कोरोना तो है नहीं फिर शिंदे के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने क्यों लगाया फेसमास्क?

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) के कैबिनेट मंत्री चंद्रकांत पाटील के ऊपर स्याही फेंकने का मामला कुछ दिनों पहले मीडिया की सुर्खियां बना था। इस मामले में कुछ लोगों के ऊपर पुलिस ने कार्रवाई भी की थी। इस घटना की बीजेपी (BJP) नेताओं ने जमकर आलोचना भी की थी। इस घटना के पीछे चंद्रकांत पाटील का वह बयान था जिसमें उन्होंने यह कहा था कि को स्कूल खोलने के लिए लोगों से भीख तक मांगनी पड़ी थी। फिलहाल यह मामला ठंडा हो चुका है लेकिन चंद्रकांत पाटील (Chandrakant Patil) इस घटना के बाद से कुछ ज्यादा ही सतर्क और मुस्तैद नजर आ रहे हैं। शनिवार को एक कार्यक्रम में वह अपने चेहरे पर ट्रांसपेरेंट फेस मास्क लगाए हुए नजर आए ताकि अगर दोबारा कोई इस तरह की हिमाकत करें तो उनके चेहरे पर स्याही का धब्बा न लग सके। तभी की चंद्रकांत पाटील के ऊपर पिंपरी-चिंचवड में श्याही फेंकी गई थी। उसके बाद भी उन पर ऐसे ही हमले की धमकी दी गई थी। इसी धमकी के मद्देनजर उन्होंने यह सुरक्षा कवच अपने चेहरे पर लगाया है।

चंद्रकांत पाटील के अलावा महाराष्ट्र के कुछ नेताओं पर फिलहाल राज्य का विपक्ष बुरी तरह से भड़का हुआ है। दरअसल चंद्रकांत पाटील, प्रसाद लाड, ने छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर भारतरत्न बाबासाहेब आंबेडकर के विषय में अपमानजनक बातें कही थी। इसी बात को मुद्दा बनाकर विपक्ष ने शनिवार को मायानगरी मुंबई में हल्लाबोल मोर्चा निकाला था। बाबासाहेब आंबेडकर के लिए अपमानजनक बातें करने की वजह से चंद्रकांत पाटील पर स्याही भी फेंकी गई थी।

फेसमास्क लगाने की नौबत क्यों आई?
कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, विधायक प्रसाद लाड और मंत्री चंद्रकांत पाटील ने विवादित बयान दिए थे। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिवाजी महाराज को पुराने जमाने का हीरो कहा था। जबकि चंद्रकांत पाटिल ने यह कहा था कि कर्मवीर भाऊराव पाटिल, बाबा साहेब, फुले ने स्कूल शुरू किया लेकिन उन्हें अनुदान नहीं मिला और उन्हें लोगों ने भीख मांगनी पड़ी। वहीं प्रसाद लाड यह कहकर विवादों में आ गए थे कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के कोंकण में हुआ था। जबकि राज्य के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने यह कहा था कि शिवाजी महाराज खुद के लिए नहीं बल्कि हिंदवी स्वराज के लिए आगरा से बाहर आये थे। बिल्कुल उसी तरह से महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ भी पुरानी शिवसेना से बाहर आए हैं।