीन के खतरों से बचाने की प्रतिज्ञा की। स्वतंत्रता को लेकर पहले की गई टिप्पणियों में चीन लाई को अलगाववादी बता चुका है।