उसके घर में नीम का पेड़ है… 3 साल की मासूम ने बयां की आपबीती, गिरेबान पकड़कर रेपिस्ट को खींच लाई ‘मर्दानी’

नई दिल्ली: बात तकरीबन सात साल पुरानी 2017 की है। जगह थी यूपी के हापुड़ से सटा पिलखुआ इलाका। मई की उमस भरी गर्मी में एक मां घर के आंगन में अपनी तीन साल की बच्ची के सोई हुई थी। आंगन में ही कुछ दूरी पर बच्ची के पिता भी दूसरी चारपाई पर लेटे थे। रात के 11-12 बजे के आसपास मां की आंख खुली तो देखा बच्ची उनके पास नहीं है। हड़बड़ाकर उसने पति को जगाया और बच्ची की तलाश होने लगी। शोर सुनकर पड़ोस के लोग भी जाग गए और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वो छोटी सी बच्ची कहां गायब हो गई?परिवार और इलाके के लोग रात के अंधेरे में हर तरफ बच्ची को तलाश रहे थे कि तभी किसी ने सिसकियों की आवाज सुनी। पहुंचकर देखा तो एक सुनसान जगह पर वही बच्ची बेसुध हालत में पड़ी थी। तुरंत पुलिस को खबर दी गई और बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के साथ रेप किया गया है। यहीं नहीं, रेप के बाद उसकी हत्या की कोशिश भी की गई। आखिर कौन था वो हैवान, जिसने अपनी हवस में अंधा होकर मासूम की सिसिकियों को भी नहीं सुना? पुलिस के पास मामले में कोई सुराग नहीं था। अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज हुआ और पुलिस मामले की तफ्तीश में जुट गई।ब्लाइंड केस में पीड़ित बच्ची से हासिल किया सुरागइलाके के लोगों से पूछताछ चल रही थी। मौका-ए-वारदात को भी खंगाला जा रहा था, लेकिन पुलिस के हाथ खाली थे। बच्ची की उम्र महज तीन साल थी, इसलिए वो भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं थी। पुलिस के सामने ये एक ब्लाइंड केस था। इसी दौरान पिलखुआ में तैनात सब-इंस्पेक्टर प्रीति गर्ग को केस की जांच सौंपी गई। एसआई प्रीति ने पीड़ित बच्ची को ही केस की अहम कड़ी बनाया। उन्हें इस बात का एहसास हो गया कि अगर उस रेपिस्ट के बारे में कोई सुराग दे सकता है, तो वो पीड़ित बच्ची ही है। एसआई प्रीति बच्ची से लगातार मिलती रहीं, उससे बात करती रहीं, ताकि उसके मन में बैठा डर निकल जाए। जब उन्हें लगा कि बच्ची उनके साथ पूरी तरह से घुलमिल गई है, तो प्रीति ने उससे धीरे-धीरे घटना के बारे में जानना शुरू किया। और ऐसे मिला दरिंदे का सुरागएसआई प्रीति ने बच्ची से बातों-बातों में उस दरिंदे का हुलिया पूछना शुरू किया। उसका कद कैसा था, लंबा या नाटा? क्या वो उससे पहले भी मिली थी? क्या उनके घर पर उस आदमी का आना-जाना था? क्या उसने कभी पहले उसे खाने-पीने की कोई चीज दी थी? ये वो सवाल थे, जिनके जरिए एसआई प्रीति उस मासूम के साथ हैवानियत करने वाले हैवान का सुराग तलाश रहीं थी। और कई दिन की मशक्कत के बाद आखिरकार उन्हें सुराग मिल गया। बच्ची ने बताया कि उसके साथ गलत काम करने वाले ने अपने घर पर कन्या बिठाईं थी और वो भी वहां खाना खाने के लिए गई थी। इसके साथ ही बच्ची ने बताया कि उसके घर में एक नीम का पेड़ भी है।500 फोटो में से तलाशा गया असली मुजरिमबच्ची ने जो कुछ उन्हें बताया, एसआई प्रीति ने वो सारी जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों को दी। इसके बाद प्रीति को केस की तफ्तीश के लिए सीनियर अधिकारियों ने इलाके के करीब 500 लोगों के फोटो दिए। प्रीति ने अपनी तफ्तीश पूरी तरह से गुप्त रखी और धीरे-धीरे छोटी-छोटी संख्या में वो फोटो बच्ची को दिखाने शुरू कर दिए। वो जानती थीं कि आरोपी इसी इलाके का है और अगर उसे छानबीन की जरा भी भनक लगी तो फिर उस तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। दिन बीत रहे थे और प्रीति के पास इस केस में अभी तक केवल आरोपी के घर का जानकारी थी। इसी बीच एक दिन पीड़ित बच्ची ने उन फोटो में से एक पर हाथ रख दिया। प्रीति ने बच्ची से पूछा कि क्या वो यही आदमी था, उसने हां में सिर हिला दिया।सबूत को इस तरह से किया पुख्ताअब एसआई प्रीति को आरोपी मिल चुका था, लेकिन वो सबूत को पूरी तरह पुख्ता करना चाहती थीं। उन्होंने 2-4 दिन बाद उस फोटो को 10-12 दूसरे फोटो के बीच मिलाकर फिर से बच्ची को दिखाया। बच्ची ने इस बार भी उसी फोटो पर हाथ रखा। प्रीति ने इसकी जानकारी सीनियर अधिकारियों को दी और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीमें बना दी गईं। दूसरी तरफ, आरोपी बेफिक्र था, क्योंकि उसे लगता था कि तीन साल की मासूम बच्ची उसके बारे में कोई सुराग नहीं दे पाएगी। अगले ही दिन एसआई प्रीति ने आरोपी को उसके घर से धर-दबोचा। आरोपी लॉ का छात्र था। पुलिस थाने लाकर उससे पूछताछ की गई तो वो टूट गया और उस रात का अपना पूरा गुनाह बयां कर दिया।डेढ़ साल के भीतर दिलाई 10 साल की सजापुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि घटना वाली रात वो शराब के नशे में था। वो चुपके से पीड़ित बच्ची के घर में दाखिल हुआ और मुंह दबाकर उसे उठा लाया। इसके बाद उसने सुनसान इलाके में ले जाकर उसके साथ रेप किया और सबूत मिटाने के इरादे से उसे मारने की कोशिश भी की। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया और एसआई प्रीति जल्द से जल्द उसके खिलाफ चार्जशीट फाइल करने में जुट गईं। कोर्ट में चार्जशीट फाइल हुई, मुकदमा चला और करीब डेढ़ साल के भीतर ही पीड़ित बच्ची को इंसाफ मिल गया। कोर्ट ने उसे बच्ची के साथ दरिंदगी का दोषी मानते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई। इस फैसले से बच्ची का परिवार खुश था, लेकिन सबसे ज्यादा खुशी एसआई प्रीति गर्ग को थी, क्योंकि उन्होंने एक मासूम बच्ची को न्याय दिलाया था। प्रीति गर्ग इस समय गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक पुलिस थाने में एसएचओ के पद पर तैनात हैं।